सीएम योगी का निर्देश, जल्द शुरू करें गंगा एक्सप्रेसवे

राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचा हुआ निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए ताकि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही आम लोगों के लिए चालू किया जा सके।

yogi ganga
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Mar 2026 01:38 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचा हुआ निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए ताकि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही आम लोगों के लिए चालू किया जा सके। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में चल रही बड़ी आधारभूत परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और निर्माण मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की भी समीक्षा

बैठक के दौरान चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, फरुर्खाबाद लिंक एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़े लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट हब प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि इन परियोजनाओं में आने वाली सभी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। मुुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता है, वहां प्रक्रिया को तेज किया जाए। लक्ष्य रखा गया है कि जून तक लंबित कार्यों को पूरा कर लिया जाए ताकि परियोजनाओं का कार्यान्वयन तेजी से आगे बढ़ सके।

नोएडा एयरपोर्ट से बनेगा सीधा कनेक्शन

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 74 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर के लगभग 56 गांवों से 740 एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके निर्माण के लिए करीब 1204 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। यह एक्सप्रेसवे शुरुआत में छह लेन का होगा और भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक जाएगी। लगभग 594 किलोमीटर लंबाई के साथ यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है।

जल्द शुरू होने की तैयारी

मौजूदा जानकारी के अनुसार एक्सप्रेसवे का करीब 95 से 96 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। टोल वसूली के लिए ऋअरळँ आधारित सिस्टम का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। राज्य सरकार की योजना है कि इसे मार्च के अंत या अप्रैल 2026 तक जनता के लिए खोल दिया जाए। इस परियोजना के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा तेज और सुविधाजनक हो जाएगी, साथ ही व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। 


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गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की मंजूरी

शीर्ष अदालत ने माना कि जब किसी मरीज के स्वस्थ होने की कोई वास्तविक संभावना न हो और वह लंबे समय से असहनीय चिकित्सकीय स्थिति में हो, तब उसे गरिमा के साथ विदाई देने पर विचार किया जा सकता है।

हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की मंजूरी
हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की मंजूरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 11:32 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। करीब 13 साल से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा को अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने माना कि जब किसी मरीज के स्वस्थ होने की कोई वास्तविक संभावना न हो और वह लंबे समय से असहनीय चिकित्सकीय स्थिति में हो, तब उसे गरिमा के साथ विदाई देने पर विचार किया जा सकता है।

एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में होगी पूरी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पैलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाएगा। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चिकित्सा सहायता को चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी संवेदनशीलता, गरिमा और मानवीय सम्मान के साथ संपन्न की जानी चाहिए। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिजनों की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार किया। उत्तर प्रदेश के इस परिवार ने वर्षों तक बेटे की सेवा की, लेकिन लगातार बिगड़ती हालत और शून्य सुधार की संभावना ने उन्हें मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया। हरीश के माता-पिता ने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके बेटे को ऐसी अवस्था में अनंत पीड़ा में न रखा जाए और उसे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।

मेडिकल रिपोर्ट ने भी नहीं छोड़ी उम्मीद

एम्स की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट में साफ कहा गया कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी स्थिति लाइलाज है और लंबे समय से चेतना वापस आने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इसी तथ्य को आधार बनाते हुए अदालत ने मामले को केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी परखा। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक परिस्थिति है। अदालत के लिए ऐसा निर्णय लेना कभी आसान नहीं होता, लेकिन किसी व्यक्ति को वर्षों तक ऐसी अवस्था में बनाए रखना भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता, जब उसके ठीक होने की कोई संभावना न बची हो। अदालत ने यह भी माना कि जीवन की गरिमा केवल जीने तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु के क्षण में भी उसका सम्मान बना रहना चाहिए। बता दें कि गाजियाबाद के हरीश राणा वर्ष 2013 में चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस दर्दनाक हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद से वह अचेत अवस्था में हैं। पिछले कई वर्षों से वह बिस्तर पर ही पड़े रहे। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण उनके शरीर पर घाव भी बन गए, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ती चली गई। UP News

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ग्रीन कॉरिडोर से बदलेगी लखनऊ की चाल, 13 मार्च को बड़ा कार्यक्रम

राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी।

कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी और राजनाथ सिंह
कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी और राजनाथ सिंह
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 10:58 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से चर्चा में रही ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का दूसरा चरण बनकर तैयार हो गया है और 13 मार्च को इसका लोकार्पण होने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के झूलेलाल वाटिका में आयोजित इस अहम समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इसी मौके पर तीसरे और चौथे चरण की आधारशिला भी रखी जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह परियोजना लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मॉडल को भी मजबूत करेगी।

लखनऊ के व्यस्त इलाकों को मिलेगी राहत

ग्रीन कॉरिडोर के दूसरे चरण के शुरू होने से उत्तर प्रदेश की राजधानी के उन इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा, जहां रोजाना भारी ट्रैफिक दबाव रहता है। इस हिस्से में डालीगंज, निशातगंज और समता मूलक चौक को जोड़ा गया है। करीब सात किलोमीटर लंबा यह मार्ग लखनऊ विकास प्राधिकरण की निगरानी में तैयार किया गया है। परियोजना पर लगभग 299 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस मार्ग के चालू होते ही शहर के कई भीड़भाड़ वाले हिस्सों में जाम का दबाव कम होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि वाहन चालकों को अब कई स्थानों पर रुक-रुककर आगे बढ़ने की मजबूरी से छुटकारा मिल सकता है। रिवर फ्रंट के किनारे से आवागमन आसान होने पर गोमतीनगर की ओर जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा।

समय की होगी बचत

उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि ग्रीन कॉरिडोर के सभी चरण पूरे होने के बाद लखनऊ के यातायात का ढांचा काफी हद तक बदल जाएगा। इस पूरी परियोजना का उद्देश्य आईआईएम रोड क्षेत्र को सीधे शहीद पथ और गोमतीनगर से जोड़ना है, ताकि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही ज्यादा तेज और व्यवस्थित हो सके। अभी आईआईएम रोड से गोमतीनगर तक पहुंचने में लोगों को 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। लेकिन ग्रीन कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद यही दूरी महज 15 से 20 मिनट में पूरी होने का दावा किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।

तीसरे और चौथे चरण से और मजबूत होगा नेटवर्क

13 मार्च को होने वाले कार्यक्रम में केवल लोकार्पण ही नहीं, बल्कि परियोजना के अगले विस्तार की औपचारिक शुरुआत भी होगी। तीसरे और चौथे चरण के तहत समता मूलक चौक से जनेश्वर मिश्र पार्क होते हुए शहीद पथ तक सड़क संपर्क को मजबूत किया जाएगा। इससे लखनऊ का पूर्वी और पश्चिमी हिस्सा अधिक व्यवस्थित तरीके से जुड़ सकेगा। शहरी विकास के नजरिए से देखा जाए तो यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजधानी के भविष्य के ट्रैफिक मॉडल की नींव भी मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका असर आवागमन, ईंधन बचत और यात्रा सुविधा तीनों पर दिख सकता है। ग्रीन कॉरिडोर को एक सामान्य सड़क परियोजना के बजाय आधुनिक शहरी मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके किनारे हरियाली बढ़ाने, बेहतर रोशनी की व्यवस्था करने और सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी जोर दिया गया है। इससे यह कॉरिडोर न सिर्फ यातायात को गति देगा, बल्कि गोमती नदी के किनारे शहर के सौंदर्य को भी नया स्वरूप देगा। उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते शहरी ढांचे के बीच लखनऊ का यह ग्रीन कॉरिडोर विकास और सुगम यातायात का एक अहम उदाहरण बन सकता है। कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

लखनऊ के विकास को नई रफ्तार देने वाली परियोजना

ग्रीन कॉरिडोर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा साफ दिख रही है कि राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करने के साथ-साथ एक आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन ढांचा तैयार किया जाए। 13 मार्च का कार्यक्रम सिर्फ एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि लखनऊ के इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है। अगर परियोजना तय समय में पूरी होती है, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जाम, लंबी यात्रा और अव्यवस्थित ट्रैफिक से काफी हद तक राहत मिल सकती है। ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर आने वाले वर्षों में शहर की नई लाइफलाइन बनकर उभर सकता है। UP News