उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से औद्योगिक विकास को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह अहम शहर अब देश के बड़े कॉरपोरेट समूहों की पसंद बनता जा रहा है। अदाणी और अंबानी समूह के बाद अब टाटा पावर ने भी गोरखपुर में अपने कदम बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से औद्योगिक विकास को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह अहम शहर अब देश के बड़े कॉरपोरेट समूहों की पसंद बनता जा रहा है। अदाणी और अंबानी समूह के बाद अब टाटा पावर ने भी गोरखपुर में अपने कदम बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी यहां 100 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित करना चाहती है, जिसके लिए करीब 300 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी गीडा ने इस परियोजना के लिए धुरियापार औद्योगिक कॉरिडोर में जमीन चिह्नित कर ली है। बताया जा रहा है कि जल्द ही टाटा पावर की तकनीकी टीम गोरखपुर पहुंचकर प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण करेगी। जमीन उपयुक्त पाए जाने पर आवंटन की आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस पहल को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
टाटा पावर की इस प्रस्तावित परियोजना में करीब 800 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है। यह पूरी परियोजना सौर ऊर्जा आधारित होगी, जिससे उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई ताकत मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस प्लांट के शुरू होने के बाद गोरखपुर ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान दर्ज करेगा। इस सोलर प्लांट से हर साल लगभग 20 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को मजबूती मिलने के साथ-साथ हरित ऊर्जा के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। इतना ही नहीं, इस परियोजना से 300 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ा सकता है।
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर को निवेश और उद्योग के लिहाज से एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। यही वजह है कि अब बड़े उद्योग समूह इस शहर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। धुरियापार औद्योगिक कॉरिडोर को भी इसी सोच के तहत विकसित किया जा रहा है, ताकि पूर्वांचल के इस हिस्से में उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार मिल सके। टाटा पावर की रुचि यह संकेत देती है कि गोरखपुर अब केवल धार्मिक या भौगोलिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर तेजी से उभरता हुआ शहर बन चुका है। यदि यह परियोजना तय समय में आगे बढ़ती है तो इसका असर सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश को इसका लाभ मिल सकता है।
विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर भी उत्तर प्रदेश में ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के 10 शहरों के लिए 163.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस राशि का मकसद बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाना और शहरों की हवा को बेहतर बनाना है। इस योजना के तहत अकेले गोरखपुर को 30.35 करोड़ रुपये मिले हैं। पिछले पांच वर्षों में इस कार्यक्रम के अंतर्गत गोरखपुर को कुल 150.31 करोड़ रुपये की धनराशि मिल चुकी है। इनमें से 82.28 करोड़ रुपये अब तक खर्च भी किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार के साथ पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
गीडा के एसीईओ राम प्रकाश ने बताया कि टाटा पावर ने गोरखपुर में 800 करोड़ रुपये के निवेश से 100 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी की जरूरत के मुताबिक करीब 300 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कंपनी के प्रतिनिधियों को यह भूमि दिखाई जाएगी। निरीक्षण के बाद आगे की प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया जाएगा।