5 दिन की परिक्रमा के बाद बिगड़ी तबीयत, कुत्ते को मिली फ्रूट थेरेपी

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान उसने न कुछ खाया, न पानी पिया। लंबे समय तक भूखा-प्यासा रहने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसे पशु चिकित्सकों की निगरानी में लेकर इलाज शुरू कराया गया।

भूख-प्यास से कमजोर कुत्ते की हालत बिगड़ी
भूख-प्यास से कमजोर कुत्ते की हालत बिगड़ी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 11:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इन दिनों मंदिर परिसर से जुड़ा एक घटनाक्रम सुर्खियों में है, जिसने आस्था के साथ-साथ हैरानी भी बढ़ा दी है। नंदपुर गांव के प्राचीन मंदिर में एक आवारा कुत्ता कथित तौर पर लगातार पांच दिन (करीब 120 घंटे) तक हनुमान जी और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के चारों ओर परिक्रमा करता दिखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दौरान उसने न कुछ खाया, न पानी पिया। लंबे समय तक भूखा-प्यासा रहने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसे पशु चिकित्सकों की निगरानी में लेकर इलाज शुरू कराया गया।

नंदपुर मंदिर में कुत्ता बना आकर्षण का केंद्र 

ग्रामीणों के मुताबिक, कुत्ता बीते कई दिनों से मंदिर परिसर में ही मौजूद था और लगातार मूर्तियों की परिक्रमा करता दिखाई दिया। थकावट और कमजोरी बढ़ने पर जब वह निढाल होकर गिर पड़ा, तो मंदिर समिति और ग्रामीणों ने उसे गद्दे पर लिटाया, रजाई ओढ़ाई और देखभाल शुरू की। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई। नतीजा यह हुआ कि उत्तर प्रदेश के आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे और वहां मेले जैसा माहौल बन गया।मंदिर में उमड़ी भीड़ अब भगवान के साथ-साथ कुत्ते को भी विशेष संकेत मानकर देख रही है। कई श्रद्धालु उसके पास प्रसाद, रुपये-पैसे रख रहे हैं और मन्नतें मांगने की बातें भी सामने आ रही हैं। मंदिर के बाहर प्रसाद और खिलौनों की दुकानें तक लग गई हैं, जिससे माहौल और ज्यादा भीड़भाड़ वाला हो गया।

परिक्रमा के बाद कुत्ते की हालत नाजुक

लगातार भूख-प्यास के चलते कुत्ते की हालत अब नाजुक बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसने दूध और रोटी तक लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आनन-फानन में पशु चिकित्सकों को बुलाया गया। पशु चिकित्सक डॉ. अश्वनी चित्रांश के अनुसार, कई दिनों से कुछ न खाने की वजह से उसके शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो गई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए उसे ग्लूकोज और मल्टी-विटामिन की ड्रिप के साथ ‘फ्रूट थेरेपी’ दी जा रही है, ताकि शरीर में ऊर्जा लौटे और पोषण संतुलन सुधर सके। UP News

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चांदी का मुकुट, सोने का शंख… गूगल गोल्डन बाबा की कहानी सुनकर चौंक जाएंगे

बाबा का दावा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति श्रद्धा के चलते उन्होंने यह प्रण लिया है कि वे योगी के प्रधानमंत्री बनने तक नंगे पांव रहेंगे। बाबा बताते हैं कि पहले वे करीब 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पलें पहनते थे, लेकिन इस व्रत के बाद उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह छोड़ दिए।

गूगल गोल्डन बाबा
गूगल गोल्डन बाबा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 10:25 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में इस बार एक संत अपने आध्यात्मिक से ज्यादा स्वर्णमयी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। गले में भारी-भरकम सोने का शंख, हाथों में करोड़ों के कंगन, उंगलियों में देवी-देवताओं वाली सोने की अंगूठियां, सिर पर विशाल चांदी का मुकुट और साथ में शुद्ध सोने के ‘लड्डू गोपाल’—भीड़ इन्हें देखते ही ठिठक जाती है। लोग इन्हें अब गूगल गोल्डन बाबा के नाम से जानते हैं।

