यह अभियान सीधे तौर पर आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद प्रदेश भर के जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई और निपटारे का आदेश दिया गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में वर्षों से लंबित राजस्व और प्रशासनिक मामलों को लेकर अब बड़ा एक्शन शुरू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों की तहसीलों और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में 5 साल से अधिक पुराने मुकदमों की विशेष जांच और निस्तारण अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। यह अभियान सीधे तौर पर आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद प्रदेश भर के जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई और निपटारे का आदेश दिया गया है।
प्रदेश की विभिन्न तहसीलों और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन, पट्टा, उत्तराधिकार और अन्य राजस्व संबंधी हजारों मुकदमे वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें से बड़ी संख्या 5 साल या उससे अधिक पुराने मामलों की है। मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में पाया कि कई मामलों में फाइलें लंबित हैं, जिससे आम लोगों को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसी को देखते हुए विशेष अभियान चलाकर इन मामलों की जांच और तेजी से निस्तारण करने का निर्णय लिया गया है।
यह अभियान पारदर्शिता और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है।
इस फैसले से सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो वर्षों से अपने जमीन या राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं।
शासन स्तर पर यह साफ कर दिया गया है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे में जिलों में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों की लंबित संख्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। 5 साल पुराने मामलों की विशेष जांच का फैसला प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू होता है। UP News