उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस ने नकली नोटों के अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ कर अहम सफलता हासिल की है। गंगानगर जोन की पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस ने नकली नोटों के अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ कर अहम सफलता हासिल की है। गंगानगर जोन की पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में जाली नोट, एक कार, एक बाइक और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला पूरा उपकरण बरामद किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश के कई जिलों, खासकर प्रयागराज और वाराणसी समेत अन्य इलाकों में नकली नोटों को बाजार में खपाने का काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह की गतिविधियां काफी सुनियोजित थीं और इसके तार उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से जुड़े हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब गिरोह के सरगना और उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का मुख्य संचालक पहले जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुका है, जिससे इस पूरे प्रकरण ने और अधिक सनसनीखेज रूप ले लिया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस को यह सफलता मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर मिली। डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि सरायइनायत थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने सोमवार रात करीब दस बजे हबूसा मोड़ से सहसों मार्ग पर नहर पुलिया के पास घेराबंदी की। इसी दौरान चार संदिग्धों को पकड़ा गया।गिरफ्तार आरोपियों में भदोही जिले के दुर्गागंज निवासी राहुल यादव, सुरियावां के विवेक कुमार यादव, देवरिया के गौरीबाजार निवासी नरेंद्र यादव उर्फ विराट और रुद्रपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार शामिल हैं। तलाशी के दौरान इनके कब्जे से 500 रुपये के 200 नकली नोट और 100 रुपये के 183 नकली नोट बरामद हुए। इसके अलावा एक कार और एक बाइक भी जब्त की गई। कुल बरामद जाली रकम 1 लाख 18 हजार 300 रुपये बताई जा रही है।
पूछताछ के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी कार्रवाई की। स्थानीय पुलिस की मदद से की गई छापेमारी में एक कमरे से नकली नोट तैयार करने का पूरा सेटअप बरामद किया गया। वहां से लैपटॉप, दो प्रिंटर, उच्च गुणवत्ता वाले पेपर, पांच मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए गए हैं। इस खुलासे से साफ है कि गिरोह केवल नकली नोटों की सप्लाई ही नहीं करता था, बल्कि उत्तर प्रदेश के भीतर ही उनका निर्माण भी कर रहा था। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क ने लंबे समय से कई जिलों में अपनी पहुंच बना रखी थी और मांग के हिसाब से जाली नोट बाजार में भेजे जाते थे। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पूरी तरह संगठित ढंग से काम कर रहा था। गिरोह के कुछ सदस्य नकली नोट छापते थे, जबकि अन्य सदस्य उन्हें बाजार तक पहुंचाने और खपाने का जिम्मा संभालते थे। पुलिस के अनुसार, डिमांड के आधार पर 40 से 50 फीसदी कमीशन पर जाली नोटों की सप्लाई की जाती थी। यानी असली रकम के मुकाबले आधी कीमत पर नकली नोटों का सौदा कर यह गिरोह मोटा मुनाफा कमा रहा था। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में इस तरह की गतिविधियों का फैलाव होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के संपर्क किन-किन जिलों और लोगों तक फैले हुए थे।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड राजनीति में भी सक्रिय रहा है। पुलिस के मुताबिक देवरिया जिले के गौरी खुर्द, थाना गौरीबाजार निवासी विवेक यादव इस गिरोह को संचालित कर रहा था। वह पहले देवरिया के वार्ड नंबर 18 से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ चुका है। बताया जा रहा है कि वह आगे उत्तर प्रदेश की विधानसभा राजनीति में भी प्रवेश की कोशिश कर रहा था और टिकट हासिल करने के लिए प्रयासरत था। ऐसे में इस पूरे मामले ने अपराध और राजनीति के संभावित रिश्तों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल धर्मेंद्र कुमार पहले भी इसी तरह के अपराध में जेल जा चुका है। वर्ष 2019 में उसे देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में नकली नोट मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बावजूद उसका दोबारा इस अवैध धंधे में शामिल होना यह दर्शाता है कि गिरोह के कुछ सदस्य पहले से पेशेवर अपराधी प्रवृत्ति के रहे हैं।
पूछताछ के दौरान गिरोह के सरगना विवेक यादव और एक अन्य आरोपी का नाम और मजबूती से सामने आया है। पुलिस अब उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का और बड़ा खुलासा हो सकता है। इस सफलता के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम को 15 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा भी की गई है। पुलिस का कहना है कि नकली नोटों के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे गिरोह को कानून के दायरे में लाया जाएगा। UP News