माघ मेले में बने आकर्षण का केंद्र स्वामी मनोजानंद महाराज

बाबा का दावा है कि वे करीब 5 करोड़ रुपये की कीमत के सोने-चांदी के आभूषण धारण करते हैं। चांदी के मुकुट के साथ गले में सोने-चांदी से जड़ा शंख और हाथ में हमेशा सोने की ‘लड्डू गोपाल प्रतिमा उनके व्यक्तित्व की पहचान बन चुकी है। माघ मेले के सेक्टर-2 में उनका शिविर बताया जा रहा है, जहां वे नियमित अनुष्ठान और दान-पुण्य करते हैं।

सीएम योगी के लिए ली बड़ी प्रतिज्ञा 

गोल्डन बाबा की चर्चा सिर्फ उनके आभूषणों तक सीमित नहीं है,उनका संकल्प भी उतना ही सुर्खियों में है। बाबा का दावा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति श्रद्धा के चलते उन्होंने यह प्रण लिया है कि वे योगी के प्रधानमंत्री बनने तक नंगे पांव रहेंगे। बाबा बताते हैं कि पहले वे करीब 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पलें पहनते थे, लेकिन इस व्रत के बाद उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह छोड़ दिए। इतना ही नहीं, उनके चांदी के मुकुट पर भी सीएम योगी की तस्वीर होने की बात कही जा रही है, जो उनकी आस्था को और “दिखाई देने वाली” पहचान दे रही है।

गूगल गोल्डन बाबा नाम कैसे पड़ा?

अपने नाम को लेकर बाबा का तर्क भी उतना ही दिलचस्प है। वे कहते हैं, “गूगल पर खोजेंगे तो मैं सामने आ जाऊंगा, इसलिए लोग मुझे गूगल गोल्डन बाबा कहते हैं। बाबा के अनुसार, वे करीब 20 वर्षों से इसी तरह की स्वर्णमयी वेशभूषा में रहते आ रहे हैं और पिछले 8 वर्षों से लगातार माघ मेले में आ रहे हैं। मेले में जब भी वे बाहर निकलते हैं, उनके आसपास लोगों की भीड़ जमा हो जाती है कोई तस्वीर लेना चाहता है तो कोई उनके बारे में जानना।

सोना पहनना हमारे यहां सम्मान की निशानी - गोल्डन बाबा

साधु-संतों की दुनिया में जहां सादगी को सबसे बड़ा आभूषण माना जाता है, वहीं गोल्डन बाबा का तर्क बिल्कुल उलटा है। वे कहते हैं कि वे क्षत्रिय वंश से आते हैं और उनके परिवार में सोना धारण करना सदियों से सम्मान और सामर्थ्य का प्रतीक रहा है। बाबा का दावा है कि उनके आभूषण किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी परंपरा की पहचान हैं। इतना ही नहीं, वे खाने-पीने में भी यही राजसी अनुशासन निभाते हैं और चांदी के बर्तनों में ही भोजन-पानी लेने की बात करते हैं।

मेरे साथ लड्डू गोपाल हैं- गोल्डन बाबा

करोड़ों के आभूषण पहनकर मेले-भीड़ में निकलना स्वाभाविक तौर पर सुरक्षा के सवाल खड़े करता है, लेकिन गोल्डन बाबा इस चिंता को बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बिना गार्ड के इतने कीमती गहने कैसे संभालते हैं, तो उन्होंने शांत स्वर में कहा - उन्हें किसी सुरक्षा घेराबंदी की जरूरत नहीं हैं। बाबा के मुताबिक, उनके हाथ में मौजूद ‘लड्डू गोपाल’ ही उनके सबसे बड़े रक्षक हैं। UP News

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उत्तर प्रदेश वोटर लिस्ट अलर्ट : BJP ने शुरू की 10 दिन की विशेष मुहिम

पार्टी का फोकस उन मतदाताओं पर रहेगा, जिनके नाम ASD (अनुपस्थित, मृतक या स्थायी रूप से स्थानांतरित) श्रेणी में दर्ज हो गए हैं ताकि कागजो में गायब हुए असली वोटर फिर से सूची में लौटें और उत्तर प्रदेश की चुनावी बुनियाद पर किसी तरह की गलत कटौती की परछाईं न रह जाए।

