अयोध्या में धार्मिक उल्लास के बीच शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया।

अयोध्या में शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
अयोध्या में शुरू हुआ विशेष अनुष्ठान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 09:56 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम में एक बार फिर भक्ति, वैदिक परंपरा और उत्सव का अलौकिक संगम दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किए जाने वाले श्रीराम नाम मंदिर और श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा को लेकर गुरुवार से सात दिवसीय अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गया। इस विशेष धार्मिक आयोजन का शुभारंभ प्रतीकात्मक कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसे श्रीराम मंदिर से लक्ष्मण किला तक निकाला गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को देखते हुए कलश यात्रा दोपहर 12 बजे के बाद संपन्न कराई गई। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने वैदिक विधान से प्रायश्चित पूजन किया। इस क्रम में उन्होंने क्षौर कर्म के बाद मंत्रोच्चार के बीच मां सरयू में स्नान कर अनुष्ठान की औपचारिक शुरुआत की।

यज्ञशाला में शुरू हुए हवन पूजन और वेदपाठ

इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर स्थित यज्ञशाला में नौ कुंडीय हवन-पूजन के लिए पंचांग पूजन, वेदी पूजन और अन्य वैदिक अनुष्ठान आरंभ हुए। साथ ही चतुर्वेदों और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का पारायण भी शुरू हो गया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धा और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती के मार्गदर्शन में प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही अयोध्या लाया गया था। तब से मंदिर परिसर में इसकी पूजा हो रही है। अब मंदिर के दूसरे तल पर इसकी विधिवत प्रतिष्ठा के लिए सात दिनों का यह अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है।

19 मार्च को राष्ट्रपति की मौजूदगी में पूर्णाहुति

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, 18 मार्च को चैत्र कृष्ण अमावस्या के अवसर पर दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना होगी। इसके बाद 19 मार्च को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पूजन में शामिल होंगी और उसी दिन इस सात दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी अत्यंत अहम माना जा रहा है। राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक बड़े कार्यक्रम की तरह इस आयोजन पर भी देशभर की निगाहें टिकी हैं।

51 आचार्य संभाल रहे अनुष्ठान की कमान

इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का संचालन मुख्य आचार्य चंद्रभानु शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके साथ आचार्य इंद्रदेव मिश्र, आचार्य रवीन्द्र पैठाढ़े समेत कुल 51 आचार्यों की टोली वैदिक विधि-विधान संपन्न करा रही है। बताया गया है कि अनुष्ठान प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय चलेगा। डॉ. अनिल मिश्र ने कहा कि राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस समारोह में लगभग 300 संस्थाओं और एजेंसियों से जुड़े 1800 लोगों को आमंत्रित किया गया है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से हजारों मेहमान होंगे शामिल

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से करीब साढ़े तीन हजार अतिथियों को आमंत्रण दिया गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए चले समर्पण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा सात राज्यों से लगभग 300 संतों को भी आमंत्रित किया गया है। उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था अयोध्या में सात अलग-अलग स्थानों पर की गई है। उत्तर प्रदेश प्रशासन और मंदिर प्रबंधन इस आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने में जुटा हुआ है।

मां अमृतानंदमयी 1200 अनुयायियों के साथ पहुंचेंगी अयोध्या

डॉ. अनिल मिश्र ने जानकारी दी कि केरल की प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मां अमृतानंदमयी भी इस अनुष्ठान में शामिल होने अयोध्या आएंगी। वह अपने करीब 1200 भक्तों के साथ 15 मार्च को रवाना होंगी और 17 मार्च को अयोध्या पहुंचेंगी। उनका प्रवास 20 मार्च तक प्रस्तावित है। मां अमृतानंदमयी की मौजूदगी से इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश की आस्था नगरी अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन और तेज होने की संभावना है।

वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर निकलेगी रामकोट परिक्रमा

इसी बीच, विक्रमादित्य महोत्सव समिति के तत्वावधान में 18 मार्च को वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर रामकोट परिक्रमा का आयोजन भी किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इसमें भाग लेने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और मंदिरों में ध्वज-पताका फहराने तथा वंदनवार सजाने का आग्रह भी किया। इस अपील के जरिए हिंदी नववर्ष को लेकर उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का व्यापक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

