बड़ी खबर : दुबई में पकड़ा गया उत्तर प्रदेश का बड़ा ठग

उत्तर प्रदेश के बड़े ठग की दुबई में गिरफ्तारी की जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के इस बड़े ठग ने हजारों लोगों के साथ ठगी की है। ठग की गिरफ्तारी की खबर से उत्तर प्रदेश के लोगों ने राहत की सांस ली है।

राशिद नसीम पर एजेंसियों का शिकंजा
राशिद नसीम पर एजेंसियों का शिकंजा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar27 Feb 2026 05:26 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी करने वाला बड़ा ठग दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी करने वाले ठग को जल्दी ही उत्तर प्रदेश की राजधानी में लाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के बड़े ठग की दुबई में गिरफ्तारी की जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के इस बड़े ठग ने हजारों लोगों के साथ ठगी की है। ठग की गिरफ्तारी की खबर से उत्तर प्रदेश के लोगों ने राहत की सांस ली है।

उत्तर प्रदेश में शाइन सिटी ग्रुप का प्रमोटर बनकर राशिद नशीम ने की थी ठगी

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बड़े ठग का नाम राशिद नशीम है। राशिद नशीम ने उत्तर प्रदेश में शाइन सिटी नामक ग्रुप के नाम पर सैकड़ों करोड़ रूपए की ठगी की थी। 100 करोड़ रूपए से अधिक की ठगी करने के बाद यह ठग राशिद नसीम दुबई में जाकर छुप गया था।  लखनऊ की विशेष PMLA अदालत ने अप्रैल 2025 में राशिद को भगोड़ा घोषित किया था। राशिद की उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और लखनऊ समेत तमाम जिलों में अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। राशिद नसीम पर 50,000 का ईनाम घोषित किया गया था। अब राशिद को जल्द दुबई से भारत लाया जाएगा। राशिद नसीम के खिलाफ उत्तर प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निवेश में धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया था। भगोड़े आर्थिक अपराधी राशिद नसीम को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। लखनऊ की विशेष धन शोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) अदालत ने पिछले वर्ष अप्रैल में रियल एस्टेट फर्म शाइन सिटी समूह के प्रवर्तक नसीम को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत अपराधी घोषित किया था। यह जांच धनशोधन रोकथाम के एक मामले से संबंधित है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने दर्ज कर रखी है 554 FIR 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने राशिद नसीम के विरूद्ध एक या दो नहीं पूरी 554 FIR दर्ज कर रखी हैं।  नसीम और लखनऊ की शाइन सिटी समूह की कंपनियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस के दर्ज 554 मामलों का संज्ञान लेने के बाद ED ने इस मामले में जांच शुरू की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी वाली रियल एस्टेट योजनाओं और ‘मल्टी-लेवल मार्केटिंग” के माध्यम से उच्च मुनाफे के वादे के साथ 800-1000 करोड़ रुपये की धनराशि एकत्र की गई। अधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने उसके खिलाफ यूएई के अधिकारियों को एक डोजियर सौंपा था। अधिकारियों ने कहा कि इस फाइल में भारत में उसके खिलाफ चलाई गई PMLA और एफईओए की कार्यवाही का विवरण था। इससे पहले जारी एक बयान में एजेंसी ने कहा था कि नसीम ने ‘जानबूझकर’जांच से बचने की कोशिश की और समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ, तथा अंतत: वह नेपाल के रास्ते भारत से भाग गया और दुबई में रह रहा है। दिसंबर 2025 में लखनऊ की अदालत ने नसीम के खिलाफ एफईओए की कार्यवाही के तहत उसकी 127.98 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क करने का भी आदेश दिया था। UP News

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चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नहीं जाएंगे जेल

उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जेल नहीं जाना पड़ेगा। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जांच पूरी होने तक वे जेल जाने से बच गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar27 Feb 2026 05:36 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिल गई है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत (बेल ) की याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जेल नहीं जाना पड़ेगा। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जांच पूरी होने तक वे जेल जाने से बच गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैंअब इस मामले में उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट अपना फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाएगा। 

मार्च के तीसरे हफ्ते तक जेल जाने से बच गए शंकराचार्य

उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के द्वारा फैसला सुरक्षित रखने से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा है कि इस मामले का फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाया जाएगा। फैसला आने तक उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जांच में सहयोग करना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इस आदेश का सीधा सा अर्थ है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने सुनी दोनों पक्षों की बात

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला देने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील को ध्यान से सुना। अपनी दलील में सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के वकील ने कहा पीडि़त का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। UP News



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उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी पर लगा बड़ा दाग, हिरासत में हत्या

जिस आरोपी की उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में मौत हो गई है उस आरोपी के परिवार वालों ने पुलिस के ऊपर बड़ा आरोप लगाया है। आरोपी के परिवार वालों का आरोप है कि यह कोई साधारण मौत नहीं है बल्कि हत्या है। उनका कहना है कि पुलिस ने यह हत्या की है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर उठा सवाल
उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर उठा सवाल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar27 Feb 2026 02:58 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी पर एक बड़ा दाग लग गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में मौजूद एक आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पुलिस की वर्दी पर बड़ा दाग लग गया है। जिस आरोपी की उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में मौत हो गई है उस आरोपी के परिवार वालों ने पुलिस के ऊपर बड़ा आरोप लगाया है। आरोपी के परिवार वालों का आरोप है कि यह कोई साधारण मौत नहीं है बल्कि हत्या है। उनका कहना है कि पुलिस ने यह हत्या की है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का है मामला

उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी को दागदार करने वाला यह मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का है। बहराइच जिले के रामगाँव थाने में बंद एक आरोपी की मौत हो गई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार एक आरोपी के ऊपर 10 साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा था। छेड़छाड़ के आरोप में उसे गिरफ्तार करके रामगाँव थाने में बंद किया गया था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। एडिशनल एसपी के अनुसार, हालत बिगड़ने पर आरोपी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि मृतक के परिजनों ने इस दावे को नकारते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि आरोपी की मौत पुलिस द्वारा की गई मारपीट के कारण हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने में उसके साथ बुरी तरह पिटाई की गई, जिससे उसकी जान चली गई। इस आरोप के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। 

थानाध्यक्ष समेत अनेक पुलिस वालों के विरूद्ध FIR दर्ज

परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने ही अपने विभाग के खिलाफ कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष, एक कॉन्स्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ  FIR दर्ज कर ली गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मौत की असली वजह क्या थी।

पुलिस हिरासत में मौत बड़ा अपराध है

आपको बता दें कि पुलिस हिरासत में मौत को बहुत बड़ा अपराध माना जाता है। उत्तर प्रदेश में लम्बे अर्से के बाद पुलिस हिरासत में मौत की घटना सामने आई है। पुलिस हिरासत में मौत के मामले में उत्तर प्रदेश में अनेक बार पूरे थाने के पुलिसकर्मी निलंबित तथा दंडित किए जा चुके हैं। पुलिस हिरासत में मौत को अदालत भी गंभीर अपराध यानी हीनियस क्राइम मानती है। UP News

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