BJP ने शुरू किया 10 दिन का वोटर-रिकवरी अभियान
BJP ने शुरू किया 10 दिन का वोटर-रिकवरी अभियान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 09:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 2.89 करोड़ नामों के कटने की चर्चा ने लखनऊ से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इसी हलचल के बीच भाजपा ने प्रदेशभर में 10 दिन का वोटर-रिकवरी अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पार्टी का फोकस उन मतदाताओं पर रहेगा, जिनके नाम ASD (अनुपस्थित, मृतक या स्थायी रूप से स्थानांतरित) श्रेणी में दर्ज हो गए हैं ताकि कागजो में गायब हुए असली वोटर फिर से सूची में लौटें और उत्तर प्रदेश की चुनावी बुनियाद पर किसी तरह की गलत कटौती की परछाईं न रह जाए।

ASD सूची की घर-घर पड़ताल

भाजपा के मुताबिक इस अभियान में उत्तर प्रदेश के हर बूथ पर ASD सूची की ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ होगी। कार्यकर्ता यह परखेंगे कि कहीं जीवित मतदाता कागज़ों में मृतक तो नहीं कर दिए गए, या वर्षों से उसी पते पर रहने वाले लोगों को अनुपस्थित/स्थायी रूप से शिफ्टेड तो नहीं दर्ज कर दिया गया। जहां भी ऐसी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां संबंधित मतदाता को तुरंत संपर्क कर नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।

हर बूथ पर पांच वोटर का लक्ष्य

पार्टी ने संगठन को मिशन मोड में उतारते हुए बूथ कमेटी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिदिन कम से कम 5 नए वोटर जोड़ने का लक्ष्य दिया है। पार्टी का मुख्य फोकस फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने पर रहेगा, ताकि सूची से बाहर हुए योग्य मतदाताओं को जल्द से जल्द वापस जोड़ा जा सके। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP की बेचैनी सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्रों और उन सीटों को लेकर है जहां चुनाव कम अंतर से तय होते हैं। रणनीति यही है कि संगठन बाकी काम छोड़कर फिलहाल SIR से जुड़े इस अभियान को प्राथमिकता दे, ताकि चुनावी आधार पर किसी तरह का नुकसान न हो।

वर्चुअल बैठक में SIR पर फोकस

शुक्रवार शाम हुई पार्टी की वर्चुअल बैठक पूरी तरह SIR को लेकर केंद्रित रही। बैठक में प्रदेश नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को 10-दिवसीय अभियान में पूरी ताकत से जुटने का निर्देश दिया। साथ ही 16, 17 और 18 जनवरी को चलाए गए/चलने वाले विशेष अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने-कटाने-संशोधन के लिए 4 दिन का विशेष अभियान

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े काम को तेज और आसान बनाने के लिए चार दिन का विशेष अभियान तय किया गया है। इसमें 18 जनवरी, 31 जनवरी और 1 फरवरी को बूथों पर विशेष व्यवस्था रहेगी, जबकि एक अतिरिक्त तिथि संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) स्थानीय जरूरत के हिसाब से तय करेंगे। इन दिनों हर बूथ पर ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि लोग सूची देखकर तुरंत जरूरी फॉर्म भर सकें। प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मतदाता को कागज़ी उलझनों में न फंसना पड़े।

SIR पर उठे सवाल

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चौंकाने वाली विसंगतियों की शिकायतें भी सामने आई हैं। गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट पर बूथ संख्या 126 में उन मतदाताओं के नाम कटने की चर्चा है, जो 1986 से उसी पते पर रह रहे बताए जा रहे हैं। वहीं गोरखपुर के वार्ड-16 में एक ही मकान पर 233 वोटरों के दर्ज होने का दावा सामने आकर सवालों के घेरे में है। 

ड्राफ्ट के बाद लाखों ने कराया नाम दर्ज

6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट आने के बाद अब तक करीब 4 लाख लोगों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी सक्रिय दिखे और उन्होंने 9059 फॉर्म भरवाए। दिलचस्प यह है कि ड्राफ्ट जारी होने से पहले ही 16.18 लाख फॉर्म-6 जमा हो चुके थे। UP News

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