इसका सीधा फायदा यह होगा कि होम लोन/निर्माण ऋण, नामांतरण, खरीद-बिक्री और संपत्ति प्रबंधन की प्रक्रिया सरल होगी। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में निवेश और निर्माण गतिविधियां बढ़ेंगी, योजनाबद्ध विकास को रफ्तार मिलेगी और ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकेंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश में गांवों की संपत्तियों से जुड़े दशकों पुराने झगड़ों पर अब “कानूनी ताला” लगाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा में उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक–2025 पेश कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का संकेत दिया है। इस कानून के लागू होते ही गांवों में बनी ‘घरौनी’ को स्थायी कानूनी पहचान मिलेगी यानी अब ग्रामीण परिवारों की संपत्ति सिर्फ कागज़ नहीं, बैंक के भरोसे वाली वैध संपत्ति बनेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि होम लोन/निर्माण ऋण, नामांतरण, खरीद-बिक्री और संपत्ति प्रबंधन की प्रक्रिया सरल होगी। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में निवेश और निर्माण गतिविधियां बढ़ेंगी, योजनाबद्ध विकास को रफ्तार मिलेगी और ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकेंगे।
केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे से तैयार की गई ‘घरौनी’ अब उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि कानूनी ताकत बनने जा रही है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए घरौनी के संरक्षण, नियमित अपडेट और उसके कानूनी प्रबंधन का साफ ढांचा तय किया गया है, ताकि दस्तावेज़ की वैधता और भरोसे पर कोई सवाल न रहे। इसका सबसे बड़ा फायदा गांव के उन परिवारों को मिलेगा, जिन्हें पहली बार अपनी आबादी की जमीन और मकान का पक्का प्रमाणपत्र मिलेगा और यही प्रमाणपत्र आगे चलकर बैंक लोन, निर्माण, नामांतरण और संपत्ति के सुरक्षित लेन-देन का रास्ता खोलेगा। सरकार के मुताबिक यह पहल ग्रामीण संपत्ति को “कागज़ से अधिकार” में बदलकर आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि घरौनी मिलते ही ग्रामीणों की संपत्ति पहली बार आर्थिक ताकत में बदल सकेगी क्योंकि इसी दस्तावेज के आधार पर वे बैंक से ऋण लेकर घर निर्माण, व्यवसाय या खेती-किसानी में निवेश कर पाएंगे। साथ ही संपत्ति कर का निर्धारण अधिक तर्कसंगत होगा, भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं “अनुमान” नहीं, बल्कि सटीक डेटा पर तैयार होंगी। जीआईएस आधारित आबादी मानचित्र गांव की गलियों से लेकर बस्तियों की सीमाओं तक स्पष्ट तस्वीर देंगे, जिससे सड़क, नाली, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं की प्लानिंग ज्यादा पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद बन सकेगी।
स्वामित्व योजना पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए एमओयू के बाद राज्य में 1,10,344 गांव अधिसूचित किए गए हैं। गैर-आबाद गांवों को छोड़ दें तो 90,573 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। सरकार के मुताबिक 9 मई 2025 तक लगभग 1.06 करोड़ घरौनियां तैयार की गईं और इनमें से 1.01 करोड़ से ज्यादा घरौनियां ग्रामीणों के हाथों तक पहुंच चुकी हैं जो योजना की व्यापकता और तेज़ अमल दोनों को रेखांकित करता है। हालांकि अब तक घरौनी में विरासत, उत्तराधिकार, बिक्री या अन्य कारणों से नाम बदलने/संशोधन को लेकर स्पष्ट नियम नहीं थे, जिससे कई जगह उलझन और विवाद की गुंजाइश बनी रहती थी। प्रस्तावित विधेयक इसी खालीपन को भरने जा रहा है अब नामांतरण और संशोधन की तय प्रक्रिया होगी, जिससे रिकॉर्ड समय पर अपडेट रहेंगे और गांवों में संपत्ति विवादों पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आबादी का आधिकारिक रिकॉर्ड अब ‘घरौनी’ के नाम से पहचाना जाएगा, जिसमें स्वामी का नाम-पता, भूखंड का विवरण, क्षेत्रफल, रेखाचित्र और स्थानिक (लोकेशन) जानकारी दर्ज होगी। किसी भी गांव की सभी घरौनियों का एक व्यवस्थित संकलन ‘घरौनी रजिस्टर’ में रखा जाएगा और इसके साथ अलग से आबादी मानचित्र भी तैयार होगा, ताकि जमीन-सीमा और बस्ती का रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट रहे। विधेयक में सर्वेक्षण अधिकारी, अभिलेख अधिकारी और अधिसूचना जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया भी तय की जा रही है यानी रिकॉर्ड बनाने से लेकर उसे वैध रूप देने तक की चेन अब नियमों के दायरे में होगी। सरकार का कहना है कि इससे गांवों में संपत्ति विवाद घटेंगे, अभिलेखों में पारदर्शिता आएगी और कराधान व्यवस्था ज्यादा प्रभावी बनेगी। योगी सरकार इसे ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के लिए दूरगामी और ऐतिहासिक सुधार बता रही है, जो उत्तर प्रदेश के गांवों को योजनाबद्ध विकास और आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाएगा। UP News