उत्तर प्रदेश के मूल निवासी IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ की मौत बहुत बड़ी डेथ मिस्ट्री बन गई है। प्रसिद्ध IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ का परिवार तथा उनके तमाम परिचित यह दावा कर रहे हैं कि श्री धनखड़ जैसा मजबूत अधिकारी आत्महत्या कर ही नहीं सकता।

UP News : उत्तर प्रदेश के मूल निवासी IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ की मौत बहुत बड़ी डेथ मिस्ट्री बन गई है। प्रसिद्ध IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ का परिवार तथा उनके तमाम परिचित यह दावा कर रहे हैं कि श्री धनखड़ जैसा मजबूत अधिकारी आत्महत्या कर ही नहीं सकता। उत्तर प्रदेश के ज्यादातर नागरिक अनुराग धनखड़ के परिजनों की बात से सहमत हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि IPS अधिकारी अनुराग धनखड़ ने आत्महत्या नहीं की है तो फिर उनकी मौत का राज क्या है? UP News
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मूल निवासी और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब केवल एक राज्य का मामला नहीं रह गई है। यह घटना पूरे देश के पुलिस महकमे और खासकर उत्तर प्रदेश में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना गया, लेकिन अब परिवार, रिश्तेदारों और अनुराग धनखड़ के करीबी लोगों ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर दी है। अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बड़ौत में की और वर्ष 1994 बैच के IPS अधिकारी बने। उन्हें त्रिपुरा कैडर मिला, लेकिन उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक तेजतर्रार, ईमानदार और बेहद पेशेवर अधिकारी के रूप में थी। वे CBI में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे और कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का हिस्सा रहे। संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन में भी उन्होंने सेवाएं दी थीं। UP News
20 जुलाई को अगरतला स्थित त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में अनुराग धनखड़ मृत पाए गए। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई, लेकिन घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने और कई परिस्थितियों के स्पष्ट न होने से मामला रहस्य बन गया है। पुलिस और फोरेंसिक टीम पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब अनुराग धनखड़ के परिवार ने सार्वजनिक रूप से आत्महत्या की आशंका पर सवाल खड़े कर दिए। उनके बड़े भाई और अन्य परिजनों का कहना है कि अनुराग धनखड़ बेहद मजबूत इरादों वाले अधिकारी थे। उन्होंने अपने पूरे करियर में बड़े-बड़े अपराधियों और संवेदनशील मामलों का सामना किया था। ऐसे अधिकारी के आत्महत्या करने की बात पर विश्वास करना मुश्किल है। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। UP News
जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर बागपत जिले के बड़ौत कस्बे में पहुंचा तो हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान भी एक ही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई देता रहा—क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है? परिवार का कहना है कि घटना से लगभग 10 दिन पहले अनुराग धनखड़ अपने घर आए थे। उन्होंने परिवार के साथ सामान्य तरीके से समय बिताया। बातचीत और व्यवहार में कहीं भी तनाव, अवसाद या किसी मानसिक परेशानी के संकेत नहीं थे। यही वजह है कि परिवार आत्महत्या की थ्योरी को आसानी से स्वीकार करने को तैयार नहीं है। अनुराग धनखड़ का करियर बेहद शानदार माना जाता है। वे CBI में रहते हुए कई महत्वपूर्ण आर्थिक अपराधों और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच से जुड़े रहे। साइबर अपराध, फ्रॉड जांच और फोरेंसिक एग्जामिनेशन में उनकी विशेषज्ञता की चर्चा देशभर में होती थी। यही कारण है कि उनकी संदिग्ध मौत ने पुलिस और प्रशासनिक हलकों में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। UP News
अनुराग धनखड़ का उत्तर प्रदेश से गहरा जुड़ाव था। वे बागपत के निवासी थे और प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा माने जाते थे। उनके निधन के बाद बागपत, मेरठ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पुलिस सेवा से जुड़े लोगों में गहरा शोक है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल त्रिपुरा पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच जारी है। अभी तक जांच एजेंसियों ने मौत के कारणों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। ऐसे में आत्महत्या या किसी अन्य कारण की पुष्टि होना अभी बाकी है। UP News
उत्तर प्रदेश के बागपत से निकलकर देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों में अपनी पहचान बनाने वाले अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। जब किसी राज्य का पुलिस प्रमुख ही रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत मिलता है और परिवार आत्महत्या के दावे पर सवाल उठाता है, तो स्वाभाविक रूप से पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच की मांग और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच पूरी होने तक इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन इतना तय है कि यह घटना देश की सबसे चर्चित डेथ मिस्ट्री में शामिल हो चुकी है। UP News
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