उत्तर प्रदेश में जमीन के सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप बनाकर उस प्रारूप को पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे प्रदेश में सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप लागू हो जाने से प्रदेश में स्टॉम्प ड्यूटी से जुड़े हुए विवादों में कमी आ जाएगी।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह बड़ा फैसला जमीन के सर्किल रेट को लेकर किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि पूरे प्रदेश में सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में जमीन के सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप बनाकर उस प्रारूप को पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे प्रदेश में सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप लागू हो जाने से प्रदेश में स्टॉम्प ड्यूटी से जुड़े हुए विवादों में कमी आ जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन के सर्किल रेट को लेकर पूरा प्रारूप तैयार कर लिया है। पूरे प्रदेश में जमीन के सर्किल रेट को निर्धारित रूप में अंतिम आकार देने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों के निबंधन विभाग के अधिकारियों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव आने के बाद नए प्रारूप को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। सर्किल रेट को लेकर तैयार होने वाला प्रारूप वर्ष-2026 में पूरे उत्तर प्रदेश में एक साथ लागू कर दिया जाएगा।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में सर्किल रेट का प्रारूप एक जैसा होगा। इसके लिए शासन ने सभी जिलों से सुझाव मांगे हैं। नया प्रारूप अब अगले साल ही लागू किया जा सकता है। संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए सर्किल रेट निर्धारण, मूल्यांकन आदि को लेकर सभी जिलों में काफी भिन्नता है। ऐसे में किसी एक जिले का व्यक्ति दूसरे जिले में संपत्ति खरीदकर उसकी रजिस्ट्री कराता है तो अक्सर विवाद होते हैं। इसी वजह से स्टाम्प वादों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है और राजस्व का भी नुकसान बढ़ा है। रजिस्ट्री के दौरान सर्किल रेट निर्धारण, मूल्यांकन आदि, को लेकर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए शासन ने पूरे प्रदेश में सर्किल रेट का एक जैसा प्रारूप निर्धारित करने का निर्णय लिया है और इसके लिए सभी जिलों के निबंधन कार्यालय से सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन के सर्किल रेट को लेकर जो प्रारूप तैयार किया है उसमें अनेक विशेषताएं मौजूद हैं। नए प्रारूप के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के सभी विभाग साझा और एकरूप सर्किल रेट की सूची तैयार करेंगे। औद्योगिक जमीन को भारी, मध्यम व हल्के उद्योग, कृषि आधारित और खाद्य प्रसंस्करण श्रेणियों में बांटा गया है। सर्किलरेट लिखने और जमा करने का एक ही तय प्रारूप बनाया गया है। हर जमीन के साथ उसका स्पष्ट स्थान दर्ज करना जरूरी होगा। कुछ श्रेणियों और दरों को लंबे समय (लगभग 1.5 साल) के संदर्भ में दर्ज करने का प्रावधान। जिन मामलों में विशेष स्वीकृति जरूरी होती है, उन्हें अलग-अलग नाम और पहचान दी गई है। UP News