उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उसकी पढ़ाई, इलाज, मोबाइल–टैबलेट की व्यवस्था से लेकर उसके परिवार के लिए आवास उपलब्ध कराने तक का भरोसा देकर साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश में सरकार सिर्फ फाइलों से नहीं, दिल से भी चलती है।

UP News : उत्तर प्रदेश से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर की श्रवण–वाक् दिव्यांग बच्ची खुशी गुप्ता के दिल में बस एक ही अरमान था अपने हाथों से बनाई पेंटिंग को हर वक्त टीवी पर दिखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक खुद पहुंचाना। इसी सपने की डोर थामे वह कानपुर से चुपचाप पैदल चलकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंच गई। जब यह कहानी मुख्यमंत्री योगी तक पहुंची, तो उन्होंने सिर्फ एक पेंटिंग लेने की औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुशी के जीवन की पूरी दिशा बदलने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उसकी पढ़ाई, इलाज, मोबाइल–टैबलेट की व्यवस्था से लेकर उसके परिवार के लिए आवास उपलब्ध कराने तक का भरोसा देकर साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश में सरकार सिर्फ फाइलों से नहीं, दिल से भी चलती है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली श्रवण–वाक् दिव्यांग खुशी गुप्ता भले ही सुन और बोल नहीं सकती, लेकिन उसके इशारों की भाषा और आंखों में छिपी जिद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक सीधा संदेश पहुंचा दिया। अपनी बनाई हुई पेंटिंग को सीने से लगाकर जब वह लखनऊ पहुंची और लोकभवन के भीतर प्रवेश न मिल सका, तो बाहर ही फूट–फूटकर रोने लगी। मासूम बच्ची की लाचारी देख वहां मौजूद हजरतगंज पुलिस भी भावुक हो उठी। पुलिसकर्मियों ने उसे अपने संरक्षण में लिया, उससे जितनी जानकारी संभव हो सकी, इशारों के जरिए समझी और फिर उसके परिवार से संपर्क कर खबर दी। इधर घर पर हालात ऐसे थे कि घबराए परिजनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी, उधर लखनऊ की सड़कों पर एक दिव्यांग बच्ची का सपना मुख्यमंत्री तक पहुंचने के लिए रास्ता तलाश रहा था।
कानपुर के ग्वालटोली अहरानी की तंग गलियों से निकलने वाली यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यहीं रहती है श्रवण–वाक् दिव्यांग खुशी गुप्ता। 22 नवंबर की सुबह वह बिना किसी को बताए चुपचाप घर से निकल पड़ी और उत्तर प्रदेश के इस छोटे से मोहल्ले से पैदल ही राजधानी लखनऊ की ओर रवाना हो गई। घर की आर्थिक हालत ऐसी है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी ही एक जंग की तरह है। पिता कल्लू गुप्ता कभी संविदा पर गार्ड की नौकरी करते थे, अब बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। मां गीता गुप्ता दूसरों के घरों में काम करके मुश्किल से चूल्हा जलाती हैं। लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बीच उत्तर प्रदेश की इस मासूम बेटी के मन में एक ही ख्वाहिश पलती रही – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना और उन्हें अपनी हाथों से बनाई पेंटिंग भेंट करना। खास बात यह है कि पढ़ाई न कर पाने के बावजूद खुशी अपने पिता का नाम, मोबाइल नंबर और मुख्यमंत्री का नाम खुद लिख लेती है। यही छोटी–सी सीख उसके लिए बड़ी ढाल साबित हुई और इसी की मदद से उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने उसकी सही पहचान की, परिवार तक सूचना पहुंचाई और आगे की पूरी कहानी संभव हो सकी।
जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक खुशी की कहानी पहुँची तो मामला सिर्फ एक बच्ची से मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने फौरन परिवार को अपने आधिकारिक आवास पर बुलाने के निर्देश दिए और लखनऊ पहुंचते ही नज़ारा बदल गया। योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ खुशी से स्नेहभरी मुलाकात की, बल्कि उसके पूरे भविष्य की रूपरेखा भी वहीं तय कर दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि खुशी को कानपुर के मूक–बधिर महाविद्यालय में दाखिला दिलवाया जाएगा, उसकी पढ़ाई और कौशल विकास के लिए मोबाइल और टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, उसकी सुनने की समस्या के इलाज का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी और परिवार के लिए पक्के आवास की व्यवस्था करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ेगी। UP News