उत्तर प्रदेश पुलिस में बड़ा फेरबदल, 24 IPS अफसरों की पोस्टिंग बदली

इस फेरबदल में जहां कुछ अधिकारियों को पदोन्नति के साथ नई भूमिका मिली है, वहीं उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में एसपी/एसएसपी स्तर पर बदलाव कर फील्ड कमान को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।

उत्तर प्रदेश में IPS स्तर पर बड़ी अदला-बदली
उत्तर प्रदेश में IPS स्तर पर बड़ी अदला-बदली
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Feb 2026 09:48 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन की तस्वीर एक बार फिर बदली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले करते हुए कई अहम पदों पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। इस फेरबदल में जहां कुछ अधिकारियों को पदोन्नति के साथ नई भूमिका मिली है, वहीं उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में एसपी/एसएसपी स्तर पर बदलाव कर फील्ड कमान को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है। माना जा रहा है कि लखनऊ से लेकर एनसीआर बेल्ट (गौतमबुद्ध नगर-गाजियाबाद) और पूर्वांचल (वाराणसी-अयोध्या-गोरखपुर) तक, कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है

लखनऊ जोन में बड़ा बदलाव

तबादला सूची का सबसे अहम बिंदु राजधानी लखनऊ जोन से जुड़ा है। अब तक लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) रहे सुजीत पांडे को पुलिस महानिदेशक (डीजी), अग्निशमन एवं आपात सेवाएं, मुख्यालय लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं अयोध्या परिक्षेत्र में तैनात प्रवीण कुमार को लखनऊ जोन का नया एडीजी नियुक्त किया गया है। यूपी की प्रशासनिक धड़कन माने जाने वाले लखनऊ जोन में यह बदलाव खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यालय व रेंज स्तर पर भी फेरबदल

इस प्रशासनिक फेरबदल में सरकार ने मुख्यालय और फील्ड दोनों मोर्चों पर अनुभवी अधिकारियों को नई भूमिकाएं देकर सिस्टम को और चुस्त करने का संकेत दिया है। ईओडब्ल्यू में तैनात रहे के.एस. इमैन्युअल को अब डीजीपी का जीएसओ बनाया गया है, जिससे शीर्ष स्तर पर रणनीतिक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं मिर्जापुर के एसपी सोमेन बर्मा को डीआईजी, अयोध्या रेंज की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा कानपुर कमिश्नरेट में संयुक्त पुलिस आयुक्त रहे विनोद कुमार को डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी, मुरादाबाद में पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है।

संभल की अनुकृति शर्मा को प्रमोशन

उत्तर प्रदेश की तबादला सूची में 2020 बैच की आईपीएस अनुकृति शर्मा का नाम खासतौर पर चर्चा में है। सरकार ने उन्हें संभल की अपर पुलिस अधीक्षक के पद से पदोन्नत करते हुए गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट में अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि संभल में सामने आए बड़े इंश्योरेंस घोटाले की परतें खोलने में उनकी सक्रिय भूमिका के बाद यह प्रमोशन उनके कामकाज पर भरोसे की मुहर है। 

कमिश्नरेट में भी बदलाव

  1. आलोक प्रियदर्शी को गाजियाबाद कमिश्नरेट से हटाकर वाराणसी कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त बनाया गया है।
  2. राज करन नैय्यर को गोरखपुर से गाजियाबाद कमिश्नरेट का अपर पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
  3. संकल्प शर्मा और विपिन टाडा को क्रमशः मिर्जापुर व मेरठ से स्थानांतरित कर कानपुर कमिश्नरेट में संयुक्त पुलिस आयुक्त बनाया गया है।

ATS और तकनीकी सेवाओं में नई तैनाती

  1. अभिषेक यादव को पीलीभीत से डीआईजी (ATS), लखनऊ भेजा गया है।
  2. आशीष तिवारी को सहारनपुर से डीआईजी, तकनीकी सेवाएं, लखनऊ नियुक्त किया गया है।
  3. प्रताप गोपेंद्र यादव को पीटीसी मुरादाबाद से डीआईजी, यूपी पुलिस मुख्यालय में तैनात किया गया है।

11 जिलों में नए एसपी/एसएसपी की तैनाती

यूपी के कई जिलों में पुलिस नेतृत्व बदला गया है—

  1. डॉ. कौस्तुभ: जौनपुर से गोरखपुर के एसएसपी
  2. अविनाश पांडे: मेरठ के एसएसपी
  3. अभिनंदन: बस्ती से सहारनपुर के एसएसपी
  4. चारू निगम: 47वीं पीएसी गाजियाबाद से सुल्तानपुर के एसपी
  5. डॉ. ख्याति गर्ग: 09वीं पीएसी मुरादाबाद से लखीमपुर खीरी के एसपी
  6. यशवीर सिंह: रायबरेली से बस्ती के एसपी
  7. कुंवर अनुपम सिंह: सुल्तानपुर से जौनपुर के एसपी
  8. अपर्णा रजत कौशिक: अमेठी से मिर्जापुर के एसपी
  9. रवि कुमार: 11वीं पीएसी सीतापुर से रायबरेली के एसपी
  10. सुकीर्ति माधव: आगरा से पीलीभीत के एसपी
  11. सर्वानन टी: वाराणसी कमिश्नरेट से अमेठी के एसपी UP News

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जानें, उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बेहद काम की सरकारी मोबाइल ऐप्स

राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए कई ऐसे आधिकारिक मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से लोग घर बैठे ही शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं और जरूरी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं यूपी सरकार की उन प्रमुख ऐप्स के बारे में, जो हर नागरिक के फोन में होनी चाहिए।

upapp
मोबाइल ऐप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Feb 2026 06:59 PM
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UP News : अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और अब तक सरकारी मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते, तो आप कई जरूरी सुविधाएं मिस कर रहे हैं। राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए कई ऐसे आधिकारिक मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं, जिनकी मदद से लोग घर बैठे ही शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं और जरूरी दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं यूपी सरकार की उन प्रमुख ऐप्स के बारे में, जो हर नागरिक के फोन में होनी चाहिए।

