वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मूर्तियों को तोड़ने के आरोप पर सीएम योगी ने दिया जवाब

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि यह जानकारी भ्रामक और झूठी है।

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मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गई मूर्तियां
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 04:12 PM
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UP News : वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को नुकसान पहुंचने की तस्वीरें सामने आने के बाद शहर में विवाद उत्पन्न हो गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर प्राचीन संरचनाओं और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा-जानकारी भ्रामक और झूठी 

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि यह जानकारी भ्रामक और झूठी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और टूटे हुए हिस्सों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करके भ्रम फैला रहे हैं। सीएम ने यह भी बताया कि कोई मंदिर या मूर्तियाँ नष्ट नहीं हुई हैं और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्हें पुन: स्थापित किया जाएगा।

शहर के लिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी

वाराणसी के मेयर, स्थानीय विधायक और काशी विद्वत परिषद ने भी लोगों से अपील की कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें। सीएम योगी ने कहा कि पिछले 11 से 11.5 वर्षों में काशी के आध्यात्मिक और भौतिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में शहर के लिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, और श्रद्धालुओं की संख्या में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। योगी ने आगे कहा कि काशी ने देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है और शहर को अब वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने विपक्ष पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का अपमान करने का आरोप भी लगाया।

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यूपी दिवस के मौके पर लखनऊ आ सकते हैं भाजपा के दिग्गज नेता, होगा बड़ा आयोजन

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यूपी दिवस उत्सव की अध्यक्षता कर सकते हैं और आयोजन स्थल नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण भी उनके संभावित कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है।

यूपी दिवस-2026 की तैयारी तेज
यूपी दिवस-2026 की तैयारी तेज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 04:00 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को लेकर लखनऊ में सियासी हलचल के साथ तैयारियों की रफ्तार भी तेज हो गई है। 24 जनवरी को प्रस्तावित राज्य स्तरीय समारोह को इस बार खास बनाने की तैयारी है, क्योंकि कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यूपी दिवस उत्सव की अध्यक्षता कर सकते हैं और आयोजन स्थल नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण भी उनके संभावित कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, दौरे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत शेड्यूल जारी नहीं हुआ है।

पहली बार राष्ट्र प्रेरणा स्थल बनेगा यूपी दिवस का मुख्य मंच

इस बार यूपी दिवस का मुख्य आयोजन पहली बार राष्ट्र प्रेरणा स्थल में प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थल का उद्घाटन किया था। अब उसी परिसर में 24 से 26 जनवरी तक उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के कार्यक्रमों को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोजन की थीम ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश’ रखी गई है, जिसके तहत प्रदेश की विकास यात्रा, लोक-परंपराओं और नवाचार की झलक एक मंच पर दिखाई जाएगी। सरकार की योजना के अनुसार, कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि राज्यव्यापी सहभागिता सुनिश्चित हो सके। राज्य स्तरीय समारोह के साथ-साथ प्रदेश के सभी जिलों में भी विविध आयोजन होंगे। जिलों में उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर आधारित प्रदर्शनियां, सरकारी योजनाओं के स्टॉल, ODOP (एक जनपद-एक उत्पाद) के उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री, GI टैग उत्पादों के ट्रेड शो, और प्रस्तावित ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ की झलक दिखाने वाले फूड-आधारित प्रदर्शन शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा मिशन शक्ति, नवाचार और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने जैसे विषयों पर भी विशेष प्रदर्शनियों की तैयारी की जा रही है।

आयोजन को भव्य बनाने की रणनीति तैयार

प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जिलों के डीएम ने संबंधित विभागों के साथ बैठकें कर कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि यूपी दिवस के आयोजन में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, समय से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और योजनाओं की प्रदर्शनी के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा जाए, ताकि उत्तर प्रदेश की संस्कृति, क्षमता और विकास-गति की तस्वीर देश-दुनिया के सामने मजबूती से रखी जा सके। UP News

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मजरूह सुल्तानपुरी: उर्दू का कारवाँ, जिसकी गूंज आज भी ज़िंदा है

उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 03:37 PM
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Majrooh Sultanpuri : मजरूह सुल्तानपुरी 20वीं सदी के उन चुनिंदा उर्दू शायरों में शुमार रहे, जिनकी शायरी ने साहित्य और समाज दोनों को नई संवेदना दी। 1 अक्टूबर 1919 को जन्मे और 24 मई 2000 को दुनिया से रुख़्सत हुए मजरूह न सिर्फ़ प्रगतिशील आंदोलन के मजबूत स्वर थे, बल्कि हिंदी सिनेमा में बतौर गीतकार भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

‘कारवाँ बनता गया’ वाली पंक्तियाँ बनीं चर्चा का केंद्र

मजरूह सुल्तानपुरी के साहित्यिक योगदान को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सहयोग से सुल्तानपुर के गनपत सहाय कॉलेज में “ग़ज़ल के आइने में मजरूह सुल्तानपुरी” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था । देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों से आए शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने इस आयोजन में भाग लिया और मजरूह के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मजरूह ने उर्दू शायरी को नई ऊँचाई दी और उसे जन-भावनाओं की भाषा बनाया। समिनार की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा रिज़वी ने की, जबकि आयोजन का संयोजन गनपत सहाय कॉलेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. जेबा महमूद ने किया था । इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. अली अहमद फातिमी ने कहा कि मजरूह का जन्म सुल्तानपुर में हुआ था और उनकी शायरी में इस मिट्टी की झलक साफ दिखाई देती है। उन्होंने मजरूह को तरक्कीपसंद शायरी की ऐसी आवाज़ बताया, जिसने उर्दू को नया मुकाम दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मंच से उनकी चर्चित पंक्तियाँ “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया”का उल्लेख भी हुआ, जिसे मजरूह की लोकप्रियता और वैचारिक असर का प्रतीक माना गया।

मजरूह सुल्तानपुरी की टॉप 5 शायरी 

1 - मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,       

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया। 

2 - कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा,

हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा। 

3 - बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए,

हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते। 

4 - अब सोचते हैं लाएँगे तुझ सा कहाँ से हम,

उठने को उठ तो आए तिरे आस्ताँ से हम।

5 - तिरे सिवा भी कहीं थी पनाह भूल गए,

निकल के हम तिरी महफ़िल से राह भूल गए। 


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