उत्तर प्रदेश में श्रम कानूनों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने राज्य के कारखानों, निर्माण स्थलों और निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने की दिशा में अहम पहल की है।

UP News : उत्तर प्रदेश में श्रम कानूनों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार ने राज्य के कारखानों, निर्माण स्थलों और निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने की दिशा में अहम पहल की है। इसके तहत अब उत्तर प्रदेश में 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ने ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा नियमावली-2026’ का मसौदा जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में अभी तक अलग-अलग रूप में लागू कई पुराने श्रम नियमों की जगह एक समेकित कानून व्यवस्था लागू हो जाएगी। इससे न सिर्फ श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि कारोबारियों के लिए भी नियमों की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।
यह नियमावली उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता-2020 के आधार पर तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मसौदे पर आम लोगों, उद्योग जगत, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। तय समय के बाद मिले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के सभी पात्र प्रतिष्ठानों को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इतना ही नहीं, संस्थानों को अपने रिकॉर्ड और अन्य जरूरी जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट रखनी होगी। यदि किसी प्रकार का बदलाव होता है, तो उसकी सूचना 30 दिनों के भीतर पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। उत्तर प्रदेश में जो प्रतिष्ठान तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण नहीं कराएंगे, उन्हें राहत नहीं मिलेगी। ऐसे मामलों में पंजीकरण शुल्क के साथ 10 प्रतिशत वार्षिक विलंब शुल्क भी देना होगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से श्रम विभाग के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुपालन की निगरानी आसान होगी।
नई नियमावली में उत्तर प्रदेश के उन उद्योगों पर खास फोकस किया गया है, जहां काम के दौरान जोखिम अधिक होता है। ऐसे प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए गए हैं। कार्यस्थल पर लगी मशीनों, उपकरणों और कन्वेयर बेल्ट जैसी व्यवस्थाओं को सुरक्षित बनाना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी होगी, ताकि हादसों की आशंका कम से कम हो।
जो कर्मचारी लगातार चलने वाली मशीनों या कन्वेयर बेल्ट के आसपास काम करते हैं, उनके कार्य समय और मशीनों की गति के निर्धारण के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी होगा। इससे औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियमावली में कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है। प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारियों की वार्षिक मेडिकल जांच कराना अनिवार्य होगा। वहीं, खतरनाक उद्योगों में काम कर रहे कर्मियों के लिए अलग से विशेष स्वास्थ्य परीक्षण का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जिन प्रतिष्ठानों की ऊंचाई पांच मंजिल या 20 मीटर से अधिक है, वहां आपातकालीन योजना तैयार करना और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देना भी अनिवार्य होगा। यह कदम खास तौर पर निर्माण क्षेत्र और ऊंची इमारतों से जुड़े कामों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित इस नई श्रम व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। अब हर कर्मचारी को काम शुरू करने से पहले नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, नियुक्ति के एक महीने के भीतर पहचान पत्र जारी करना भी जरूरी रहेगा। किसी भी प्रकार की दुर्घटना या कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में नियोक्ता को तत्काल ऑनलाइन सूचना देनी होगी। सरकार की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें व्यवहारिक स्तर पर भी लागू किया जाए।
नई नियमावली लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में श्रम कानूनों से जुड़े कई पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से ये नियम शामिल हैं:
सरकार का उद्देश्य अलग-अलग कानूनों की जटिलता कम करके उत्तर प्रदेश में एक अधिक एकीकृत और प्रभावी श्रम ढांचा तैयार करना है।
प्रस्तावित नियमावली के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्रतिष्ठानों से कर्मचारियों की संख्या के आधार पर पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा:
10 से 20 कर्मचारी — 500 रुपये
20 से 100 कर्मचारी — 1000 रुपये
100 से 500 कर्मचारी — 15000 रुपये
500 से 1000 कर्मचारी — 25000 रुपये
1000 से अधिक कर्मचारी — 100000 रुपये UP News