रील्स देखते बच्चों के सामने आया आपत्तिजनक कंटेंट, मां ने दर्ज कराई FIR

उनका दावा है कि इन अकाउंट्स की पहुंच लाखों व्यूज और बड़ी फॉलोइंग तक है, जिससे यह कंटेंट तेजी से फैल रहा है और उत्तर प्रदेश में बच्चों व समाज पर इसके दुष्प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आगरा में इंस्टाग्राम रील्स को लेकर FIR
आगरा में इंस्टाग्राम रील्स को लेकर FIR
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar15 Jan 2026 09:50 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के आगरा से सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आगरा के ताजगंज इलाके की रूबी तोमर ने साइबर थाने में एक चर्चित इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके बच्चे मोबाइल पर रील्स देख रहे थे, तभी अचानक स्क्रीन पर अश्लील/आपत्तिजनक वीडियो चलने लगा। शिकायत मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आयुर्वेदिक दवाओं की सप्लाई से जुड़ी रूबी का कहना है कि संबंधित यूजर आईडी पर लगातार अश्लीलता, भद्दे इशारों और आपत्तिजनक ऑडियो वाले वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इन अकाउंट्स की पहुंच लाखों व्यूज और बड़ी फॉलोइंग तक है, जिससे यह कंटेंट तेजी से फैल रहा है और उत्तर प्रदेश में बच्चों व समाज पर इसके दुष्प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कैसे शुरू हुआ मामला?

रूबी तोमर के अनुसार, घटना की शुरुआत 4 जनवरी को उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित कमला नगर इलाके में हुई। वे काम से जुड़े सिलसिले में एक ब्यूटी पार्लर पहुंची थीं, जहां एक महिला मोबाइल पर इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल कर रही थी। तभी अचानक फीड पर एक ऐसा आपत्तिजनक वीडियो आ गया कि पार्लर में मौजूद लोग असहज हो उठे और माहौल पलभर में भारी हो गया। उस समय तो बात संभाल ली गई, लेकिन रूबी का कहना है कि अगले ही दिन वही कंटेंट घर तक पहुंच गया और यहीं से मामला गंभीर मोड़ ले गया।

बच्चों के फोन पर पहुंची वही रील

रूबी का कहना है कि 5 जनवरी को उनके बच्चे घर पर मोबाइल पर सामान्य वीडियो देख रहे थे। इसी दौरान सोशल मीडिया के सुझाव/फीड के जरिए वही आपत्तिजनक क्लिप बच्चों के सामने आ गई। रूबी की नजर पड़ते ही उन्होंने तुरंत मोबाइल बच्चों से लेकर कंटेंट बंद कराया।इसके बाद जब उन्होंने उस इंस्टाग्राम पेज को ध्यान से देखा, तो आरोप है कि वहां बड़ी संख्या में इसी तरह के वीडियो मौजूद थे। रूबी के मुताबिक, वीडियो के कमेंट सेक्शन में भी कई भद्दी और अशोभनीय प्रतिक्रियाएं थीं, जो बच्चों और समाज दोनों के लिए नुकसानदेह हैं। रूबी तोमर ने शिकायत में कहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सोशल मीडिया पर इस तरह का कंटेंट खुलेआम चलना बच्चों के मानसिक विकास के लिए खतरनाक है। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत आपत्ति नहीं, बल्कि समाज की मर्यादा और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इसी वजह से उन्होंने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस क्या कह रही है?

आगरा के साइबर थाने की टीम ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के मामलों में कड़े प्रावधान मौजूद हैं। फिलहाल साइबर सेल की मदद से संबंधित यूजर आईडी/अकाउंट्स की डिजिटल ट्रेसिंग की जा रही है और पहचान सुनिश्चित होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। UP News

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योगी सरकार का बड़ा फैसला: दोपहिया पर दोनों सवारों के लिए हेलमेट जरूरी

नियम तोड़ने पर एक हजार रुपये जुर्माना और जरूरत पड़ने पर चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित/निरस्त किए जाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि यह कदम प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और खासकर दोपहिया दुर्घटनाओं में मौतों के आंकड़ों को देखते हुए उठाया गया है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला
योगी सरकार का बड़ा फैसला
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar15 Jan 2026 09:30 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या घटाने के लिए योगी सरकार ने दोपहिया वाहनों पर हेलमेट नियम को और कड़ा कर दिया है। अब बाइक या स्कूटी पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर एक हजार रुपये जुर्माना और जरूरत पड़ने पर चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित/निरस्त किए जाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि यह कदम प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और खासकर दोपहिया दुर्घटनाओं में मौतों के आंकड़ों को देखते हुए उठाया गया है।

