जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि तहसील में एक फर्जी व्यक्ति को असली मालिक बनाकर खड़ा किया गया, जिसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान भी नकली तरीके से तैयार किए गए थे।

UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने ऐसे संगठित गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली–मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की जमीनों पर गिद्ध दृष्टि रखकर उन्हें फर्जी कागज़ात के सहारे बेच देता था। यह गैंग बाहर रह रहे असली मालिकों की पहचान का क्लोन तैयार करता, नकली मालिक खड़ा करता और तहसील के भीतर बैठे कुछ लोगों की मदद से रजिस्ट्री तक करवा देता था।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह खास तौर पर उन लोगों की जमीनों को निशाना बनाता था जो उत्तर प्रदेश से बाहर रहते हैं या लंबे समय से अपने प्लॉट पर नहीं पहुंचे होते। सहारनपुर के थाना बिहारीगढ़ क्षेत्र में मामला तब खुला, जब मुंबई निवासी रोहित दर्शन भल्ला की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। शिकायत में बताया गया कि रोहित के मामा सुभाष चंद्र बसन्धरा की करीब सवा बीघा जमीन को जाली कागजात तैयार कर बेच दिया गया। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि तहसील में एक फर्जी व्यक्ति को असली मालिक बनाकर खड़ा किया गया, जिसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान भी नकली तरीके से तैयार किए गए थे।
पुलिस लाइन सभागार में जानकारी देते हुए एसपी देहात सागर जैन ने बताया कि गैंग ने पूरी ठंडे दिमाग से प्लानिंग करके धोखाधड़ी को अंजाम दिया। करीब 20 लाख रुपये मूल्य की इस जमीन को जाली पहचान पत्र, फर्जी फोटो और कूट रचे हुए दस्तावेजों के ज़रिए बेच दिया गया। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने दो नामजद आरोपियों – फुरकान और दस्तावेज लेखक संगम सैनी – को गिरफ्तार कर जेल भेजा। संगम सैनी पर आरोप है कि वह तहसील स्तर पर फर्जी दस्तावेज़ों की फाइल तैयार करवाने में गैंग की मदद करता था। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद जब पूछताछ की लाइन गहराई, तो पता चला कि मामला सिर्फ दो–तीन लोगों का नहीं, बल्कि आठ सदस्यों के संगठित गिरोह का है।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने गैंग के एक और सदस्य मांगेराम को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मांगेराम ने अपने तीन साथियों – मोहित उर्फ मोनू, इसरार और जुल्फकार त्यागी उर्फ गुड्डू त्यागी – के नाम खोले। इसके बाद पुलिस ने दबिश देकर इन तीनों को भी हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार,गैंग का मुख्य सरगना इसरार है,इसरार पर पहले से भी फर्जी दस्तावेज तैयार करने के कई मुकदमे दर्ज हैं, संगम सैनी तहसील में बैठकर कागज़ात की पूरी “फैक्टरी” चलाने में उसकी मदद करता था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो कारें और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी कॉल डिटेल और डिजिटल जांच के ज़रिए पुलिस अब अन्य कड़ियां जोड़ रही है।
पूछताछ में गैंग ने अपना पूरा “मॉडस ऑपरेंडी” पुलिस के सामने रख दिया। आरोपियों के मुताबिक वे पहले चरण में थाना बिहारीगढ़ और आस–पास के इलाके में ऐसी जमीनें चिन्हित करते थे, जिनके मालिक उत्तर प्रदेश से बाहर रहते हों या सालों से नहीं आए हों। दूसरे चरण में असली मालिक के नाम पर फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार कराए जाते, नकली फोटो लगाई जाती, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान तक की नक़ल की जाती। तीसरे चरण में गैंग का एक सदस्य “फर्जी मालिक” बनकर तहसील पहुंचता और उसके नाम पर बैनामा कर दिया जाता। इस पूरे खेल में तहसील के अंदर बैठे कुछ लोगों की मिलीभगत के बिना काम होना लगभग असंभव माना जा रहा है। यूपी पुलिस का मानना है कि अगर समय रहते शिकायत दर्ज न होती, तो यह गैंग सहारनपुर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में और भी कई जमीनों को इसी तरीके से हड़प चुका होता।
एसपी सागर जैन ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में 24 जुलाई को थाना बिहारीगढ़ में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें चार लोगों को नामजद किया गया था। शुरुआत में फुरकान और संगम सैनी को जेल भेजा गया, फिर उनकी निशानदेही पर बाकियों तक पहुंच बनाई गई। अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि गैंग के बाकी सदस्यों और तहसील स्तर पर मदद करने वालों की तलाश के लिए अलग–अलग टीमें बनाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि तहसील के अंदरूनी नेटवर्क की भूमिका की भी बारीकी से जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। UP News