संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई बनेंगे दूल्हा, IPS अंशिका से होगी शादी

इस रिश्ते को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। राजस्थान के बाड़मेर से ताल्लुक रखने वाले बिश्नोई परिवार का अब उत्तर प्रदेश से पारिवारिक नाता जुड़ने जा रहा है।

यूपी पुलिस सेवा से आई खास खबर
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 11:46 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से एक सुखद और चर्चित खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश की पुलिस सेवा से जुड़े दो युवा आईपीएस अधिकारियों का रिश्ता अब विवाह बंधन में बदलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात एसपी साउथ अंशिका वर्मा और संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई की शादी की तैयारियां तेज हो गई हैं। दोनों परिवारों की सहमति के बाद वैवाहिक कार्यक्रम तय हो चुका है और अब शादी के कार्ड भी छप गए हैं। इस रिश्ते को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। राजस्थान के बाड़मेर से ताल्लुक रखने वाले बिश्नोई परिवार का अब उत्तर प्रदेश से पारिवारिक नाता जुड़ने जा रहा है। यह रिश्ता उत्तर प्रदेश के संगम नगरी प्रयागराज से जुड़े परिवार तक पहुंचेगा, क्योंकि आईपीएस अंशिका वर्मा मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली हैं। इस तरह राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच एक नया पारिवारिक संबंध स्थापित होने जा रहा है, जिसकी चर्चा अब प्रशासनिक हलकों से लेकर सामाजिक दायरों तक हो रही है।

यूपी कैडर के दो अफसरों की जोड़ी बनी आकर्षण का केंद्र

संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई पिछले कुछ समय से अपने कार्यों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के भरोसेमंद अधिकारियों में माना जाता है। वर्ष 2018 बैच के आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर के प्रतिष्ठित बिश्नोई परिवार से आते हैं। वहीं, अंशिका वर्मा वर्ष 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और इस समय बरेली में एसपी साउथ के पद पर तैनात हैं। उत्तर प्रदेश में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने महिला सुरक्षा, टेक्नोलॉजी आधारित पुलिसिंग और साइबर अपराध नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी काम करके अलग पहचान बनाई है। इससे पहले वह गोरखपुर में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।

तीन दिन चलेंगे विवाह समारोह

दोनों आईपीएस अधिकारियों का वैवाहिक कार्यक्रम तीन दिनों तक चलेगा। जानकारी के मुताबिक, समारोह की शुरुआत 28 मार्च से होगी। शादी से पहले महिला संगीत का कार्यक्रम भी रखा गया है, जिससे दोनों परिवारों में उत्साह का माहौल है। बताया जा रहा है कि 28 मार्च को बाड़मेर स्थित कृष्ण निवास में बारात पहुंचेगी। इसके बाद 29 मार्च की सुबह विदाई का कार्यक्रम होगा। वहीं, 30 मार्च को जोधपुर के एक रिसॉर्ट में भव्य रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा। इस पूरे समारोह को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। UP News

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मिशन-2027 के लिए भाजपा-संघ का बड़ा मंथन, योगी ने भी बढ़ाई सक्रियता

राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली शुरुआती कवायद माना जा रहा है। भाजपा और संघ दोनों यह समझ चुके हैं कि 2024 के चुनावी अनुभवों के बाद उत्तर प्रदेश में अब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर मुद्दे को अलग नजरिये से समझने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा-संघ का मंथन तेज
उत्तर प्रदेश में भाजपा-संघ का मंथन तेज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 10:12 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मिशन-2027 को लेकर अभी से हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उत्तर प्रदेश में चुनावी जमीन को समय रहते मजबूत करने के लिए क्षेत्रवार रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस बार सबसे खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही समन्वय बैठकों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और इन बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली शुरुआती कवायद माना जा रहा है। भाजपा और संघ दोनों यह समझ चुके हैं कि 2024 के चुनावी अनुभवों के बाद उत्तर प्रदेश में अब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर मुद्दे को अलग नजरिये से समझने की जरूरत है। यही वजह है कि इस बार रणनीति केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से अलग-अलग फोकस तय किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बदला चुनावी तैयारी का अंदाज

