पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जमानत, पत्नी की अग्रिम जमानत नामंजूर

यह मामला वर्ष 1999 से जुड़ा हुआ है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उस दौरान लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विराम खंड क्षेत्र में उनकी पत्नी के नाम औद्योगिक क्षेत्र का एक प्लॉट खरीदा गया था।

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अमिताभ ठाकुर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 07:40 PM
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UP News : धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जिला न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। देवरिया जेल में बंद अमिताभ ठाकुर को सोमवार को जिला जज की अदालत ने जमानत दे दी, जिससे उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, इसी मामले में उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को अदालत से राहत नहीं मिली। न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद अब वह हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही हैं।

गलत नाम से हुई थी जमीन की रजिस्ट्री

यह मामला वर्ष 1999 से जुड़ा हुआ है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उस दौरान लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विराम खंड क्षेत्र में उनकी पत्नी के नाम औद्योगिक क्षेत्र का एक प्लॉट खरीदा गया था। आरोप है कि प्लॉट की रजिस्ट्री के समय नूतन ठाकुर के स्थान पर नूतन देवी और अमिताभ ठाकुर के स्थान पर अभिजात नाम दर्ज किया गया। इसी कथित अनियमितता को लेकर सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 10 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज दिया था।

जिला जज की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी

पूर्व आईपीएस अधिकारी की ओर से अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने जिला जज की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी। सोमवार को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अमिताभ ठाकुर को जमानत देने का आदेश जारी किया। वहीं, नूतन ठाकुर की अग्रिम जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया।

जेल में बंद रहने के दौरान अमिताभ ठाकुर को जान से मारने की धमकी 

इस बीच जेल में बंद रहने के दौरान अमिताभ ठाकुर को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला भी सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई सिक्योरिटी बैरक के बाहर कंप्यूटर से टाइप किया गया एक धमकी भरा पत्र फेंका गया, जिसमें अपशब्दों के साथ जान से मारने की बात लिखी थी। यह पत्र पत्थर के टुकड़े में लपेटकर फेंका गया था। घटना की सूचना उन्होंने तत्काल जेल प्रशासन को दी।

जेल अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया और जांच के आदेश दिए। अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि इस घटना के बाद से उनके मुवक्किल काफी डरे हुए हैं और उन्हें जेल में अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो रहा है। मामले की जांच फिलहाल जारी है।


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राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने का अंतिम मौका, पेश होना अनिवार्य

अदालत ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी को 20 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। यह मामला लगभग आठ साल पुराना है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित विवादित बयान से संबंधित है।

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राहुल गांधी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 06:11 PM
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UP News : सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी को मानहानि मामले में अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी को 20 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। यह मामला लगभग आठ साल पुराना है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित विवादित बयान से संबंधित है। उस बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।

राहुल गांधी 20 फरवरी को अदालत में पेश होंगे

मामले की सुनवाई के दौरान पहले गवाह रामचंद्र दूबे ने अपना बयान दर्ज कराया था, और अधिवक्ताओं ने उनके बयान की जिरह भी की। राहुल गांधी को पिछले सुनवाई पर उपस्थित होना था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके वकील ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी निश्चित रूप से 20 फरवरी को अदालत में पेश होंगे।

गैर-मौजूदगी पर अंतिम चेतावनी जारी 

हालांकि राहुल गांधी पहले अपना बयान दर्ज कर चुके हैं और फिलहाल जमानत पर हैं, अदालत ने इस मामले में उनकी गैर-मौजूदगी पर अंतिम चेतावनी जारी की है। यह मामला आठ साल पुराना है और इस मामले में राहुल गांधी अपना बयान पहले ही दर्ज करवा चुके हैं। पिछले जिरह में राहुल मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी उपस्थिति को लेकर अदालत ने उन्हें अन्तिम चेतावनी दी है। 

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उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध बड़ा आंदोलन, आर-पार की लड़ाई की घोषणा

पाल समाज की घोषणा के बाद पाल समाज ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के ऊपर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। लाठीचार्ज के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ है।