डीलरों के लिए नया निर्देश

उत्तर प्रदेश में हेलमेट नियम को ज़मीन पर उतारने के लिए परिवहन विभाग ने अब डीलरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने प्रदेशभर के दोपहिया वाहन विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि बाइक/स्कूटी की बिक्री के वक्त चालक और पीछे बैठने वाले दोनों के लिए ISI मार्का दो हेलमेट उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। हालांकि हेलमेट की कीमत वाहन खरीदने वाले को ही चुकानी होगी, लेकिन डीलर को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों हेलमेट दिए गए हैं और इसका प्रमाणपत्र/दस्तावेज वाहन पोर्टल पर अपलोड किया जाए। बता दें कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था लागू की गई थी कि कम-से-कम एक हेलमेट लिए बिना वाहन की डिलीवरी नहीं होगी, अब इसे और कड़ा कर दिया गया है ताकि सुरक्षा सिर्फ नियम न रहे आदत बन जाए।

क्यों बढ़ाई जा रही सख्ती?

परिवहन विभाग का कहना है कि उत्तर प्रदेश में दोपहिया पर पीछे बैठने वाले अधिकांश लोग हेलमेट को जरूरत नहीं मानते, जबकि हादसे के वक्त सबसे बड़ा खतरा सिर पर लगने वाली चोट से ही पैदा होता है। यही लापरवाही कई बार गंभीर चोट को मौत में बदल देती है। विभाग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी समिति ने भी राज्यों को हेलमेट नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि सड़क पर सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे। परिवहन आयुक्त कार्यालय के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में जान जाने की एक बड़ी वजह हेलमेट न पहनना भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मोटर वाहन अधिनियम के तहत पहले ही चालक और सहचालक के लिए हेलमेट अनिवार्य किया गया था। नियम तोड़ने पर ₹1000 का चालान और ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई (नियत अवधि तक निलंबन) का प्रावधान है। अब उत्तर प्रदेश में इसी नियम को पीछे बैठने वालों तक भी सख्ती से लागू कराने पर जोर दिया जा रहा है।

रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

विभागीय निर्देशों में Road Accidents in India-2023 रिपोर्ट का हवाला देकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े भी सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में होने वाले सड़क हादसों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही कुल दुर्घटनाओं का करीब 45% हिस्सा बाइक-स्कूटी से जुड़ा पाया गया। इन हादसों में 54,568 लोगों की मौत दर्ज की गई, जो बताता है कि दोपहिया सफर कितना जोखिम भरा हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि बड़ी संख्या में जानें इसलिए चली जाती हैं क्योंकि चालक या पीछे बैठने वाला हेलमेट नहीं पहनता, और एक क्षण की लापरवाही जानलेवा साबित हो जाती है। UP News

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शामली से गोरखपुर तक बनेगा विकास का हाई-स्पीड कॉरिडोर, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया हुई तेज

परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होते ही शामली जिले के प्रस्तावित मार्ग पर स्थित जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

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शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar14 Jan 2026 07:19 PM
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UP News : पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच वर्षों से प्रतीक्षित सीधा सड़क संपर्क अब हकीकत बनने की ओर है। शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होते ही शामली जिले के प्रस्तावित मार्ग पर स्थित जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

भूमि अधिग्रहण के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त

शामली जिला प्रशासन ने एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3-ए के तहत अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों की जमीनों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।

शामली के किन गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे

यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित मार्ग में शामिल प्रमुख गांव हैं गोगवान जलालपुर, भैंसानी इस्लामपुर। इन गांवों में सबसे पहले भूमि लेन-देन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन केंद्र सरकार के स्वामित्व में चली जाएगी।

50 से अधिक गांवों को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

करीब 35,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे से पश्चिमी यूपी के 50 से ज्यादा गांव प्रभावित होंगे, जिनमें शामली, मुजफ्फरनगर (लगभग 35 गांव)सहारनपुर (9 गांव) शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जमीन के दाम, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

पूर्व से पश्चिम तक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से न सिर्फ यात्रा समय कम होगा, बल्कि औद्योगिक निवेश, ग्रामीण विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली, देहरादून और आसपास के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

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