अयोध्या में धार्मिक उल्लास के बीच शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया।

UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम में एक बार फिर भक्ति, वैदिक परंपरा और उत्सव का अलौकिक संगम दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किए जाने वाले श्रीराम नाम मंदिर और श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा को लेकर गुरुवार से सात दिवसीय अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गया। इस विशेष धार्मिक आयोजन का शुभारंभ प्रतीकात्मक कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसे श्रीराम मंदिर से लक्ष्मण किला तक निकाला गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया। इस क्रम में उन्होंने क्षौर कर्म के बाद मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू में स्नान कर अनुष्ठान की औपचारिक शुरुआत की।
यज्ञशाला में शुरू हुए हवन पूजन और वेदपाठ
इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित यज्ञशाला में नौ कुंडीय हवन-पूजन के लिए पंचांग पूजन, वेदी पूजन और अन्य वैदिक अनुष्ठान आरंभ हुए। साथ ही चतुर्वेदों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पारायण भी शुरू हो गया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धा और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती के मार्गदर्शन में प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही अयोध्या लाया गया था। तब से मंदिर परिसर में इसकी पूजा हो रही है। अब मंदिर के दूसरे तल पर इसकी विधिवत प्रतिष्ठा के लिए सात दिनों का यह अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
19 मार्च को राष्ट्रपति की मौजूदगी में पूर्णाहुति
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, 18 मार्च को चैत्र कृष्ण अमावस्या के अवसर पर दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी। इसके बाद 19 मार्च को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पूजन में शामिल होंगी और उसी दिन इस सात दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी अत्यंत अहम माना जा रहा है। राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक बड़े कार्यक्रम की तरह इस आयोजन पर भी देशभर की निगाहें टिकी हैं।
51 आचार्य संभाल रहे अनुष्ठान की कमान
इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का संचालन मुख्य आचार्य चंद्रभानु शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके साथ आचार्य इंद्रदेव मिश्र, आचार्य रवीन्द्र पैठाढ़े समेत कुल 51 आचार्यों की टोली वैदिक विधि-विधान संपन्न करा रही है। बताया गया है कि अनुष्ठान प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय चलेगा। डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस समारोह में लगभग 300 संस्थाओं और एजेंसियों से जुड़े 1800 लोगों को आमंत्रित किया गया है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से हजारों मेहमान होंगे शामिल
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से करीब साढ़े तीन हजार अतिथियों को आमंत्रण दिया गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए चले समर्पण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा सात राज्यों से लगभग 300 संतों को भी आमंत्रित किया गया है। उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था अयोध्या में सात अलग-अलग स्थानों पर की गई है। उत्तर प्रदेश प्रशासन और मंदिर प्रबंधन इस आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में जुटा हुआ है।
मां अमृतानंदमयी 1200 अनुयायियों के साथ पहुंचेंगी अयोध्या
डॉ. अनिल मिश्र ने जानकारी दी कि केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मां अमृतानंदमयी भी इस अनुष्ठान में शामिल होने अयोध्या आएंगी। वह अपने करीब 1200 भक्तों के साथ 15 मार्च को रवाना होंगी और 17 मार्च को अयोध्या पहुंचेंगी। उनका प्रवास 20 मार्च तक प्रस्तावित है। मां अमृतानंदमयी की मौजूदगी से इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश की आस्था नगरी अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन और तेज होने की संभावना है।
वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर निकलेगी रामकोट परिक्रमा
इसी बीच, विक्रमादित्य महोत्सव समिति के तत्वावधान में 18 मार्च को वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर रामकोट परिक्रमा का आयोजन भी किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मंदिरों में ध्वज-पताका फहराने तथा वंदनवार सजाने का आग्रह भी किया। इस अपील के जरिए हिंदी नववर्ष को लेकर उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का व्यापक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
21 साल पुराने संकल्प से जुड़ी है परिक्रमा की परंपरा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि रामकोट परिक्रमा की शुरुआत 21 वर्ष पहले राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ हुई थी। संकल्प पूर्ण होने के बाद इस परंपरा को जारी रखा गया, ताकि नई पीढ़ी भी इसके महत्व को समझे और इससे जुड़ाव महसूस करे। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि संतों के संकल्प की सिद्धि के बाद इस परिक्रमा का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में इस आयोजन को पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन की परिक्रमा का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन वर्ष में एक बार होने वाली यह विशेष परिक्रमा आस्था को और दृढ़ करती है। वहीं लक्ष्मण किला के महंत मैथिली रमण शरण ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजी नववर्ष को उत्साह से मनाया जाता है, उसी तरह हिंदी नववर्ष पर भी सनातन परंपरा से जुड़े लोगों को उत्सवधर्मी भाव से आगे आना चाहिए।
रामजन्मभूमि संरक्षण के संकल्प से भी जुड़ी रही परिक्रमा
