उत्तर प्रदेश मेगा ब्लैकआउट ड्रिल: 75 जिलों में एक साथ बजेगा सायरन

इसके तुरंत बाद बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करते हुए 10 मिनट का ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। इसी दौरान मैदान में तैनात टीमें सक्रिय होकर रेस्क्यू से लेकर रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करेंगी।

उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी मॉक ड्रिल
उत्तर प्रदेश में राज्यव्यापी मॉक ड्रिल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Jan 2026 11:47 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश आज (23 जनवरी) शाम आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए राज्यव्यापी मॉक ड्रिल करने जा रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक शाम 6:00 बजे प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ हवाई हमले जैसी चेतावनी का सायरन बजेगा और इसके बाद 10 मिनट के लिए ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। प्रशासन इसे सुरक्षा और राहत व्यवस्था की रियल-टाइम टेस्टिंग मानकर चल रहा है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में विभागों का रिस्पॉन्स एक-सा और तेज हो सके।

सीएम योगी सहित शीर्ष अधिकारी रहेंगे मौजूद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का मुख्य केंद्र बनाया गया है। पुलिस लाइन में होने वाले प्रमुख अभ्यास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी की जानकारी है। उनके साथ गृह, नगर विकास और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिवों के अलावा डीजीपी, डीजी फायर और राहत आयुक्त भी मौके पर रहेंगे। 

क्यों कराया जा रहा है यह मॉक ड्रिल?

प्रशासन के मुताबिक, इस अभ्यास का उद्देश्य हवाई हमला/आपदा जैसी स्थितियों में त्वरित कार्रवाई, संचार व्यवस्था, राहत-बचाव और विभागीय तालमेल को मजबूत करना है। इससे पहले भारत-पाक तनाव के दौरान भी मॉक ड्रिल हुई थी। अब दूसरी बार पुलिस, बिजली विभाग और जिला प्रशासन समेत संबंधित एजेंसियां मिलकर संयुक्त अभ्यास करने जा रही हैं।

कैसे चलेगा अभ्यास? (टाइमलाइन)

इस अभ्यास का मिनट-दर-मिनट रोडमैप पहले से तय है। शाम ठीक 6:00 बजे करीब दो मिनट तक चेतावनी वाला सायरन बजेगा, जिससे यह संकेत मिलेगा कि पूरा सिस्टम अलर्ट मोड में आ चुका है। इसके तुरंत बाद बिजली आपूर्ति को नियंत्रित करते हुए 10 मिनट का ब्लैकआउट लागू किया जाएगा। इसी दौरान मैदान में तैनात टीमें सक्रिय होकर रेस्क्यू से लेकर रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास करेंगी

कौन-कौन सी एजेंसियां रहेंगी एक्टिव?

यह मॉक ड्रिल नागरिक सुरक्षा विभाग (सिविल डिफेंस) के नेतृत्व में कराई जाएगी, जिसमें पूरे सिस्टम का इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन परखा जाएगा। अभ्यास के दौरान सिविल डिफेंस, पुलिस, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग/यूपीपीसीएल एक साथ मैदान में रहेंगे, ताकि संकट के वक्त कौन क्या करेगा में कोई भ्रम न बचे। इसी क्रम में प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद ने डीजीपी, यूपीपीसीएल के एमडी और राहत आयुक्त के साथ प्रदेशभर के जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। जोर इस बात पर है कि सायरन से लेकर ब्लैकआउट, सूचना प्रसारण से लेकर रेस्क्यू-रिस्पॉन्स तक हर कदम समयबद्ध, समन्वित और एक कमांड में संचालित हो, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी रहे।

2025 में भी हुआ था अभ्यास

प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 7 मई 2025 को भी सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए देश के कई जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल कराई गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में तैयारियों की जांच की गई थी। इस बार राज्य ने कवायद का दायरा बढ़ाकर सभी 75 जिलों तक कर दिया है। UP News

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उत्तर प्रदेश सचिवालय में पोस्टिंग का खेल! 30+ एसओ नोटिस के घेरे में

अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।

सचिवालय में तैनाती विवाद ने पकड़ा तूल
सचिवालय में तैनाती विवाद ने पकड़ा तूल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Jan 2026 11:17 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित यूपी सचिवालय में तैनाती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुभाग अधिकारी (एसओ) पद पर मनचाही/मलाईदार पोस्टिंग पाने के लिए कुछ अधिकारियों ने घूस का सहारा लिया। मामले को गंभीर मानते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग ने 30 से अधिक अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस जारी होने के बाद से सचिवालय के गलियारों में खलबली मची हुई है और कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि जांच आगे किस दिशा में जाएगी।

पिछले कुछ महीनों से जुगाड़-घूस की चर्चाएं

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश सचिवालय (लखनऊ) में यह चर्चा तेज थी कि तबादला नीति को किनारे रखकर कुछ अधिकारियों को लगातार महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभागों में बनाए रखा जा रहा है। सचिवालय की तय व्यवस्था के तहत विभागों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर तैनाती का प्रावधान रखा गया था, ताकि हर कर्मचारी को समान अवसर मिले और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में इस नियम को दरकिनार कर चुनिंदा अधिकारियों को बार-बार A श्रेणी वाले विभागों में ही पोस्टिंग दिलाई गई। अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।

एसओ से मांगा गया लिखित जवाब

जानकारी के मुताबिक अनुभाग अधिकारियों की पोस्टिंग में घूसखोरी को लेकर शिकायत शासन के उच्च स्तर तक पहुंची थी। उसी शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल और आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र सचिवालय प्रशासन विभाग को भेजा गया। इसके बाद विभाग ने संबंधित अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है, ताकि आरोपों पर उनका लिखित जवाब लिया जा सके। सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान के हवाले से बताया गया कि, कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

विजिलेंस जांच की मांग तेज

नोटिसों का सिलसिला शुरू होते ही यूपी सचिवालय में माहौल गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठनों और कुछ कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मामला सिर्फ नोटिस और लिखित जवाब तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की विजिलेंस या किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिले। सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के मुताबिक ऐसे आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि पोस्टिंग में लेन-देन की बात सही साबित होती है, तो इसका सीधा असर शासन के कामकाज की पारदर्शिता, निष्पक्षता और शुचिता पर पड़ेगा। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत जिन-जिन तैनातियों पर सवाल उठे हैं, उनकी भी व्यापक जांच होनी चाहिए UP News

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उत्तर प्रदेश में बोले राज्यमंत्री: अमेरिकी टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं

विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित रही है। भारत ने न तो कभी किसी देश पर आक्रमण किया और न ही आतंकवाद जैसी गतिविधियों का समर्थन किया है।

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विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Jan 2026 07:13 PM
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UP News : केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा है कि अमेरिका को यह गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए कि उसकी व्यापार नीतियों या टैरिफ फैसलों से भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक सशक्त और भरोसेमंद देश के रूप में स्थापित हो चुका है और किसी एक राष्ट्र पर निर्भर नहीं है। गोंडा में आयोजित विकसित भारत जी-राम-जी जन जागरण अभियान में शामिल होने पहुंचे मंत्री ने योजना के उद्देश्यों और अब तक की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया यह भली-भांति समझ चुकी है कि भारत की आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति मजबूत है। वैश्विक स्तर पर यदि किसी देश पर विश्वास किया जाता है, तो वह भारत है।

भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित

विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित रही है। भारत ने न तो कभी किसी देश पर आक्रमण किया और न ही आतंकवाद जैसी गतिविधियों का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी एक प्रभावशाली वैश्विक नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भरोसा करता है। रूस-भारत-चीन समूह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले वैश्विक व्यवस्था दो शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन अब दुनिया मल्टीपोलर व्यवस्था की ओर बढ़ चुकी है। इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार और अधिक प्रभावशाली हो रही है।

जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने गोंडा मेडिकल कॉलेज और महिला अस्पताल में सामने आई व्यवस्थागत खामियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं, जिनकी जानकारी चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को दे दी गई है। सीटी स्कैन सुविधा, स्वच्छता और अन्य अवसंरचनात्मक समस्याओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है और जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर पहुंचता है, उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर घटना हुई, वहां पहले से नियम था कि वहां केवल पैदल आवागमन की अनुमति है। ऐसे में रथ ले जाना नियमों के खिलाफ था। उन्होंने दोहराया कि कानून व्यवस्था सर्वोपरि है और कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता।

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