जनसुनवाई समाधान ऐप

यह ऐप प्रदेशवासियों की समस्याओं और शिकायतों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। बिजली, पानी, सड़क, राशन या किसी भी सरकारी सेवा से जुड़ी परेशानी को इस ऐप के जरिए दर्ज किया जा सकता है। खास बात यह है कि शिकायत के साथ फोटो या वीडियो भी अपलोड किया जा सकता है और तय समय सीमा में कार्रवाई की जाती है। यूजर अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकता है और समाधान मिलने के बाद फीडबैक भी दे सकता है।

UPCOP ऐप

उत्तर प्रदेश पुलिस की डिजिटल सेवाओं के लिए यह ऐप काफी उपयोगी है। इसके जरिए लोग बिना थाने जाए आॅनलाइन एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। मोबाइल, पर्स या वाहन चोरी, साइबर अपराध, गुमशुदा बच्चों की जानकारी और अन्य आपराधिक मामलों की शिकायत भी इसी ऐप से की जा सकती है।

उद्यम सारथी ऐप

राज्य के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से यह ऐप लॉन्च किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार नौकरी के अवसर तलाश सकते हैं। साथ ही स्वरोजगार से जुड़ी जानकारियां भी मिलती हैं।

युवा साथी ऐप

यह ऐप शिक्षा, नौकरी और कौशल विकास से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके जरिए युवा अलग-अलग योजनाओं के बारे में जान सकते हैं और उनके लिए आवेदन भी कर सकते हैं।

संदेस ऐप

संदेस एक सुरक्षित मैसेजिंग ऐप है, जिसे सरकारी विभागों में आधिकारिक संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह ऐप डेटा सुरक्षा के लिहाज से काफी भरोसेमंद माना जाता है।

निवेश मित्र ऐप

उत्तर प्रदेश में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए निवेश मित्र ऐप शुरू किया गया है। इसके जरिए कारोबारियों और निवेशकों को विभिन्न विभागों से जुड़ी मंजूरी और ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल जाती हैं।

ई-डिस्ट्रिक्ट यूपी ऐप

अब जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। इस ऐप के जरिए कई नागरिक सेवाओं के लिए आनलाइन आवेदन किया जा सकता है और प्रमाण पत्र डिजिटल रूप में प्राप्त किए जा सकते हैं।

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जिसका परिवार पद्मश्री से नवाजा गया, उसका डेढ़ साल से नहीं बन सका दिव्यांगता प्रमाणपत्र

वेदमती जन्म से ही दिव्यांग हैं और बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में आती हैं। इसके चलते वे कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता श्रीभास सुपकार ही नहीं, बल्कि उनके दादा जदुनाथ सुपकार भी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित रह चुके हैं, इसके बावजूद मामला लटका हुआ है।

certificate
दिव्यांगता प्रमाणपत्र
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Feb 2026 06:36 PM
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UP News : जिस परिवार को देश ने पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा हो, उसकी बेटी को भी अगर बुनियादी अधिकार के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बनारसी हथकरघा और वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्रीभास चंद्र सुपकार की 25 वर्षीय बेटी वेदमती सुपकार पिछले डेढ़ साल से दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।

पिता और दादा को मिल चुका है पद्मश्री पुरस्कार

वेदमती जन्म से ही दिव्यांग हैं और बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में आती हैं। इसके चलते वे कई सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता श्रीभास सुपकार ही नहीं, बल्कि उनके दादा जदुनाथ सुपकार भी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित रह चुके हैं, इसके बावजूद मामला लगातार लटका हुआ है।

न प्रमाणपत्र बना ना ही कोई जवाब दिया गया

श्रीभास सुपकार के अनुसार, उन्होंने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में अपनी बेटी का पंजीकरण पहले ही करा दिया था। वहां से उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को आवेदन देने की सलाह दी गई। इसके बाद 11 जून 2024 को सीएमओ को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि बेटी की गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल जांच के लिए डॉक्टरों की टीम घर भेजी जाए। बावजूद इसके, न तो कोई टीम पहुंची और न ही विभाग की ओर से कोई ठोस जवाब मिला। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार यही आश्वासन मिला कि मामला सीएमओ तक पहुंचा दिया गया है और जल्द फोन आएगा। डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी न कोई कॉल आया और न ही प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

व्यवस्था का भी पालन नहीं किया गया

दस्तावेजों के अनुसार, वेदमती सुपकार का जन्म 17 मई 2000 को हुआ था। वे सामान्य वर्ग से हैं और उन्हें कॉर्पस कैलोसम से जुड़ी चिकित्सकीय समस्या है। नियमों के तहत गंभीर दिव्यांगता के मामलों में मेडिकल टीम घर जाकर या वीडियो कॉल के माध्यम से सत्यापन कर सकती है, लेकिन इस प्रकरण में उस व्यवस्था का भी पालन नहीं किया गया। श्रीभास सुपकार का कहना है कि यह सिर्फ उनकी बेटी की समस्या नहीं है, बल्कि उस तंत्र की हकीकत है, जहां सम्मान तो दिया जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आम नागरिक की तरह न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस मामले पर एडिशनल सीएमओ डॉ. राजेश प्रसाद ने कहा कि प्रकरण की जानकारी ली जाएगी और यह देखा जाएगा कि फाइल क्यों रुकी हुई है। यदि सभी दस्तावेज सही पाए गए, तो जांच कराकर दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

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