उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वे काफी समय से बिना किसी नियमित जिम्मेदारी के उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद से संबद्ध चल रहे थे।

UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वे काफी समय से बिना किसी नियमित जिम्मेदारी के उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद से संबद्ध चल रहे थे। ऐसे में सक्रिय प्रशासनिक भूमिका से लगातार दूर रहने के बाद उन्होंने सेवा छोड़ने का फैसला किया। रिंकू सिंह राही का नाम उत्तर प्रदेश में नया नहीं है। उनका प्रशासनिक सफर कई चर्चित घटनाओं और संघर्षों से जुड़ा रहा है। पिछले साल 2025 में वह अचानक सुर्खियों में आ गए थे, जब शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह वकीलों के सामने उठक-बैठक करते दिखाई दिए थे। इस घटना के बाद प्रशासन ने उन्हें जुलाई 2025 से उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद में अटैच कर दिया था।
इस्तीफे में झलका सिस्टम से असंतोष
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे में साफ कहा है कि उन्हें लंबे समय से न तो कोई नई पोस्टिंग दी जा रही थी और न ही कोई ठोस प्रशासनिक काम सौंपा जा रहा था। उन्होंने यह भी लिखा कि सेवा में बने रहने के बावजूद उन्हें जनहित में काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था। एक अधिकारी के रूप में उनकी सबसे बड़ी पीड़ा यही रही कि वे पद पर तो थे, लेकिन भूमिका से लगभग बाहर कर दिए गए थे। राही ने अपने निर्णय को नैतिक आधार पर लिया गया कदम बताया है। उनका मानना है कि जब किसी अधिकारी को सिर्फ संबद्ध रखकर वास्तविक जिम्मेदारियों से दूर कर दिया जाए, तब ऐसी स्थिति में पद पर बने रहना केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वेतन मिलने के बावजूद यदि जनता के लिए काम करने का अवसर ही न मिले, तो यह किसी भी जिम्मेदार अफसर के लिए असहज स्थिति होती है।
रिंकू सिंह राही की पहचान उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक जुझारू और साहसी अफसर के तौर पर भी रही है। साल 2009 में उन्होंने मुजफ्फरनगर में कथित तौर पर एक बड़े घोटाले का खुलासा किया था। उस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें सात गोलियां लगीं। गंभीर हमले के बावजूद उनका बच जाना और फिर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहना उन्हें अलग पहचान देता है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में उनका नाम अक्सर एक ऐसे अधिकारी के रूप में लिया जाता रहा, जिसने मुश्किल हालात में भी पीछे हटने के बजाय अपने तरीके से लड़ाई जारी रखी। उनके करियर की यही पृष्ठभूमि इस्तीफे की खबर को और ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।
शाहजहांपुर की घटना रिंकू सिंह राही के करियर का एक अहम मोड़ साबित हुई। वकीलों के प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया। इसके बाद उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं मिली। यही लंबा इंतजार अब उनके इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। UP News