21 साल पुराने संकल्प से जुड़ी है परिक्रमा की परंपरा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि रामकोट परिक्रमा की शुरुआत 21 वर्ष पहले राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ हुई थी। संकल्प पूर्ण होने के बाद इस परंपरा को जारी रखा गया, ताकि नई पीढ़ी भी इसके महत्व को समझे और इससे जुड़ाव महसूस करे। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि संतों के संकल्प की सिद्धि के बाद इस परिक्रमा का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में इस आयोजन को पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन की परिक्रमा का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन वर्ष में एक बार होने वाली यह विशेष परिक्रमा आस्था को और दृढ़ करती है। वहीं लक्ष्मण किला के महंत मैथिली रमण शरण ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजी नववर्ष को उत्साह से मनाया जाता है, उसी तरह हिंदी नववर्ष पर भी सनातन परंपरा से जुड़े लोगों को उत्सवधर्मी भाव से आगे आना चाहिए।

रामजन्मभूमि संरक्षण के संकल्प से भी जुड़ी रही परिक्रमा

बावन मंदिर के महंत वैदेही वल्लभ शरण ने बताया कि 21 वर्ष पहले जब इस परिक्रमा की शुरुआत की गई थी, तब इसके पीछे कई महत्वपूर्ण संकल्प जुड़े थे। इनमें श्रीराम जन्मभूमि के संरक्षण का उद्देश्य भी प्रमुख था। कार्यक्रम का संचालन महंत रामशरण दास रामायणी ने किया। इस दौरान सीताकांत सदन के महंत रामानुज शरण, आचार्य राकेश तिवारी, जानकी कुंज के महंत वीरेंद्र दास, महंत छवि राम दास, महंत सत्येंद्र दास शास्त्री, डॉ. चंद्रगोपाल पाण्डेय और अवनि कुमार शुक्ल सहित कई संत और धर्माचार्य मौजूद रहे। UP News

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लखनऊ के लिए आज बड़ा दिन, राजनाथ सिंह और सीएम योगी देंगे बड़ी सौगात

देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झूलेलाल वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया जाएगा।

राजनाथ सिंह और सीएम योगी आज रहेंगे मौजूद
राजनाथ सिंह और सीएम योगी आज रहेंगे मौजूद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 09:38 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को शुक्रवार को ट्रैफिक व्यवस्था के लिहाज से बड़ी सौगात मिलने जा रही है। देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झूलेलाल वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया जाएगा। इस अहम पहल के शुरू होने से राजधानी के लाखों लोगों को जाम की समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रीन कॉरिडोर का दूसरा चरण शुरू होने के बाद डालीगंज, निशातगंज और समता मूलक चौक के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो जाएगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी के इस हिस्से में रोजाना भारी दबाव रहने के कारण लोगों को लंबे समय तक जाम का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह परियोजना यातायात को नई रफ्तार देने का काम करेगी।

15 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में तैयार किए गए ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण पर करीब 299 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह हिस्सा डालीगंज से निशातगंज होते हुए समता मूलक चौक तक विकसित किया गया है। इसकी लंबाई लगभग 7 किलोमीटर बताई जा रही है। इस चरण के चालू होने से करीब 15 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि यह कॉरिडोर राजधानी लखनऊ के भीतर यात्रा समय कम करने के साथ-साथ ईंधन की बचत और ट्रैफिक दबाव घटाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इसे शहरी यातायात प्रबंधन के बड़े मॉडल के रूप में देख रही है।

तीसरे और चौथे चरण पर 1220 करोड़ रुपये होंगे खर्च

ग्रीन कॉरिडोर परियोजना केवल दूसरे चरण तक सीमित नहीं है। शुक्रवार को इसके तृतीय और चतुर्थ चरण का भी शिलान्यास किया जाएगा। इन दोनों चरणों के निर्माण पर करीब 1220 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित कार्यों में 1090 चौराहे से शहीद पथ तक फ्लाईओवर, चार लेन सड़क और बंधे का निर्माण शामिल है। इसके अलावा आईआईएम रोड से किसान पथ तक के बड़े विस्तार के लिए भी व्यापक योजना तैयार की गई है। इस पूरे विस्तार पर हजारों करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव रखा गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में यह परियोजना आने वाले वर्षों में शहरी कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकती है।

