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उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय और खुफिया इकाइयों ने ऐसे सभी आयोजनों पर कड़ी निगरानी के निर्देश जारी किए हैं, जिनमें संदिग्ध गतिविधियों, बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही या कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार की आशंका जताई गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में जमात से जुड़ी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय और खुफिया इकाइयों ने ऐसे सभी आयोजनों पर कड़ी निगरानी के निर्देश जारी किए हैं, जिनमें संदिग्ध गतिविधियों, बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही या कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही किसी भी जिले में गैर-परंपरागत जमात के आयोजन को तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश दिए गए हैं। UP News
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी जमात में शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों चाहे वे आयोजक हों या प्रतिभागी 24 घंटे के भीतर पुलिस और खुफिया इकाइयों द्वारा अनिवार्य सत्यापन किया जाएगा। गैर-जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले लोगों का पूरा ब्योरा संबंधित थानों को भेजकर तुरंत जांच कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्तर पर संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर सीधे कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। हर जिले में पुलिस, एलआईयू (Local Intelligence Unit) और खुफिया विभाग की संयुक्त टीमों को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की संभावना न रहे। UP News
एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में कुछ मामलों में जमात की आड़ में संदिग्ध नेटवर्क और गतिविधियों के इनपुट सामने आ चुके हैं। इसी कारण सुरक्षा दृष्टिकोण से सख्ती बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि अब बिना अनुमति किसी भी प्रकार की गैर-परंपरागत जमात की अनुमति नहीं दी जाएगी। हर आयोजन से पहले संबंधित थाने को पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा और उसका समयबद्ध सत्यापन किया जाएगा। UP News
पिछले वर्ष फरीदाबाद–दिल्ली क्षेत्र में सामने आए कथित ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ मामले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने धार्मिक आयोजनों की आड़ में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को लेकर अपनी सतर्कता और बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ मामलों में जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े नेटवर्क का भी खुलासा हुआ था। एजेंसियों ने दावा किया था कि ऐसे नेटवर्क में पेशेवरों की भागीदारी और भर्ती के लिए विभिन्न धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल किया गया था। इसी इनपुट के बाद जमात से जुड़े आयोजनों पर निगरानी और सख्त कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि कई मामलों में वारदात के बाद अपराधी पहचान छिपाने के लिए ऐसे आयोजनों का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। कई बार प्रतिभागियों का सही रिकॉर्ड न होने से जांच एजेंसियों को भी कठिनाई होती है। इसी वजह से अब हर स्तर पर रिकॉर्ड-कीपिंग और वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था को किसी भी तरह की चुनौती न मिले। UP News
हाल के दिनों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कुछ कार्रवाईयों के दौरान टेरर फंडिंग से जुड़े इनपुट सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क हो गई हैं। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ नेटवर्क धार्मिक आयोजनों के माध्यम से फंड जुटाने की कोशिश करते हैं। इन्हीं संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश भर में पुलिस और इंटेलिजेंस यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सभी जिलों में सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। UP News
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