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उत्तर प्रदेश में श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। उत्तर प्रदेश में करीब एक दशक से ज्यादा समय बाद नया वेज बोर्ड गठित करने की तैयारी तेज हो गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। उत्तर प्रदेश में करीब एक दशक से ज्यादा समय बाद नया वेज बोर्ड गठित करने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार ने साफ किया है कि अगले महीने उत्तर प्रदेश में वेज बोर्ड के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इलाकों, खासकर नोएडा में मजदूरी को लेकर असंतोष तेज हुआ और उसके बाद राज्य सरकार ने अंतरिम मजदूरी बढ़ाने का भी ऐलान किया है। UP News
उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की मूल दरें लंबे समय से बड़े संशोधन का इंतजार कर रही थीं। अब नए वेज बोर्ड के गठन के बाद राज्य सरकार श्रमिकों के मूल वेतन का नए सिरे से आकलन कर सकती है। अब तक स्थिति यह रही कि मूल वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव न होने के कारण मजदूरी में महज महंगाई भत्ते के जरिए ही राहत मिलती रही। ऐसे में उत्तर प्रदेश के लाखों कामगारों को उम्मीद है कि नया वेज बोर्ड केवल कागजी औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि उनकी कमाई की बुनियादी संरचना में वास्तविक सुधार का रास्ता खोलेगा। सरकार की हालिया अंतरिम वृद्धि को भी इसी व्यापक बदलाव की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है। UP News
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में मजदूरी, काम के घंटों और जीवन-यापन की लागत को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया। प्रदर्शन उग्र होने के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर एक हाईपावर कमेटी बनाई गई, जिसे श्रमिकों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच संवाद स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरिम मजदूरी बढ़ाई और अब वेज बोर्ड के गठन का रास्ता भी तेज कर दिया है। इससे साफ है कि सरकार उत्तर प्रदेश में औद्योगिक शांति और श्रमिक संतुलन दोनों को साथ लेकर चलने का संदेश देना चाहती है। UP News
नया वेज बोर्ड बनता है तो उत्तर प्रदेश के मजदूरों के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि न्यूनतम मजदूरी की मूल दरें फिर से तय की जा सकेंगी। इसका असर सिर्फ आज की तनख्वाह पर नहीं, बल्कि भविष्य में महंगाई भत्ते की गणना, श्रेणीवार वेतन संरचना और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच वेतन असमानता पर भी पड़ेगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक जिलों जैसे गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में काम करने वाले श्रमिकों को इससे अधिक प्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है, क्योंकि यहां जीवन-यापन की लागत राज्य के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा है। सरकार पहले ही गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में अंतरिम मजदूरी में लगभग 21 प्रतिशत तक वृद्धि कर चुकी है। UP News
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