उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति फिर अटकी, यूपीएससी ने लौटाया प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को संघ लोक सेवा आयोग ने आपत्तियों के साथ वापस कर दिया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में नया पेच फंस गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को संघ लोक सेवा आयोग ने आपत्तियों के साथ वापस कर दिया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में नया पेच फंस गया है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि प्रस्ताव को 2025 के सर्कुलर और तय गाइडलाइन के अनुरूप दोबारा भेजा जाए। ऐसे में अब पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ सकती है, जिससे देरी तय मानी जा रही है।
30 साल की सेवा पूरी कर चुके आईपीएस अधिकारियों का भेजा गया था पैनल
प्रदेश सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल भेजा था, जिसमें 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों को शामिल किया गया था। बताया जा रहा है कि इस सूची में 1990 से 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम शामिल थे। सरकार द्वारा भेजे गए पैनल में कुल 18 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यह सभी अधिकारी अनुभव, सेवा अवधि और वरिष्ठता के आधार पर पात्र माने गए हैं।
ये हैं प्रमुख दावेदार जिनके नाम भेजे गए
स्थायी डीजीपी पद की दौड़ में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें :
* रेणुका मिश्रा (1990 बैच, सबसे वरिष्ठ)
* आलोक शर्मा
* पीयूष आनंद
* राजीव कृष्णा (मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी) को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
वरिष्ठता के आधार पर तीन नाम चुनने थे आयोग को
नियमों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग को इस पैनल में से वरिष्ठता के आधार पर तीन अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट कर राज्य सरकार को भेजने होते हैं। इसके बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से किसी एक को डीजीपी नियुक्त करती है। लेकिन इस बार आयोग ने पैनल में ही आपत्ति लगाते हुए उसे वापस कर दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुक गई है।
एक बार फिर लटक सकती है स्थायी डीजीपी की नियुक्ति
प्रस्ताव लौटाए जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति में और देरी हो सकती है। नई गाइडलाइन के अनुसार संशोधित प्रस्ताव भेजने, फिर से स्क्रीनिंग और चयन की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिससे फिलहाल राज्य को कार्यवाहक व्यवस्था के साथ ही काम चलाना पड़ सकता है। यूपी में डीजीपी की स्थायी नियुक्ति को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार कब तक संशोधित प्रस्ताव भेजती है और संघ लोक सेवा आयोग कितनी जल्दी नई प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
UP News : उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को संघ लोक सेवा आयोग ने आपत्तियों के साथ वापस कर दिया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में नया पेच फंस गया है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि प्रस्ताव को 2025 के सर्कुलर और तय गाइडलाइन के अनुरूप दोबारा भेजा जाए। ऐसे में अब पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ सकती है, जिससे देरी तय मानी जा रही है।
30 साल की सेवा पूरी कर चुके आईपीएस अधिकारियों का भेजा गया था पैनल
प्रदेश सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल भेजा था, जिसमें 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों को शामिल किया गया था। बताया जा रहा है कि इस सूची में 1990 से 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम शामिल थे। सरकार द्वारा भेजे गए पैनल में कुल 18 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यह सभी अधिकारी अनुभव, सेवा अवधि और वरिष्ठता के आधार पर पात्र माने गए हैं।
ये हैं प्रमुख दावेदार जिनके नाम भेजे गए
स्थायी डीजीपी पद की दौड़ में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें :
* रेणुका मिश्रा (1990 बैच, सबसे वरिष्ठ)
* आलोक शर्मा
* पीयूष आनंद
* राजीव कृष्णा (मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी) को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
वरिष्ठता के आधार पर तीन नाम चुनने थे आयोग को
नियमों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग को इस पैनल में से वरिष्ठता के आधार पर तीन अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट कर राज्य सरकार को भेजने होते हैं। इसके बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से किसी एक को डीजीपी नियुक्त करती है। लेकिन इस बार आयोग ने पैनल में ही आपत्ति लगाते हुए उसे वापस कर दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया रुक गई है।
एक बार फिर लटक सकती है स्थायी डीजीपी की नियुक्ति
प्रस्ताव लौटाए जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति में और देरी हो सकती है। नई गाइडलाइन के अनुसार संशोधित प्रस्ताव भेजने, फिर से स्क्रीनिंग और चयन की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिससे फिलहाल राज्य को कार्यवाहक व्यवस्था के साथ ही काम चलाना पड़ सकता है। यूपी में डीजीपी की स्थायी नियुक्ति को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार कब तक संशोधित प्रस्ताव भेजती है और संघ लोक सेवा आयोग कितनी जल्दी नई प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।












