अप्रैल से आंगनबाड़ी केंद्रों में होने जा रहा दो अहम बदलाव

अप्रैल से आंगनबाड़ी केंद्रों में दो अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर बच्चों और महिलाओं के पोषण पर पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ भोजन के मेन्यू में बदलाव किया गया है, बल्कि केंद्रों के संचालन समय को भी मौसम के अनुसार संशोधित किया गया है।

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आंगनबाड़ी केंद्रों में दो अहम बदलाव लागू होने जा रहे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Mar 2026 06:29 PM
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UP News : अप्रैल से आंगनबाड़ी केंद्रों में दो अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर बच्चों और महिलाओं के पोषण पर पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ भोजन के मेन्यू में बदलाव किया गया है, बल्कि केंद्रों के संचालन समय को भी मौसम के अनुसार संशोधित किया गया है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाला आहार पहले से अधिक स्वादिष्ट और पोषणयुक्त

अधिकारियों के अनुसार, अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाला आहार पहले से अधिक स्वादिष्ट और पोषणयुक्त होगा। बच्चों के लिए मेन्यू में मीठा हलवा, आटा-बेसन से बने व्यंजन, दलिया और सोया युक्त खिचड़ी शामिल की गई है। वहीं कुपोषित बच्चों को विशेष रूप से मीठा हलवा दिया जाएगा, ताकि उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो सके। गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी पौष्टिक आहार जैसे दलिया, सोया बर्फी और दाल आधारित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

केंद्रों के समय में भी बदलाव किया गया

गर्मी को ध्यान में रखते हुए केंद्रों के समय में भी बदलाव किया गया है। अब तक जहां केंद्र सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलते थे, वहीं अप्रैल से यह समय बदलकर सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया जाएगा। इससे छोटे बच्चों को तेज धूप और गर्मी से राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था का लाभ जिले के लाखों पंजीकृत लाभार्थियों को मिलेगा। बड़ी संख्या में बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं इस योजना से जुड़ी हैं, जिन्हें नियमित रूप से पोषण आहार प्रदान किया जाता है।

वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा

इसके अलावा वितरण प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। अब आहार की सप्लाई सीधे वेंडर के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचेगी। साथ ही, पोषण ट्रैकिंग के लिए डिजिटल और बायोमीट्रिक प्रणाली का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों की पहचान और वितरण प्रक्रिया को और सटीक बनाया जा सके। कुल मिलाकर, यह बदलाव आंगनबाड़ी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफरा-तफरी, लखनऊ में आधा दर्जन पंप बंद, उमड़ी भीड़

प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक घबराहट का माहौल बन गया है। गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, गोंडा, देवरिया और श्रावस्ती समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

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पेट्रोल-डीजल अफरा-तफरी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Mar 2026 05:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक घबराहट का माहौल बन गया है। गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, गोंडा, देवरिया और श्रावस्ती समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हालांकि प्रशासन बार-बार यह स्पष्ट कर रहा है कि ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है, फिर भी लोग एहतियात के तौर पर अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आधा दर्जन पेट्रौल पंप बद हो गए हैं।

गोरखपुर में हालात बिगड़े, डीएम को खुद मैदान में उतरना पड़ा

गोरखपुर में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण नजर आई, जहां अफवाह फैलते ही पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जुट गई। जैसे ही यह खबर फैली कि ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, लोग तुरंत पंपों की ओर दौड़ पड़े। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने सड़क पर उतरकर हालात का जायजा लिया और यह भरोसा दिलाया कि जिले में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है।

प्रयागराज, लखनऊ और देवरिया में भी दिखा पैनिक का असर

प्रयागराज और लखनऊ में भी देर रात से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने लगी। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए लंबी लाइनों में खड़े नजर आए। देवरिया में भी सुबह होते ही पेट्रोल खत्म होने की चर्चा फैल गई, जिसके बाद पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने तत्काल सफाई दी कि यह सिर्फ अफवाह है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

गोंडा में पुलिस को करनी पड़ी सख्ती

गोंडा में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ पेट्रोल पंप बंद मिलने के बाद लोगों में भ्रम फैल गया और बाकी पंपों पर भारी भीड़ जुट गई। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया और लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की गई। प्रशासन ने साफ कहा कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है।

