उत्तर प्रदेश सरकार ने किया जेल की तरफ रूख, कारण खास है
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 10:23 AM
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 10:23 AM
उत्तर प्रदेश सरकार ने जेल की तरफ भी अपना रूख मोड़ा है। आमतौर पर प्रदेश सरकार प्रदेश की जेल की व्यवस्था पर ध्यान नहीं देती है। सोमवार 01 सितंबर 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की जेलों क तरफ बड़ा फोकस किया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जेल की तरफ रूख करने का कारण बहुत ही खास कारण है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उत्तर प्रदेश सरकार का रूख जेल की तरफ मोड़ा है। UP News
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने की जेल व्यवस्था की बड़ी समीक्षा
सोमवार 01 सितंबर 2025 का दिन उत्तर प्रदेश की अलग-अलग जेल में बंद कैदियों के लिए खास दिन बन गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जेल व्यवस्था पर फोकस करते हुए जेल प्रशासन के काम काज की समीक्षा की। जेल की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अलग-अलग जेल में बंद कैदियों के कल्याण के लिए बड़ी घोषणा भी की है। हम आपको विस्तार से बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के कल्याण के लिए क्या नई घोषणा की हैं। UP News
उत्तर प्रदेश की अलग-अलग जेल में बंद बीमार कैदी होंगे रिहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर जेल प्रशासन के कामकाज की पूरी समीक्षा की। समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जेल में बंद बीमार कैदियों को रिहा करने के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सोमवार को कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रदेश की नीति को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्र बंदियों की रिहाई स्वत: विचाराधीन होनी चाहिए और इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े। UP News
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्राणघातक रोग से पीडि़त होने की आशंका वाले सिद्धदोष बंदी, जिसे मुक्त करने पर उसके स्वस्थ होने की उपयुक्त संभावना है तथा वृद्धावस्था, अशक्तता या बीमारी के कारण भविष्य में ऐसा अपराध करने में स्थायी रूप से असमर्थ बंदी, जिसके लिये वह दोषी ठहराया गया हो के साथ-साथ घातक बीमारी या किसी प्रकार की अशक्तता से पीडि़त सिद्धदोष बंदी
जिसकी मृत्यु निकट भविष्य में होने की संभावना हो, के संबंध में प्रदेश के सभी कारागारों में सर्वेक्षण कर वास्तविक संख्या का आकलन किया जाए। इनमें महिलाओं, बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रिहा करने की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने कैदियों को कृषि, गोसेवा आदि कार्यों से जोडक़र उनकी जेल अवधि के सदुपयोग करने के लिए व्यवस्था बनाने की भी आवश्यकता बताई। UP News
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि जेल मैनुअल में यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना आवश्यक है कि किन बीमारियों को असाध्य रोग की श्रेणी में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए समयपूर्व रिहाई उन्हीं मामलों में की जानी चाहिए, जहाँ से सामाजिक जोखिम न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह, महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराध जैसे मामलों में रिहाई कतई नहीं की जानी चाहिए। नियमों में बदलाव पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वर्ष तीन बार जनवरी, मई और सितम्बर में पात्र बंदियों के मामलों की स्वत: समीक्षा की व्यवस्था हो। UP News
यदि किसी बंदी को रिहाई न दी जाए तो उसके कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं और उसे यह अधिकार मिले कि वह उस निर्णय को चुनौती दे सके। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा सुझाई गई प्रणाली को उत्तर प्रदेश में अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बंदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, त्वरित और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होनी चाहिए तथा जल्द ही नई नीति का प्रारूप तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाए। UP News