उत्तर प्रदेश के साहित्यकारों की देश दुनिया में शुरू से ही एक अलग पहचान रही है। उत्तर प्रदेश ने देश को ऐसे कई साहित्यकार दिए जिन्होंने अपनी अनोखी लेखनी और साहित्यिक ज्ञान से देश दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है। आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी करीब 25 करोड़ के आसपास है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी उत्तर प्रदेश देश के सबसे संपन्न राज्यों में से एक है। देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश का भाषा और साहित्य से भी गहरा रिश्ता रहा है। उत्तर प्रदेश की धरती ने इस देश को ऐसे महान कवि और लेखक दिए है, जिनके शब्दों ने भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान दी है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश ही वो भूमि है जहां से रामायण और महाभारत जैसे अमर ग्रंथों की रचना हुई, जो आज भी हर भारतीय के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं।
उत्तर प्रदेश को अगर साहित्यकारों की भूमि कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। उत्तर प्रदेश ने देश को एक से बढ़कर एक साहित्यकार दिए है। पौराणिक काल से लेकर आधुनिक काल तक उत्तर प्रदेश ने इस देश को एक से बढ़कर हैं। देश के सबसे प्रसिद्ध कवियों में से एक कबीर भी उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले थे। इसके अलाव तुलसीदास, सूरदास और केशवदास भी उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले थे। उत्तर प्रदेश के साहित्यकारों की देश दुनिया में शुरू से ही एक अलग पहचान रही है। उत्तर प्रदेश ने देश को ऐसे कई साहित्यकार दिए जिन्होंने अपनी अनोखी लेखनी और साहित्यिक ज्ञान से देश दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई। श्वघोष, बाणभट्ट, मयूर, दिवाकर, वाक्पति जैसे साहित्यकारों ने प्राचीन काल में अपनी लेखनी और साहित्यिक ज्ञान से उस समय के राजाओ का दिल भी जीता था।
साहित्य का सबसे बड़ा केंद्र है उत्तर प्रदेउत्तर प्रदेश को साहित्य का सबसे बड़ा केंद्र कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। प्राचीन काल से ही वाराणसी (जिसे बनारस या काशी भी कहा जाता है), ब्रजभूमि, अवध, बुंदेलखंड और प्रयागराज जैसे क्षेत्र इसके जीवंत उदहारण रहे हैं। वाराणसी तो मानो ज्ञान, दर्शन और साहित्य का संगम स्थल ही रही है जहां ऋषि-मुनियों से लेकर कवि और दार्शनिक तक, सभी ने अपने विचारों की गंगा बहाई। यह नगरी न केवल धार्मिक और शैक्षिक विमर्शों का गढ़ रही, बल्कि यहां हुए वाद-विवादों ने भारतीय चिंतन परंपरा को भी नई दिशा दी। यही वह भूमि है, जहां संस्कृत के महान महाकाव्य, पुराण और बौद्ध साहित्य के ग्रंथ रचे गए। उत्तर प्रदेश की यह विरासत आज भी भारत के बौद्धिक वैभव की आधारशिला बनी हुई है।
भाषा की दृष्टि से भी उत्तर प्रदेश देश का सबसे समृद्ध राज्य है। भारत में भाषाओ के विकास में भी उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा योगदान है। हिंदी, उर्दू, संस्कृत, ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, बघेली, कन्नौजी और अंग्रेजी जैसी भाषाओं ने मिलकर इस राज्य की साहित्यिक परंपरा को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।
1 - अब हम आपको उत्तर प्रदेश के कुछ बेहतरीन साहित्यकारों के बारे में बता रहे है है। जिन्होंने साहित्य जगत में अपना एक अलग नाम स्थापित किया। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकारों की बात हो और कवित्री और साहित्यकार महादेवी वर्मा का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। महादेवी वर्मा जी का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद में हुआ था। श्रीमती महादेवी वर्मा जी हिंदी साहित्य जगत की सबसे बेहतरीन लेखिकाओं में से एक रही है। देश के प्रसिद्ध साहित्यकारों में महादेवी वर्मा जी का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। देश के सबसे प्रसिद्ध साहित्यकारों में से एक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें आधुनिक हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती नाम की उपाधि दी थी। अब हम आपको महादेवी वर्मा जी के कुछ प्रसिद्ध रचनाओं के बारे में बता रहे है।
1 - मेरा परिवार
2 - पथ के साथी
3 - गिल्लू
4 - मेरी कविताएं
5 - नीरजा
2 - अब हम आपको उत्तर प्रदेश के साथ - साथ देश के अनमोल रत्न कहे जाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी के बारे में बता रहे है। देश दुनिया में अपनी लेखनी से सामाजिक चेतना जगाने वाले तथा ग्रामीण जीवन को शब्दों में उकेरने वाले मुंशी प्रेमचंद भी उत्तर प्रदेश के अनमोल रत्नों में से एक है। धनपत राय श्रीवास्तव जिन्हे प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है हिंदी तथा उर्दू के सबसे बेहतरीन साहित्यकारों में से एक है। हिंदी के बेहतरीन साहित्यकारों में उत्तर प्रदेश के अनमोल रत्न मुंशी प्रेमचंद का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। अब हम आपको उत्तर प्रदेश के अनमोल रत्न मुंशी प्रेमचंद के कुछ प्रसिद्ध रचनाओं के बारे में बता रहे है।
1 - पूस की रात
2 - गोदान
3 - ईदगाह
4 - सेवासदन
5 - कफन
साहशएक