सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लगभग 81% बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है, जबकि करीब 69% बीज पहले ही किसानों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। इस अभियान के जरिए सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश के हर किसान तक समय से गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचे, ताकि रबी की बुआई बिना किसी

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए रबी सीजन 2025-26 से पहले योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। उत्तर प्रदेश सरकार सब्सिडी पर 11.12 लाख क्विंटल से ज्यादा प्रमाणित बीज और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की विस्तृत योजना के साथ मैदान में उतर चुकी है। लक्ष्य साफ है उत्तर प्रदेश के किसी भी किसान को बीज और खाद की कमी की मार न झेलनी पड़े। रबी फसलों के लिए 11.12 लाख क्विंटल बीज का लक्ष्य उत्तर प्रदेश सरकार ने इस रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, तोरिया, सरसों, राई और अलसी जैसी प्रमुख फसलों के लिए कुल 11.12 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य तय किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लगभग 81% बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है, जबकि करीब 69% बीज पहले ही किसानों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। इस अभियान के जरिए सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश के हर किसान तक समय से गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचे, ताकि रबी की बुआई बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
दलहन–तिलहन को बढ़ावा, मिनीकिट से सीधी मदद राज्य सरकार उत्तर प्रदेश में दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए मिनीकिट योजना पर विशेष जोर दे रही है। दलहनी फसलों के लिए 92,518 मिनीकिट बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 76,258 मिनीकिट किसानों तक पहुंचाए जा चुके हैं। केंद्र सरकार से मिले 2,26,400 मिनीकिट के लक्ष्य के विरुद्ध 1,14,697 मिनीकिट की आपूर्ति हो चुकी है। तिलहनी फसलों के अंतर्गत सरसों और राई के लिए कुल 4.96 लाख मिनीकिट उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय हुआ, जिनमें से 4.92 लाख मिनीकिट प्रदेश में उपलब्ध करा दिए गए हैं और करीब 3.94 लाख मिनीकिट सीधे किसानों को दिए जा चुके हैं। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में क्लस्टर प्रदर्शन और गन्ने के साथ अंतर फसली खेती को बढ़ावा देने के लिए 5,700 क्विंटल सरसों का बीज किसानों को बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे राज्य में तिलहनी उत्पादन बढ़ाने और तेल आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है
रबी की तैयारी में सिर्फ बीज ही नहीं, बल्कि खाद की उपलब्धता पर भी उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले से होमवर्क कर रखा है। 01 अक्टूबर से 13 नवंबर 2025 के बीच प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता इस प्रकार रही यूरिया: 17.41 लाख टन, डीएपी: 10.00 लाख टन, एनपीके: 7.56 लाख टन, एसएसपी: 4.09 लाख टन, एमओपी: 1.51 लाख टन इसी अवधि में 4.82 लाख टन यूरिया, 6.24 लाख टन डीएपी और 3.62 लाख टन एनपीके किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। 14 नवम्बर 2025 की स्थिति के अनुसार उत्तर प्रदेश में उर्वरकों का मौजूदा स्टॉक इस तरह है 12.59 लाख टन यूरिया,3.76 लाख टन डीएपी,3.94 लाख टन एनपीके,2.65 लाख टन एसएसपी 0.81 लाख टन एमओपी सहकारिता क्षेत्र में 5.12 लाख टन यूरिया, 1.33 लाख टन डीएपी और 0.79 लाख टन एनपीके सुरक्षित है, जबकि निजी सेक्टर के सेल प्वाइंट्स पर 7.47 लाख टन यूरिया, 2.43 लाख टन डीएपी और 3.14 लाख टन एनपीके का स्टॉक मौजूद है। यानी उत्तर प्रदेश भर में किसानों को खाद की कमी महसूस न हो, इसके लिए सरकारी और निजी दोनों चैनलों को मजबूत रखा गया है।
सिर्फ अक्टूबर महीने में ही प्रदेश में 2.40 लाख टन यूरिया, 3.70 लाख टन डीएपी और 2.02 लाख टन एनपीके की बिक्री हुई। वहीं 01 से 13 नवंबर के बीच 2.03 लाख टन यूरिया, 3.02 लाख टन डीएपी और 1.31 लाख टन एनपीके की बिक्री दर्ज की गई। 01 अक्टूबर से 13 नवंबर 2025 के बीच उत्तर प्रदेश के लगभग 1.02 करोड़ कृषकों ने पीओएस मशीनों के माध्यम से 16.82 लाख टन उर्वरकों की खरीद की है। पीओएस आधारित बिक्री प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और उर्वरक वितरण पर रियल–टाइम निगरानी आसान हुई है, जिससे यूपी में खाद आवंटन को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, ओवररेटिंग और टैगिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय टीमों ने अब तक 27,315 छापे डाले हैं। 5,291 नमूने जांच के लिए भेजे गए, 1,005 लाइसेंस निलंबित और 1,314 लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। फुटकर और थोक विक्रेताओं पर संयुक्त रूप से 2,000 से अधिक निलंबन और निरस्तीकरण की कार्रवाई हुई है। प्रदेशभर में 62 दुकानों को सील किया गया और 192 एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। यह संदेश साफ है कि उत्तर प्रदेश में किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी तरह की मिलावट, जमाखोरी या कालाबाजारी को तुरंत कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद समय से उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रबी सीजन की तैयारियों को बेहतर ढंग से संचालित करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कृषि इनपुट की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलों और मंडलों में कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार रबी सीजन 2025-26 को सफल बनाने के लिए बीज से लेकर खाद तक हर मोर्चे पर जमीन से जुड़ी रणनीति के साथ काम कर रही है, ताकि किसान निश्चिंत होकर बुआई पर ध्यान दे सकें और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सके।