उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होगा ऐतिहासिक फैसला
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले ऐतिहासिक फैसले से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी। भारत सरकार ने देश के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 से पहले देश में एक ऐतिहासिक फैसला होगा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले ऐतिहासिक फैसले से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी। भारत सरकार ने देश के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भारत सरकार के मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन प्रस्ताव लाकर वर्ष-2027 से ही पूरे देश में महिला आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लागू करना चाहती है। वर्ष-2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक में बदलाव करके पूरे देश में 2027 से ही महिला आरक्षण कानून लागू करने की योजना बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मास्टर स्ट्रोक होगा महिला आरक्षण कानून
आपको बता दें कि भाजपा सरकार का फोकस हमेशा से महिला आबादी पर रहा है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में महिला आरक्षण लागू करके भाजपा की सरकार मास्टर स्ट्रोक चलाना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद में संविधान संशोधन करके नारी शक्ति वंदन के नाम से महिला आरक्षण देने का कानून पारित किया गया था। वर्ष-2023 में पारित कानून में यह व्यवस्था की गई थी कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को जनगणना तथा लोकसभा एवं विधानसभाओं का परिसीमन पूरा होने के बाद लागू किया जाएगा। सरकार ने सितंबर -2023 में जो संविधान संशोधन कराया था उसके अनुसार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना था। केन्द्र सरकार ने एक बार फिर संसद में महिला आरक्षण को 2027 में लागू कराने की पहल की है।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव में बड़ा प्रयोग करना चाहती है भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष-2027 में महिला आरक्षण कानून लागू करके भाजपा की सरकार उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा प्रयोग करना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को संसद से पारित कराया था। उस विधेयक में जनगणना तथा परिसीमन के बाद महिला आरक्षण को लागू करने की व्यवस्था है। भारत में जनगणना का काम 31 मार्च 2027 तक चलेगा। जनगणना के आंकड़े आने में 2 से 3 साल का समय लग जाएगा। उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट आने में 3 से 4 साल तक का समय लगेगा। इस प्रकार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लागू नहीं हो पाएगा। यही कारण है कि केन्द्र सरकार ने एक बार फिर से संविधान संशोधन विधयेक लाकर महिला आरक्षण की व्यवस्था को वर्ष-2027 में ही लागू करने की बड़ी योजना बनाई है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल सहित सभी दल सरकार के साथ
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी प्रमुख विपक्षी दल है। केन्द्र सरकार ने वर्ष-2027 में महिला आरक्षण लागू करने के मकसद से विधेयक के लिए समाजवादी पार्टी से बातचीत शुरू कर दी है। इसके साथ ही देश भर के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के साथ केन्द्र सरकार बातचीत कर रही है। बताया जाता है कि कोई भी विपक्षी दल महिला आरक्षण की व्यवस्था का विरोध नहीं करना चाहता है। विपक्ष को पता है कि महिला आरक्षण का विरोध आत्मघाती कदम साबित होगा। यही कारण है कि यह बात तय मानी जा रही है कि विधानसभा चुनाव-2027 से पहले ही भारत में महिला आरक्षण लागू करने का ऐतिहासिक फैसला हो जाएगा।
राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला होगा महिला आरक्षण कानून
भारत में महिला आरक्षण कानून भारत की राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला साबित होगा। यही कारण है कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को ऐतिहासिक फैसला कहा जा रहा है। महिला आरक्षण की व्यवस्था लागू होने से देश की सभी विधानसभा सीटों तथा लोकसभा सीटों में से 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि महिला आरक्षण कानून लागू होने से देश में कुल विधायकों तथा सांसदों में से 33 प्रतिशत विधायक तथा सांसद महिलाएं होंगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करके बनेगा नया कानून
भारत की संसद ने सितंबर-2023 में महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में संशोधन कर दिया था। उस समय इस विधयेक को नारी शक्ति वंदन विधेयक नाम दिया गया था। नारी शक्ति वंदन विधेयक के द्वारा भारत के संविधान में आर्टीकल-339ए, 332ए तथा 334ए में संशोधन किया गया। 339 एए के माध्यम से 33 फीसदी सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 330ए के माध्यम से लोकसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाने वाली एक तिहाई सीटें (एससी और एसटी से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सहित) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 332ए के माध्यम से प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित होंगे। अनुच्छेद के खंड-3 में एससी और एसटी सहित एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। 