यह बढ़ोतरी ईंधन एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) सरचार्ज के रूप में लगेगी, जिसे सितंबर 2025 में बढ़ी हुई ईंधन लागत को समायोजित करने के नाम पर लागू किया गया है। सीधी भाषा में समझें तो दिसंबर में उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग साढ़े पाँच प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।

UP News : ठंड के साथ–साथ इस बार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजली उपभोक्ताओं पर महंगाई की ठिठुरन भी बढ़ने वाली है। दिसंबर माह में आने वाला बिजली बिल पिछली बार से कहीं ज्यादा भारी पड़ेगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने पूरे प्रदेश में 5.56% तक अतिरिक्त सरचार्ज वसूलने की हरी झंडी दे दी है। यह बढ़ोतरी ईंधन एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) सरचार्ज के रूप में लगेगी, जिसे सितंबर 2025 में बढ़ी हुई ईंधन लागत को समायोजित करने के नाम पर लागू किया गया है। सीधी भाषा में समझें तो दिसंबर में उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग साढ़े पाँच प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
उत्तर प्रदेश के लाखों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अगर किसी उपभोक्ता का सामान्य माह में बिजली बिल 2,000 रुपये आता था, तो दिसंबर में करीब 110 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। बड़े उपभोक्ताओं और कॉमर्शियल कनेक्शनों के लिए यह बोझ और भी ज्यादा होगा। UPPCL का कहना है कि सितंबर 2025 के दौरान ईंधन और बिजली खरीद (पावर परचेज) लागत बढ़ने से अतिरिक्त खर्च हुआ, जिसे अब FPPCA सरचार्ज के रूप में वसूला जा रहा है। अनुमान है कि सिर्फ एक महीने में ही उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं से करीब 264 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले जाएंगे।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद, उत्तर प्रदेश ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह कदम पूरी तरह उपभोक्ता विरोधी है।
उनके मुताबिक जब उत्तर प्रदेश में डिमांड बेस्ड टैरिफ लागू किया गया था, तब दावा किया गया था कि इससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा। लेकिन आज स्थिति यह है कि बिजली कंपनियों के पास ही उपभोक्ताओं का लगभग 51,000 करोड़ रुपये सरप्लस के रूप में जमा हैं। इसके बावजूद बार–बार ईंधन सरचार्ज लगाकर उत्तर प्रदेश की जनता की जेब काटी जा रही है। परिषद ने यह भी कहा कि नियमानुसार ईंधन सरचार्ज तभी लगाया जा सकता है, जब बिजली कंपनियों पर वास्तव में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा हो। मौजूदा परिस्थितियों में यह सरचार्ज उन्हें गैर–कानूनी और अन्यायपूर्ण नजर आ रहा है। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में यह कोई नया कदम नहीं है, बल्कि लगातार हर तिमाही FPPCA के नाम पर सरचार्ज लगाया जा रहा है। पिछले एक वर्ष में ही प्रदेश के उपभोक्ताओं से हजारों करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले जा चुके हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में न तो कोई राहत दी गई, न ही स्थायी टैरिफ में कटौती हुई। परिषद का कहना है कि जब बिजली कंपनियों के पास पहले से ही भारी भरकम सरप्लस रकम पड़ी है, तो ऐसे में फिर से FPPCA लगाकर Uttar Pradesh के आम उपभोक्ता, किसानों, छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद, उत्तर प्रदेश ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिसंबर के लिए लगाए गए 5.56% FPPCA सरचार्ज को वापस नहीं लिया गया, तो वे प्रदेश–व्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। परिषद की मांग है कि
दिसंबर का बिल आने से पहले उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी हो जाता है किअपने बिजली मीटर रीडिंग और बिल को ध्यान से चेक करें। बिल में FPPCA के नाम से कितनी राशि जोड़ी गई है, इसे अलग से देखें। अगर किसी को अनियमितता या ज्यादा वसूली का संदेह हो, तो वे UPPCL के कस्टमर केयर, नोडल ऑफिस या उपभोक्ता परिषद जैसे मंचों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। UP News