पुरस्कारों की इस सूची में प्रदेश के तौर पर उत्तर प्रदेश का नाम शामिल नहीं है। केवल उत्तर प्रदेश के तीन शहरों को जल शक्ति पुरस्कार देने वाली सूची में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के जिन शहरों को जल शक्ति पुरस्कार देने की सूची में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के उन शहरों में वाराणसी, मिर्जापुर

उत्तर प्रदेश के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। देश भर में चल रहे एक जरूरी काम के मामले में उत्तर प्रदेश फेल प्रदेश साबित हुआ है। भारत सरकार ने हाल ही में जल संरक्षण प्रबंधन के लिए जलशक्ति पुरस्कारों की घोषणा की है। जल शक्ति पुरस्कारों के मामले में उत्तर प्रदेश फेल प्रदेश साबित हुआ है। भारत सरकार द्वारा घोषित किए गए जल शक्ति पुरस्कारों में उत्तर प्रदेश का नाम शामिल नहीं है। उत्तर प्रदेश को लेकर यह गनीमत रही कि उत्तर प्रदेश के 3 शहरों को जल शक्ति पुरस्कारों की श्रेणी में रखा गया है।
आपको बता दें कि देश में जल संरक्षण प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रदेशों को जल शक्ति पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। वर्ष-2025 के लिए भारत सरकार जल शक्ति पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस घोषणा के तहत महाराष्ट्र को प्रथम, गुजरात को द्वितीय तथा हरियाणा प्रदेश को तीसरा स्थान मिला है। पुरस्कारों की इस सूची में प्रदेश के तौर पर उत्तर प्रदेश का नाम शामिल नहीं है। केवल उत्तर प्रदेश के तीन शहरों को जल शक्ति पुरस्कार देने वाली सूची में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के जिन शहरों को जल शक्ति पुरस्कार देने की सूची में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के उन शहरों में वाराणसी, मिर्जापुर तथा जालौन शहर शामिल किए गए हैं। प्रदेश के तौर पर उत्तर प्रदेश का नाम जल शक्ति पुरस्कारों की सूची में दूर-दूर तक नहीं है।
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जल शक्ति पुरस्कार-2025 की विधिवत घोषणा कर दी गयी है। भारत सरकार के प्रवक्ता के अनुसार जल प्रबंधन और जल संचय में श्रेष्ठ काम के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा को पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिला है। 18 नवंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन राज्यों को पुरस्कार देंगी। जल संरक्षण के लिए तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान ने पहले तीन स्थान पाए हैं। इस श्रेणी में चार पुरस्कार उत्तर प्रदेश के जिलों को भी मिले हैं। इसके तहत परियोजनाओं को समय से पूरा करने वाले राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। तेलंगाना ने 5.20 लाख जल संरक्षण परियोजनाओं को पूरा किया। छत्तीसगढ़ ने 4.05 लाख और राजस्थान ने 3.64 लाख जल संरचनाओं के संरक्षण का काम किया। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने कैच द रेन अभियान के तहत भी पुरस्कार पाने वालों के नाम की घोषणा की।
इस पहल हल के तहत राज्यों को 5 क्षेत्रों में विभाजित और जिलों को कम-से-कम 10 हजार कृत्रिम पुनर्भरण और भंडारण संरचना बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के जिलों के लिए यह संख्या तीन हजार है। देश भर के नगर निगमों के लिए संख्या 10 हजार है। इन संरचनाओं में छतों पर वर्षा जल संचयन के साथ झीलों, तालाबों और बावडिय़ों का पुनरुद्धार भी शामिल हैं। शहरी जल संरक्षण प्रयासों को मजबूत कर लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है।