334ए में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसके तहत महिला आरक्षण की अवधि 15 साल के लिए होगी। भविष्य में जरूरत महसूस होने पर संसद को आरक्षण की अवधि बढ़ाने का अधिकार होगा। आपको यह भी बता दें कि लोकसभा में वर्तमान में सीटों की संख्या 543 है। जैसे ही महिला आरक्षण कानून लागू होगा, महिला सदस्यों की संख्या 181 हो जाएगी जो वर्तमान में 82 है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 से पहले देश में एक ऐतिहासिक फैसला होगा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले ऐतिहासिक फैसले से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी। भारत सरकार ने देश के लिए यह ऐतिहासिक फैसला लेने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भारत सरकार के मौजूदा सत्र में ही संविधान संशोधन प्रस्ताव लाकर वर्ष-2027 से ही पूरे देश में महिला आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लागू करना चाहती है। वर्ष-2023 में लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक में बदलाव करके पूरे देश में 2027 से ही महिला आरक्षण कानून लागू करने की योजना बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में मास्टर स्ट्रोक होगा महिला आरक्षण कानून
आपको बता दें कि भाजपा सरकार का फोकस हमेशा से महिला आबादी पर रहा है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में महिला आरक्षण लागू करके भाजपा की सरकार मास्टर स्ट्रोक चलाना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद में संविधान संशोधन करके नारी शक्ति वंदन के नाम से महिला आरक्षण देने का कानून पारित किया गया था। वर्ष-2023 में पारित कानून में यह व्यवस्था की गई थी कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को जनगणना तथा लोकसभा एवं विधानसभाओं का परिसीमन पूरा होने के बाद लागू किया जाएगा। सरकार ने सितंबर -2023 में जो संविधान संशोधन कराया था उसके अनुसार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना था। केन्द्र सरकार ने एक बार फिर संसद में महिला आरक्षण को 2027 में लागू कराने की पहल की है।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव में बड़ा प्रयोग करना चाहती है भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष-2027 में महिला आरक्षण कानून लागू करके भाजपा की सरकार उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा प्रयोग करना चाहती है। वर्ष-2023 में संसद ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को संसद से पारित कराया था। उस विधेयक में जनगणना तथा परिसीमन के बाद महिला आरक्षण को लागू करने की व्यवस्था है। भारत में जनगणना का काम 31 मार्च 2027 तक चलेगा। जनगणना के आंकड़े आने में 2 से 3 साल का समय लग जाएगा। उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट आने में 3 से 4 साल तक का समय लगेगा। इस प्रकार वर्ष-2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून लागू नहीं हो पाएगा। यही कारण है कि केन्द्र सरकार ने एक बार फिर से संविधान संशोधन विधयेक लाकर महिला आरक्षण की व्यवस्था को वर्ष-2027 में ही लागू करने की बड़ी योजना बनाई है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल सहित सभी दल सरकार के साथ
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी प्रमुख विपक्षी दल है। केन्द्र सरकार ने वर्ष-2027 में महिला आरक्षण लागू करने के मकसद से विधेयक के लिए समाजवादी पार्टी से बातचीत शुरू कर दी है। इसके साथ ही देश भर के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के साथ केन्द्र सरकार बातचीत कर रही है। बताया जाता है कि कोई भी विपक्षी दल महिला आरक्षण की व्यवस्था का विरोध नहीं करना चाहता है। विपक्ष को पता है कि महिला आरक्षण का विरोध आत्मघाती कदम साबित होगा। यही कारण है कि यह बात तय मानी जा रही है कि विधानसभा चुनाव-2027 से पहले ही भारत में महिला आरक्षण लागू करने का ऐतिहासिक फैसला हो जाएगा।
राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला होगा महिला आरक्षण कानून
भारत में महिला आरक्षण कानून भारत की राजनीति के लिए सबसे बड़ा फैसला साबित होगा। यही कारण है कि महिला आरक्षण की व्यवस्था को ऐतिहासिक फैसला कहा जा रहा है। महिला आरक्षण की व्यवस्था लागू होने से देश की सभी विधानसभा सीटों तथा लोकसभा सीटों में से 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि महिला आरक्षण कानून लागू होने से देश में कुल विधायकों तथा सांसदों में से 33 प्रतिशत विधायक तथा सांसद महिलाएं होंगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करके बनेगा नया कानून
भारत की संसद ने सितंबर-2023 में महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में संशोधन कर दिया था। उस समय इस विधयेक को नारी शक्ति वंदन विधेयक नाम दिया गया था। नारी शक्ति वंदन विधेयक के द्वारा भारत के संविधान में आर्टीकल-339ए, 332ए तथा 334ए में संशोधन किया गया। 339 एए के माध्यम से 33 फीसदी सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 330ए के माध्यम से लोकसभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाने वाली एक तिहाई सीटें (एससी और एसटी से संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित सीट सहित) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 332ए के माध्यम से प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित होंगे। अनुच्छेद के खंड-3 में एससी और एसटी सहित एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। 334ए में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिसके तहत महिला आरक्षण की अवधि 15 साल के लिए होगी। भविष्य में जरूरत महसूस होने पर संसद को आरक्षण की अवधि बढ़ाने का अधिकार होगा। आपको यह भी बता दें कि लोकसभा में वर्तमान में सीटों की संख्या 543 है। जैसे ही महिला आरक्षण कानून लागू होगा, महिला सदस्यों की संख्या 181 हो जाएगी जो वर्तमान में 82 है। UP News