संघ और भाजपा के बीच समन्वय बैठकें पहले भी होती रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में चुनाव से काफी पहले इस तरह क्षेत्रवार बैठकों का सिलसिला एक बदले हुए राजनीतिक दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। पहले जहां शीर्ष स्तर की बैठकों तक ही प्रमुख नेताओं की भूमिका ज्यादा दिखाई देती थी, वहीं अब जमीनी सियासत को समझने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी सीधी भागीदारी बढ़ाई गई है। इसी बदले हुए ढांचे के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है। उनके साथ उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी भी इन बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा 2027 के चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

क्षेत्रवार मुद्दों पर बन रहा अलग राजनीतिक खाका

मिशन-2027 के लिए उत्तर प्रदेश में जो नई रणनीति तैयार की जा रही है, उसका केंद्र बिंदु क्षेत्रवार मुद्दों की पहचान है। पार्टी और संघ यह समझने की कोशिश में हैं कि पूर्वांचल, अवध, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य क्षेत्र में कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा असर डाल सकते हैं। इसी आधार पर आगे चुनावी प्रचार की भाषा, स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश में शिक्षा, सामाजिक प्रतिनिधित्व, युवाओं की अपेक्षाएं, धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श और विपक्ष के नारों के प्रभाव जैसे पहलुओं का भी बारीकी से आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इन्हीं बिंदुओं के आधार पर चुनावी संदेश को और धार दी जाएगी। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने उत्तर प्रदेश में भाजपा और संघ दोनों को यह संदेश दिया कि केवल पारंपरिक समीकरणों के भरोसे आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। इसी कारण अब संगठन ने उत्तर प्रदेश के हर इलाके की नब्ज टटोलने का फैसला किया है। जमीनी हकीकत को समझने, स्थानीय असंतोष को पहचानने और सामाजिक संतुलन को साधने की दिशा में गंभीर मंथन चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समय से पहले शुरू हुई यह सक्रियता बताती है कि भाजपा और संघ 2027 की तैयारी को सामान्य चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

संघ की बढ़ी सक्रियता भी दे रही साफ संकेत

पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश में संघ की गतिविधियों में तेजी भी साफ महसूस की गई है। अलग-अलग क्षेत्रों में सामाजिक संवाद, वैचारिक कार्यक्रम और जनसंपर्क के जरिए माहौल को अपने पक्ष में बनाने की कोशिश जारी है। दूसरी ओर भाजपा भी सरकार और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत करने में जुटी हुई है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में हो रही समन्वय बैठकों को केवल औपचारिक बैठकें नहीं माना जा रहा, बल्कि इन्हें 2027 के चुनावी ब्लूप्रिंट की बुनियाद के तौर पर देखा जा रहा है। इन बैठकों से मिलने वाले फीडबैक का असर आगे संगठन विस्तार, मुद्दों के चयन और चेहरों की भूमिका पर पड़ सकता है।

योगी की मौजूदगी ने बढ़ाया बैठकों का राजनीतिक महत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इन बैठकों में शामिल होना अपने आप में बड़ा संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन, दोनों मिशन-2027 को लेकर एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ना चाहते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भाजपा इस बार उत्तर प्रदेश में हर राजनीतिक चुनौती का जवाब पहले से तैयार रखना चाहती है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारी अब शुरुआती चर्चाओं से आगे बढ़कर ठोस रणनीतिक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्षेत्रवार बैठकों से निकले निष्कर्ष किस तरह चुनावी अभियान, नेतृत्व चयन और राजनीतिक संदेश का हिस्सा बनते हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। UP News

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युवाओं के भविष्य संवारने में जुटी योगी सरकार, जल्द शुरू होगी बड़ी पहल

इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 5 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार का मकसद केवल ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों, सेवाक्षेत्र और स्वरोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है।

योगी सरकार की बड़ी तैयारी
योगी सरकार की बड़ी तैयारी
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userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 09:48 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम अपडेट सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह अहम अपडेट उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है।  उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 के तहत ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर बड़ा दांव खेलते हुए 3349 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 5 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार का मकसद केवल ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योगों, सेवाक्षेत्र और स्वरोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ना है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश के सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों, महिलाओं और वंचित तबकों को इस योजना के केंद्र में रखकर समावेशी विकास की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल के मुताबिक, DDU-GKY 2.0 के तहत इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग के बजट में करीब 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, ताकि राज्य में कौशल विकास कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में रोजगार की चुनौती का समाधान केवल पारंपरिक नौकरियों से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन तैयार करके ही संभव है। यही वजह है कि अब स्किल ट्रेनिंग को सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।