बावन मंदिर के महंत वैदेही वल्लभ शरण ने बताया कि 21 वर्ष पहले जब इस परिक्रमा की शुरुआत की गई थी, तब इसके पीछे कई महत्वपूर्ण संकल्प जुड़े थे। इनमें श्रीराम जन्मभूमि के संरक्षण का उद्देश्य भी प्रमुख था। कार्यक्रम का संचालन महंत रामशरण दास रामायणी ने किया। इस दौरान सीताकांत सदन के महंत रामानुज शरण, आचार्य राकेश तिवारी, जानकी कुंज के महंत वीरेंद्र दास, महंत छवि राम दास, महंत सत्येंद्र दास शास्त्री, डॉ. चंद्रगोपाल पाण्डेय और अवनि कुमार शुक्ल सहित कई संत और धर्माचार्य मौजूद रहे। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम में एक बार फिर भक्ति, वैदिक परंपरा और उत्सव का अलौकिक संगम दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किए जाने वाले श्रीराम नाम मंदिर और श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा को लेकर गुरुवार से सात दिवसीय अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गया। इस विशेष धार्मिक आयोजन का शुभारंभ प्रतीकात्मक कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसे श्रीराम मंदिर से लक्ष्मण किला तक निकाला गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया। इस क्रम में उन्होंने क्षौर कर्म के बाद मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू में स्नान कर अनुष्ठान की औपचारिक शुरुआत की।
यज्ञशाला में शुरू हुए हवन पूजन और वेदपाठ
इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित यज्ञशाला में नौ कुंडीय हवन-पूजन के लिए पंचांग पूजन, वेदी पूजन और अन्य वैदिक अनुष्ठान आरंभ हुए। साथ ही चतुर्वेदों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पारायण भी शुरू हो गया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धा और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती के मार्गदर्शन में प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही अयोध्या लाया गया था। तब से मंदिर परिसर में इसकी पूजा हो रही है। अब मंदिर के दूसरे तल पर इसकी विधिवत प्रतिष्ठा के लिए सात दिनों का यह अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।
19 मार्च को राष्ट्रपति की मौजूदगी में पूर्णाहुति
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, 18 मार्च को चैत्र कृष्ण अमावस्या के अवसर पर दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी। इसके बाद 19 मार्च को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पूजन में शामिल होंगी और उसी दिन इस सात दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी अत्यंत अहम माना जा रहा है। राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक बड़े कार्यक्रम की तरह इस आयोजन पर भी देशभर की निगाहें टिकी हैं।
51 आचार्य संभाल रहे अनुष्ठान की कमान
इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का संचालन मुख्य आचार्य चंद्रभानु शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके साथ आचार्य इंद्रदेव मिश्र, आचार्य रवीन्द्र पैठाढ़े समेत कुल 51 आचार्यों की टोली वैदिक विधि-विधान संपन्न करा रही है। बताया गया है कि अनुष्ठान प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय चलेगा। डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस समारोह में लगभग 300 संस्थाओं और एजेंसियों से जुड़े 1800 लोगों को आमंत्रित किया गया है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से हजारों मेहमान होंगे शामिल
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से करीब साढ़े तीन हजार अतिथियों को आमंत्रण दिया गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए चले समर्पण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा सात राज्यों से लगभग 300 संतों को भी आमंत्रित किया गया है। उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था अयोध्या में सात अलग-अलग स्थानों पर की गई है। उत्तर प्रदेश प्रशासन और मंदिर प्रबंधन इस आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में जुटा हुआ है।
मां अमृतानंदमयी 1200 अनुयायियों के साथ पहुंचेंगी अयोध्या
डॉ. अनिल मिश्र ने जानकारी दी कि केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मां अमृतानंदमयी भी इस अनुष्ठान में शामिल होने अयोध्या आएंगी। वह अपने करीब 1200 भक्तों के साथ 15 मार्च को रवाना होंगी और 17 मार्च को अयोध्या पहुंचेंगी। उनका प्रवास 20 मार्च तक प्रस्तावित है। मां अमृतानंदमयी की मौजूदगी से इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश की आस्था नगरी अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन और तेज होने की संभावना है।
वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर निकलेगी रामकोट परिक्रमा
इसी बीच, विक्रमादित्य महोत्सव समिति के तत्वावधान में 18 मार्च को वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर रामकोट परिक्रमा का आयोजन भी किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मंदिरों में ध्वज-पताका फहराने तथा वंदनवार सजाने का आग्रह भी किया। इस अपील के जरिए हिंदी नववर्ष को लेकर उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का व्यापक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
21 साल पुराने संकल्प से जुड़ी है परिक्रमा की परंपरा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि रामकोट परिक्रमा की शुरुआत 21 वर्ष पहले राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ हुई थी। संकल्प पूर्ण होने के बाद इस परंपरा को जारी रखा गया, ताकि नई पीढ़ी भी इसके महत्व को समझे और इससे जुड़ाव महसूस करे। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि संतों के संकल्प की सिद्धि के बाद इस परिक्रमा का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में इस आयोजन को पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन की परिक्रमा का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन वर्ष में एक बार होने वाली यह विशेष परिक्रमा आस्था को और दृढ़ करती है। वहीं लक्ष्मण किला के महंत मैथिली रमण शरण ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजी नववर्ष को उत्साह से मनाया जाता है, उसी तरह हिंदी नववर्ष पर भी सनातन परंपरा से जुड़े लोगों को उत्सवधर्मी भाव से आगे आना चाहिए।
रामजन्मभूमि संरक्षण के संकल्प से भी जुड़ी रही परिक्रमा
बावन मंदिर के महंत वैदेही वल्लभ शरण ने बताया कि 21 वर्ष पहले जब इस परिक्रमा की शुरुआत की गई थी, तब इसके पीछे कई महत्वपूर्ण संकल्प जुड़े थे। इनमें श्रीराम जन्मभूमि के संरक्षण का उद्देश्य भी प्रमुख था। कार्यक्रम का संचालन महंत रामशरण दास रामायणी ने किया। इस दौरान सीताकांत सदन के महंत रामानुज शरण, आचार्य राकेश तिवारी, जानकी कुंज के महंत वीरेंद्र दास, महंत छवि राम दास, महंत सत्येंद्र दास शास्त्री, डॉ. चंद्रगोपाल पाण्डेय और अवनि कुमार शुक्ल सहित कई संत और धर्माचार्य मौजूद रहे। UP News












