उत्तर प्रदेश में घर बनाना हुआ आसान, नहीं लगाने होंगे नगर निगम के चक्कर
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए अब नियमों की दोबारा समीक्षा कर बदलाव किए जाएंगे। सरकार ने बॉयलाज में संशोधन के लिए पांच सदस्यीय समिति बना दी है। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव तैयार होंगे और उन्हें मंत्रीमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

UP News : उत्तर प्रदेश के घर बनाने वालों के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश में अब मकान का नक्शा पास कराने या भू-उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव के लिए नोएडा-गाजियाबाद से लेकर लखनऊ-कानपुर तक नागरिकों को बार-बार नगर निगम और विकास प्राधिकरण के दफ्तरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। योगी सरकार भवन निर्माण से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने बॉयलाज और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन में बदलाव का फैसला लिया है, ताकि फैसले तय समय में हों, नियमों की उलझन कम हो और उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों को सीधी राहत मिल सके।
नक्शा-लैंड यूज की उलझन होगी खत्म
अब तक उत्तर प्रदेश के कई शहरों में नक्शा पास कराने और लैंड यूज बदलने की प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती रही है। अलग-अलग मामलों में स्थानीय विकास प्राधिकरण, नगर निगम और जोनिंग नियमों के अनुसार निर्णय होते थे। पिछले साल लागू बॉयलाज में भी कई खामियां सामने आईं, जिनसे आम लोगों को दस्तावेज़ों, शर्तों और अनुमतियों के नाम पर लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए अब नियमों की दोबारा समीक्षा कर बदलाव किए जाएंगे। सरकार ने बॉयलाज में संशोधन के लिए पांच सदस्यीय समिति बना दी है। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव तैयार होंगे और उन्हें मंत्रीमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही नए नियम लागू किए जाएंगे। समिति का नेतृत्व लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष करेंगे। विभाग के मुताबिक इससे प्रस्तावों पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी और अनावश्यक अड़चनें हटेंगी।
समिति में कौन-कौन शामिल
बॉयलाज संशोधन समिति में वरिष्ठ स्तर के अधिकारी शामिल किए गए हैं। अध्यक्ष के अलावा समिति में—
- ग्राम्य विकास से जुड़े अधिकारी
- लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद के मुख्य नगर नियोजक,
- मुख्य वास्तुविद,
- निदेशक, आवास विकास परिषद,
- निदेशक, आवास बोर्ड
- सदस्य के रूप में रहेंगे।
समिति क्या करेगी
समिति की भूमिका सिर्फ कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे यूपी के शहरी नियमों का प्रैक्टिकल ऑडिट माना जा रहा है। समिति मौजूदा बॉयलाज की हर शर्त को जमीन पर लागू होने की कसौटी पर परखेगी, आदर्श जोनिंग रेगुलेशन की बारीकी से जांच करेगी और उन अड़चनों को चिन्हित करेगी, जो आम नागरिक को नक्शा पास कराने के लिए बार-बार दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ने पर मजबूर करती हैं। इसके बाद जनता के हित में जरूरी बदलावों की सिफारिश सरकार को दी जाएगी ताकि लाभकारी नियम सीधे लागू हों और प्रक्रिया में पारदर्शिता आए।
नए नियम लागू हुए तो आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा
सरकार का कहना है कि नए बदलाव लागू होते ही आम नागरिक को सबसे बड़ा फायदा समय और राहत के रूप में मिलेगा। नक्शा पास कराने की प्रक्रिया तेज होगी, नियमों की उलझन कम होगी और फाइलें महीनों तक दफ्तरों में धूल नहीं खाएंगी। साथ ही अनावश्यक देरी, बार-बार बुलावा और दौड़-भाग वाली व्यवस्था पर भी लगाम लगेगी। प्रशासन का दावा है कि प्रक्रिया जितनी ज्यादा सरल और पारदर्शी होगी, उतनी ही भ्रष्टाचार की गुंजाइश घटेगी और लोगों का काम बिना सिफारिश और बिना अतिरिक्त खर्च के तय समय में हो सकेगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश के घर बनाने वालों के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश में अब मकान का नक्शा पास कराने या भू-उपयोग (लैंड यूज) में बदलाव के लिए नोएडा-गाजियाबाद से लेकर लखनऊ-कानपुर तक नागरिकों को बार-बार नगर निगम और विकास प्राधिकरण के दफ्तरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। योगी सरकार भवन निर्माण से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने बॉयलाज और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन में बदलाव का फैसला लिया है, ताकि फैसले तय समय में हों, नियमों की उलझन कम हो और उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों को सीधी राहत मिल सके।
नक्शा-लैंड यूज की उलझन होगी खत्म
अब तक उत्तर प्रदेश के कई शहरों में नक्शा पास कराने और लैंड यूज बदलने की प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती रही है। अलग-अलग मामलों में स्थानीय विकास प्राधिकरण, नगर निगम और जोनिंग नियमों के अनुसार निर्णय होते थे। पिछले साल लागू बॉयलाज में भी कई खामियां सामने आईं, जिनसे आम लोगों को दस्तावेज़ों, शर्तों और अनुमतियों के नाम पर लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए अब नियमों की दोबारा समीक्षा कर बदलाव किए जाएंगे। सरकार ने बॉयलाज में संशोधन के लिए पांच सदस्यीय समिति बना दी है। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव तैयार होंगे और उन्हें मंत्रीमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही नए नियम लागू किए जाएंगे। समिति का नेतृत्व लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष करेंगे। विभाग के मुताबिक इससे प्रस्तावों पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी और अनावश्यक अड़चनें हटेंगी।
समिति में कौन-कौन शामिल
बॉयलाज संशोधन समिति में वरिष्ठ स्तर के अधिकारी शामिल किए गए हैं। अध्यक्ष के अलावा समिति में—
- ग्राम्य विकास से जुड़े अधिकारी
- लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद के मुख्य नगर नियोजक,
- मुख्य वास्तुविद,
- निदेशक, आवास विकास परिषद,
- निदेशक, आवास बोर्ड
- सदस्य के रूप में रहेंगे।
समिति क्या करेगी
समिति की भूमिका सिर्फ कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे यूपी के शहरी नियमों का प्रैक्टिकल ऑडिट माना जा रहा है। समिति मौजूदा बॉयलाज की हर शर्त को जमीन पर लागू होने की कसौटी पर परखेगी, आदर्श जोनिंग रेगुलेशन की बारीकी से जांच करेगी और उन अड़चनों को चिन्हित करेगी, जो आम नागरिक को नक्शा पास कराने के लिए बार-बार दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ने पर मजबूर करती हैं। इसके बाद जनता के हित में जरूरी बदलावों की सिफारिश सरकार को दी जाएगी ताकि लाभकारी नियम सीधे लागू हों और प्रक्रिया में पारदर्शिता आए।
नए नियम लागू हुए तो आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा
सरकार का कहना है कि नए बदलाव लागू होते ही आम नागरिक को सबसे बड़ा फायदा समय और राहत के रूप में मिलेगा। नक्शा पास कराने की प्रक्रिया तेज होगी, नियमों की उलझन कम होगी और फाइलें महीनों तक दफ्तरों में धूल नहीं खाएंगी। साथ ही अनावश्यक देरी, बार-बार बुलावा और दौड़-भाग वाली व्यवस्था पर भी लगाम लगेगी। प्रशासन का दावा है कि प्रक्रिया जितनी ज्यादा सरल और पारदर्शी होगी, उतनी ही भ्रष्टाचार की गुंजाइश घटेगी और लोगों का काम बिना सिफारिश और बिना अतिरिक्त खर्च के तय समय में हो सकेगा। UP News