DDU-GKY 1.0 के अनुभव के आधार पर बढ़ाया गया लक्ष्य

उत्तर प्रदेश में DDU-GKY 1.0 के तहत पहले 2.63 लाख ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था। इनमें से करीब 2 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए गए। इस प्रदर्शन को आधार बनाकर अब राज्य सरकार ने DDU-GKY 2.0 में लक्ष्य को लगभग दोगुना कर दिया है। सरकार को उम्मीद है कि बढ़े हुए बजट और बेहतर योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को बाजार की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी कम करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

 इन वर्गो पर रहेगा विशेष फोकस

इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना को सिर्फ सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है। DDU-GKY 2.0 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवारों के युवा और महिलाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है। इन वर्गों तक योजना का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश के ऐसे परिवार, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं, उनके युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्थायी आय का रास्ता दिया जाए। महिला सशक्तिकरण के नजरिए से भी यह पहल अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी प्रशिक्षण और रोजगार के दायरे में आएंगी।

दिव्यांगों के लिए चल चुके विशेष अभियान से मिला अनुभव

राज्य सरकार इससे पहले दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष अभियान चला चुकी है। ऐसे अभियानों के तहत विशेष रोजगार मेलों का आयोजन किया गया था, जिनके जरिए दो चरणों में करीब 2000 दिव्यांगों को रोजगार से जोड़ा गया। अब सरकार इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए अन्य वंचित वर्गों पर भी फोकस बढ़ाना चाहती है। उत्तर प्रदेश में यह कोशिश बताती है कि सरकार केवल आंकड़ों का लक्ष्य नहीं बना रही, बल्कि उन वर्गों तक भी पहुंचने की रणनीति बना रही है, जो अक्सर मुख्यधारा के रोजगार ढांचे से बाहर रह जाते हैं। DDU-GKY 2.0 को लेकर पहले आयोजित एक कार्यशाला में भी उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए थे। सात राज्यों की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन के दौरान मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने कहा था कि उत्तर प्रदेश केंद्र सरकार से 4.50 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य मांग रहा है। यह बयान इस बात का संकेत था कि राज्य सरकार पहले से ही बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट विस्तार की तैयारी कर रही थी। अब बजट मंजूरी के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश आने वाले समय में कौशल विकास को रोजगार नीति के केंद्र में रखने जा रहा है।

युवाओं को नौकरी से जोड़ने पर जोर

उत्तर प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ नौकरी दिलाने पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार जिलों के बाद अब ब्लॉक स्तर पर रोजगार मेले आयोजित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि गांव और कस्बों के युवाओं को शहरों तक भटकना न पड़े और उन्हें स्थानीय स्तर पर भी अवसर मिल सकें। यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के बाद नौकरी पाने की राह आसान हो सकती है। इससे एक ओर उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर युवाओं में कौशल आधारित रोजगार की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।

बजट 2026-27 में समावेशी विकास का बड़ा संदेश

वर्ष 2026-27 के बजट में कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता देकर उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में विकास का मॉडल सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर या निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार अब मानव संसाधन को भी विकास की केंद्रीय ताकत के रूप में देख रही है। बजट प्रावधानों में खास तौर पर ग्रामीण युवाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग और वंचित समुदायों पर फोकस रखा गया है। यह बताता है कि उत्तर प्रदेश समावेशी विकास के उस मॉडल पर आगे बढ़ना चाहता है, जिसमें रोजगार, कौशल और सामाजिक न्याय तीनों को साथ लेकर चला जाए।

उत्तर प्रदेश के लिए क्यों अहम है यह फैसला

देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में युवाओं की आबादी बहुत बड़ी है। ऐसे में कौशल विकास पर यह बड़ा निवेश सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करने वाला कदम भी माना जा रहा है। अगर DDU-GKY 2.0 अपने लक्ष्यों के अनुरूप लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में न सिर्फ रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे उद्योगों, सेवा क्षेत्र और स्थानीय रोजगार बाजार को प्रशिक्षित युवाओं का मजबूत आधार मिल सकता है। UP News

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