मणिकर्णिका घाट की गलियों में पाल समाज का प्रदर्शन
मणिकर्णिका घाट की गलियों में पाल समाज का प्रदर्शन
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar19 Jan 2026 05:35 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। पिछले कुछ सालों में हुए तमाम आंदोलनों में इस आंदोलन को सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पाल समाज ने उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध आर-पार की लड़ाई की घोषणा कर दी है। पाल समाज की घोषणा के बाद पाल समाज ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के ऊपर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। लाठीचार्ज के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुरू हो गया बड़ा आंदोलन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित मणिकर्णिका घाट का विवाद बड़े आंदोलन का कारण बन गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के पाल समाज ने अहिल्याबाई होल्कर की क्षतिग्रस्त मूर्ति के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। घाट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस से तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। समझाने के बावजूद न मानने पर पुलिस ने लाठी भांजकर भीड़ को खदेड़ा और करीब डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया। मणिकर्णिका घाट जाने वाली गली में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब रानी अहिल्याबाई की तस्वीर लेकर कुछ लोग नारेबाजी करने लगे। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। ऐसे में पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और जबरन भीड़ को मौके से हटाना पड़ा। डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुंभ महादेव मंदिर का वीडियो गलत संदर्भ में वायरल किया जा रहा है, जबकि वह मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है। इस मामले में शनिवार को नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब संजय सिंह और पप्पू यादव सहित आठ लोगों को तीन दिन के भीतर चौक थाने में पेश होने को कहा गया है। पुलिस उन सभी की पहचान कर रही है जो धार्मिक उन्माद फैलाने वाले पोस्ट कर रहे हैं। इन सबके बीच आज अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर सोमवार को पाल समाज के लोग मणिकर्णिका की गलियों में एकत्रित हुए. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने मूर्ति को खंडित किया है, इसलिए उन्हें वहां फिर से मूर्ति स्थापित करने की अनुमति दी जाए. स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा और कई लोगों को हिरासत में लेकर चौक थाने ले गई. इस दौरान काफी देर तक मणिकर्णिका क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

वाराणसी पुलिस का एक्शन 

वाराणसी पुलिस ने मणिकर्णिका घाट विवाद में एआई जनरेटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट साझा करने के आरोप में राज्यसभा सांसद संजय सिंह और सांसद पप्पू यादव को चौक थाने में बयान दर्ज कराने का नोटिस भेजा है। पुलिस ने कुंभ महादेव मंदिर को खंडित बताने वाली पोस्टों को धार्मिक सद्भाव बिगाडऩे की साजिश करार देते हुए यह कार्रवाई की। इसी बीच, सोमवार को मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति खंडित किए जाने का आरोप लगाकर प्रदर्शन कर रहे पाल समाज के लोगों को पुलिस ने बल प्रयोग कर हटा दिया। पुलिस ने इस दौरान एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

क्या है उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विवाद का कारण?

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास और पुनरुद्धार कार्य विवादों की आग में घिर गया है। सोशल मीडिया पर बुलडोजर से तोडफ़ोड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय निवासियों, पाल समाज और धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन धरोहर पर हमला करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। यह विवाद मुख्य रूप से घाट पर एक प्राचीन चबूतरा और उससे जुड़ी मूर्तियों, खासकर रानी अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित प्रतिमाओं के कथित क्षतिग्रस्त होने के आरोपों से जुड़ा है। कुछ लोगों का दावा है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाओं और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे घाट का मूल आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर का यह पुनर्विकास कार्य श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सफलता के बाद शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद घाट पर भीड़भाड़ कम करना, श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार करने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्वच्छता सुधारना, सीढिय़ां मजबूत करना और मानसून में आने वाली बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाना है. प्रोजेक्ट में मल्टी-लेवल प्लेटफॉर्म, बेहतर एक्सेस, वुड प्लाजा और अन्य आधुनिक सुविधाओं का प्रस्ताव है, ताकि 24म7 जलने वाली चिताओं के बीच भी श्रद्धालुओं को सुविधा मिले। यह काम नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की देखरेख में चल रहा है, और इसकी कुल लागत करोड़ों में बताई जा रही है।

कोई भी मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वाराणसी के प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी मंदिर या पूजनीय मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है। खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियां और मूर्तियां संस्कृति विभाग के संरक्षण में हैं, जिन्हें पुनर्निर्माण के बाद उसी स्थान पर या उपयुक्त जगह पर पुन: स्थापित किया जाएगा। कई वायरल तस्वीरों को एआई जनरेटेड या पुरानी/गुमराह करने वाली बताया गया है, जिसके खिलाफ पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए, फिर प्रोजेक्ट साइट ऑफिस से विकास कार्यों का निरीक्षण किया. सीएम ने कहा कि कुछ तत्व काशी को बदनाम करने और विकास कार्यों में बाधा डालने की साजिश रच रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर पुरानी तस्वीरों और फर्जी वीडियो से भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, और याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी इसी तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन अब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है। UP News



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