श्रावस्ती में ड्रम-जरीकेन पर रोक, काला बाजारी पर सख्ती

श्रावस्ती में भी अफवाहों के चलते लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदने लगे। कई लोग ड्रम, जरीकेन और बोतलों में ईंधन भरवाने पहुंचे, जिससे हालात और बिगड़ गए। इस पर प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए ऐसे बर्तनों में पेट्रोल भरने पर रोक लगा दी। साथ ही पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए गए कि नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।

अफवाहों से बढ़ी समस्या, प्रशासन लगातार कर रहा अपील

प्रशासन का कहना है कि ईंधन की सप्लाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं है और सभी जिलों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बावजूद इसके, अफवाहों के कारण लोगों में घबराहट फैल रही है, जिससे अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर पर विश्वास न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल भरवाएं।

स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सतर्कता जरूरी

हालांकि प्रशासन की सक्रियता से कई जगह हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी कई जिलों में भीड़ देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अफवाहों पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो ऐसी स्थिति दोबारा भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग संयम बरतें और प्रशासन के निदेर्शों का पालन करें।


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योगी सरकार 8.65 लाख करोड़ के बजट को खर्च ही नहीं कर सकी, 6 दिन में बकाया 40% खर्च चुनौती

प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन अब तक विभागों ने सिर्फ करीब 60% राशि ही खर्च किया है। इसका मतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विभागों को अपने कुल बजट का 40% शेष बचे दिनों में खर्च करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन दिख रहा है।

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योगी आदित्यनाथ
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userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar26 Mar 2026 03:09 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन अब तक विभागों ने सिर्फ करीब 60% राशि ही खर्च किया है। इसका मतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विभागों को अपने कुल बजट का 40% शेष बचे दिनों में खर्च करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन दिख रहा है।

बजट इस्तेमाल में सुस्ती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई नाराजगी

सूत्रों के मुताबिक कई विभागों ने अपनी आवंटित राशि का आधा से भी कम ही खर्च किया है। इसी को लेकर हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट खर्च में विलंब और सुस्ती पर गंभीर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आवंटित धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

छह दिन में पूरी करनी होगी बकाया राशि, अवकाश बाधा 

वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में अब सिर्फ छह दिन शेष हैं। लेकिन इन छह दिनों में भी वास्तविक कार्य दिवस कम हैं। गुरुवार और शुक्रवार को रामनवमी का अवकाश है, शनिवार को जिलों के कार्यालय खुलेंगे लेकिन शासन स्तर और बैंक बंद रहेंगे। 31 मार्च को महावीर जयंती का अवकाश है। इस वजह से विभागों पर बजट खर्च का दबाव बढ़ गया है, ताकि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले योजनाओं और परियोजनाओं के लिए धन का उपयोग हो सके।

कौन से विभाग सबसे पीछे हैं

कुछ विभागों में बजट खर्च की स्थिति इतनी खराब है कि 50% से कम राशि ही खर्च हुई है। इनमें प्रमुख हैं:

* सिंचाई विभाग (निर्माण कार्य)

* संस्कृति विभाग

* संस्थागत वित्त विभाग (स्टांप और पंजीकरण)

* सामान्य प्रशासन विभाग

* समाज कल्याण विभाग (जनजाति कल्याण)

* लोक निर्माण विभाग (राज्य संपत्ति निदेशालय)

* राष्ट्रीय एकीकरण विभाग

* राजस्व विभाग (आपदा राहत)

* परिवहन और न्याय विभाग

* नगर विकास विभाग

* आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा

* कारागार, मत्स्य, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं जल संसाधन

* भारी एवं मध्यम उद्योग

इन मदों में खर्च न होने से परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा और जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।

जिलों और अधिकारियों को निर्देश, जवाबदेही तय

बीते दिनों शासन ने जिलों और विभागों को ज्यादा से ज्यादा बजट खर्च करने के लिए निर्देश दिए हैं। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को मौखिक रूप से कहा गया कि ठेकेदारों को एडवांस भुगतान करें। हालांकि, कई अभियंताओं ने इसका विरोध किया और मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बजट के समय पर उपयोग और देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अधिकारियों की जिम्मेदारी और योजनाओं का असर

सीएम ने यह भी कहा कि बजट में देरी से खर्च होने की वजह से परियोजनाओं का समय पर पूरा होना बाधित होता है और लोग सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आवंटित राशि का उपयोग समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करें।


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