आईआईएम से हजरतगंज और गोमतीनगर तक सफर होगा आसान

अब तक लखनऊ के कई हिस्सों से हजरतगंज और गोमतीनगर पहुंचने में लोगों को लंबा समय लग जाता था। खासतौर पर आईआईएम रोड से आने-जाने वाले यात्रियों को अक्सर करीब एक घंटे तक का समय लग जाता था। ग्रीन कॉरिडोर के विस्तार के बाद यही सफर घटकर लगभग 20 मिनट तक सिमट सकता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोजाना दफ्तर, बाजार, स्कूल और अस्पताल जाने वाले लोगों के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण के शुरू होते ही इस रूट पर यातायात अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित होने लगेगा। उनका मानना है कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना राजधानी के भीतर ट्रैफिक मूवमेंट को नई दिशा देगी। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसी परियोजनाएं भविष्य की जरूरत मानी जा रही हैं।

166 पेड़ों को काटने के बजाय किया गया ट्रांसप्लांट

ग्रीन कॉरिडोर परियोजना की एक खास बात यह भी रही कि निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखा गया। परियोजना के रास्ते में आने वाले करीब 166 बड़े पेड़ों को काटने के बजाय ट्रांसप्लांट कराया गया। अधिकारियों का दावा है कि इन पेड़ों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है और वे सुरक्षित हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की इस कोशिश को प्रशासन की सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीन कॉरिडोर के बीरबल साहनी मार्ग पर पहले पाम के पेड़ लगाए गए थे। हालांकि बाद में इन्हें हटाकर उनकी जगह दूसरे उपयुक्त पेड़ लगाए गए। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर पौधारोपण को लेकर तकनीकी चूक हुई थी, जिसे बाद में सुधार लिया गया। अब यहां ऐसे पौधे लगाए गए हैं जो इस क्षेत्र के लिए अधिक उपयुक्त माने जा रहे हैं। बता दें कि ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का पहला चरण 11 मार्च 2024 को शुरू किया गया था। उस चरण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके तहत आईआईएम रोड से पक्का पुल तक 6.8 किलोमीटर लंबे हिस्से को विकसित किया गया था। अब दूसरे चरण के लोकार्पण के साथ यह परियोजना आगे बढ़ रही है, जबकि डालीगंज के बीच के हिस्से और 1090 चौराहे से लामार्ट होते हुए शहीद पथ तक के हिस्से पर भी काम जारी है। UP News

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खुफिया एजेंसियों ने गाजियाबाद से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल छह को किया गिरफ्तार

सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया है। इन सभी पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यह कार्रवाई गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में पुलिस, एटीएस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई।

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गाजियाबाद जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया
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userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 06:28 PM
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UP News : गाजियाबाद जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया है। इन सभी पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यह कार्रवाई गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में पुलिस, एटीएस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई।

गतिविधियों को संचालित करने के लिए बनाया था अलग समूह

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान शावेज (20), जुनैद (23), फरदीन (22), इकराम (36), फजलू (48) और जावेद (45) के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ये सभी लोग इंटरनेट और अन्य माध्यमों के जरिए भड़काऊ और देश विरोधी सामग्री फैलाने में सक्रिय थे। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने अपनी गतिविधियों को संचालित करने के लिए एक अलग समूह भी बना रखा था।

सभी आरोपियों से मसूरी थाने में गहन पूछताछ की जा रही

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि इनका संपर्क लोनी के यूट्यूबर सलीम स्वास्तिक पर हुए हमले में शामिल लोगों से था। इस संबंध में इनपुट इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को मिला था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कार्रवाई की। लोनी में यूट्यूबर पर हुए हमले के बाद इलाके में पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी गई थी। इसी दौरान नाहल गांव से जुड़े इन संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल सभी आरोपियों से मसूरी थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस उनकी कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। स्थिति को नियंत्रित रखने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रहे हैं और जांच के आगे बढ़ने के साथ नए खुलासों की संभावना भी जताई जा रही है।


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