उत्तर प्रदेश में चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के काले कारोबार में हर समय नया खुलासा हो रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस को पता चला है कि किडनी खरीदने तथा बेचने का काला कारोबार पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है।

UP News : उत्तर प्रदेश में चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के काले कारोबार में हर समय नया खुलासा हो रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस को पता चला है कि किडनी खरीदने तथा बेचने का काला कारोबार पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश पुलिस को यह भी पता चला है कि किडनी ट्रांसप्लांट का यह काला कारोबार देश की राजधानी दिल्ली से लेकर झारखंड तथा भारत की सीमा के पार नेपाल तक फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि कम से कम 50 अस्पताल तथा नर्सिंग होम कितनी के काले कारोबार से जुड़े हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के काले कारोबार के मामले में 50 से अधिक अस्पताल तथा नर्सिंग होम उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच के दायरे में है। मेरठ का अल्फा अस्पताल, कानपुर का आहूजा अस्पताल, गाजियाबाद का शांति गोपाल अस्पताल, ग्रेटर नोएडा का सर्वोदय अस्पताल तथा उन्नाव के आहुजा अस्पताल सहित 50 से अधिक अस्पताल किसी ना किसी रूप में किडनी के काले कारोबार के साथ जुड़े हुए हैं। कानपुर के तो 10 से अधिक अस्पताल उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच के दायरे में हैं। इस प्रकार उन्नाव, जालौन, लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद तथा ग्रेटर नोएडा के अस्पतालों के कारनामों को भी पुलिस ने जांच के दायरे में ले लिया है।
चेतना मंच के संवाददाता के अनुसार टेलीग्राम ग्रुप के जरिये अवैध तरीके से किडनी की खरीद-बिक्री व ट्रांसप्लांट के काले कारोबार में लिप्त दो और आरोपितों को पुलिस ने गाजियाबाद से पकड़ा है। इनमें एक पिलखुवा, हापुड़ निवासी कुलदीप सिंह राघव व गाजियाबाद निवासी राजेश कुमार शामिल है। इनका तीसरा साथी डाक्टर है, जिसको ढूंढ़ा जा रहा है। कुलदीप ओटी टेक्निशियन व राजेश ओटी इंचार्ज हैं। इन लोगों को किडनी खरीद-बिक्री का रैकेट चलाने वाला लखनऊ का डा. रोहित हर ट्रांसप्लांट के लिए 40-40 हजार रुपये व फ्लाइट का टिकट देता था। बताया जा रहा है कि आरोपितों ने आयुष को अमिताभ बच्चन की एक किडनी न होने व प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब होने के बावजूद क्रियाशील होने का वीडियो दिखा ब्रेनवाश किया था। मेरठ में कानपुर पुलिस ने अल्फा अस्पताल में किडनी कांड में नामजद डाक्टरों के बारे में पूछताछ की। इसके बाद डा. अफजल की विलनिक गई, जो पांच दिन से बंद बताई गई। पुलिस को फिजियोथेपिस्ट अमित और डा. वैभव मुद्गल भी नहीं मिल पाए, वे भी घर से फरार हो गए। तीनों आरोपितों के मोबाइल नंबर बंद हैं। पुलिस ने 'अफजल के साथी परवेज और फिरोज हिरासत में ले लिया, जो मरीज पारुल को कार से लेकर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानपुर के आहूजा अस्पताल ले गए थे। जांच में पता चला है कि दिल्ली का डा. अली आपरेशन करता था, जबकि डा. रोहित का काम मरीज को बेहोश करना था। इस टीम में डा. सैफ, अखिलेश और शैलेंद्र के नाम भी सामने आए हैं। अस्पताल में बीते रविवार की रात मुजफ्फरनगर निवासी पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट डा. अली ने सात सदस्यीय टीम के साथ किया था। बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने छह लाख में किडनी बेची थी, लेकिन उसे साढ़े तीन लाख ही मिले थे, जबकि सौदा 60 लाख में होना बताया गया है। आयुष ने स्वयं को देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से एमबीए का छात्र बताया था, लेकिन विश्वविद्यालय के डा. सुभाष गुप्ता ने बताया कि इस नाम-पते का कोई छात्र उनके यहां नहीं है।
किडनी के काले कारोबार में उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में सक्रिय किडनी कांड में आहूजा अस्पताल के संचालक डा. सुरजीत सिंह आहूजा, पत्नी व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कानपुर शाखा की उपाध्यक्ष डा. प्रीति आहूजा व दलाल शिवम अग्रवाल, अस्पताल संचालक रामप्रकाश, राजेश व नरेंद्र सिंह जेल भेजे गए हैं। डा. रोहित, मेरठ के डा. अफजल, डा. अनुराग उर्फ अमित, डा. वैभव मुद्गल की तलाश की जा रही है, जबकि प्रदेश भर में 50 अस्पताल जांच के घेरे में हैं। किडनी बेचने वाले आयुष, उसकी बिहार से आई महिला मित्र व किडनी लेने वाली महिला पारुल के पति विकास तोमर से साक्ष्य मिलने की उम्मीद है। महिला के पति बता सकते हैं कि किडनी कितने रुपये में खरीदने का सौदा हुआ था। पुलिस उनका इंतजार कर रही है। उधर, आहूजा व प्रिया हास्पिटल का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए टीम फ्लाइट से शहर पहुंची थी और फिर सभी दो कारों से आहूजा अस्पताल गए थे। इसमें पांच एक कार व तीन दूसरी कार से थे। ट्रांसप्लांट करने के बाद रात लगभग दो बजे बुक कराई किआ कार से पांच लोग लखनऊ व अर्टिगा कार से तीन लोग गाजियाबाद गए थे। इसकी जानकारी अस्पताल के आसपास लगे कैमरों की जांच में होने पर अर्टिगा का नंबर पता कर उसके चालक से संपर्क किया गया। उसने अस्पताल के पास से तीन मास्क पहने लोगों को लेकर जाने व किराये का आनलाइन भुगतान यूपीआइ से करने की जानकारी दी। इसकी जांच कर कुलदीप के खाते व उसमें दर्ज मोबाइल नंबर को ट्रेस कर उसे व राजेश को दबोचा गया। कुलदीप गाजियाबाद के शांति गोपाल हास्पिटल व राजेश ग्रेटर नोएडा के सर्वोदय में काम करता है। वहीं दूसरी कार में बैठे पांच आरोपितों को रेलबाजार के अजय यादव लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे तक ले गए थे। अजय ने बताया कि वे लोग बातचीत में दमन दीव के ट्रिप की बात कर रहे थे। आरोपितों ने फ्लाइट की भी बुकिंग की थी। UP News