उत्तर प्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेसवे के जरिए यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए नया वित्तीय वर्ष महंगा साबित होने जा रहा है। 1 अप्रैल से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर टोल टैक्स की नई दरें लागू होने जा रही हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेसवे के जरिए यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए नया वित्तीय वर्ष महंगा साबित होने जा रहा है। 1 अप्रैल से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर टोल टैक्स की नई दरें लागू होने जा रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से टोल शुल्क में संशोधन के बाद अब उत्तर प्रदेश के वाहन चालकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। झांसी-कानपुर हाईवे से लेकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक, निजी वाहनों से लेकर व्यावसायिक गाड़ियों तक सभी श्रेणियों पर इसका असर दिखाई देगा।
उत्तर प्रदेश के झांसी-कानपुर हाईवे पर स्थित एट-आटा टोल प्लाजा से गुजरने वाले लोगों को अब पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा। उरई और आसपास के इलाकों से रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों के लिए यह बदलाव सीधा आर्थिक असर लेकर आएगा। हर साल की तरह इस बार भी टोल दरों में संशोधन किया गया है, लेकिन इस बार की बढ़ोतरी ने स्थानीय यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। टोल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नई दरों को लागू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। फास्टैग से कटने वाला शुल्क भी 1 अप्रैल से संशोधित दरों के अनुसार ही वसूला जाएगा। यानी उत्तर प्रदेश में जो लोग नियमित रूप से इस हाईवे से सफर करते हैं, उन्हें हर यात्रा पर अतिरिक्त राशि चुकानी होगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर चलने वाले यात्रियों के लिए भी राहत की कोई गुंजाइश नहीं है। उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, इंदिरापुरम, डासना, भोजपुर और दिल्ली के बीच आवाजाही करने वाले हजारों यात्रियों पर नई टोल दरों का सीधा असर पड़ेगा। मेरठ से दिल्ली तक सफर करने वाले निजी चारपहिया वाहन चालकों को अब पहले से अधिक टोल देना होगा। यही नहीं, 24 घंटे के भीतर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी शुल्क में वृद्धि कर दी गई है। एनएचएआई के संशोधित ढांचे के अनुसार केवल कार, जीप और वैन ही नहीं, बल्कि हल्के व्यावसायिक वाहन, मिनी बस, बस, ट्रक और भारी मालवाहक गाड़ियों के टोल में भी बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में साफ है कि उत्तर प्रदेश में सड़क मार्ग से सफर और माल ढुलाई दोनों ही महंगे होने वाले हैं।
नई दरों के मुताबिक मेरठ से दिल्ली के बीच निजी वाहन चालकों को अब 170 रुपये की जगह 175 रुपये टोल देना होगा। एक दिन के भीतर वापसी करने वालों के लिए यह शुल्क 255 रुपये से बढ़ाकर 265 रुपये कर दिया गया है। हल्के व्यावसायिक वाहनों और मिनी बसों के लिए भी टोल दरों में इजाफा हुआ है, जिससे रोजाना परिवहन सेवाओं का खर्च बढ़ना तय है। इसी तरह बसों और दो एक्सल ट्रकों के टोल शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले जो वाहन 580 रुपये में गुजरते थे, अब उन्हें 595 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर यह राशि और अधिक हो जाएगी। अन्य भारी व्यावसायिक वाहनों पर 10 रुपये से लेकर 45 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है, जो परिवहन कंपनियों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश के उन लोगों पर पड़ेगा जो नौकरी, कारोबार, पढ़ाई या रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए हाईवे और एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करते हैं। रोज आना-जाना करने वालों का मासिक खर्च अब पहले से ज्यादा हो जाएगा। निजी वाहन चालकों के साथ-साथ टैक्सी, बस और मालवाहक वाहन संचालकों को भी इस बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब व्यावसायिक वाहनों पर टोल बढ़ता है तो उसका असर केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामान की ढुलाई लागत बढ़ने से बाजार भी प्रभावित होता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में यह बदलाव आम जनता तक अप्रत्यक्ष रूप से भी असर डाल सकता है।
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत उत्तर प्रदेश के वाहन चालकों के लिए महंगे सफर की खबर लेकर आई है। बेहतर सड़कें और तेज कनेक्टिविटी की सुविधा अब ज्यादा कीमत के साथ मिलेगी। झांसी-कानपुर हाईवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बढ़ी हुई दरें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में सड़क यात्रा का खर्च और बढ़ सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के यात्रियों को अब सफर की योजना बनाते समय टोल खर्च को भी गंभीरता से ध्यान में रखना होगा। UP News