अमेरिका तथा ईरान के युद्ध का सीधा असर उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत पैदा हो गई है। रसोई गैस की किल्लत के कारण उत्तर प्रदेश की अनेक गैस एजेंसी नागरिकों का रैन बसेरा बन गई है।

UP News : अमेरिका तथा ईरान के युद्ध का सीधा असर उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत पैदा हो गई है। रसोई गैस की किल्लत के कारण उत्तर प्रदेश की अनेक गैस एजेंसी नागरिकों का रैन बसेरा बन गई है। गैस एजेंसी के बाहर लाइन लगाने के चक्कर में नागरिक गैस एजेंसी के बाहर मच्छरदानी लगाकर रात गुजार रहे हैं।
अमेरिका तथा ईरान के बीच चल रहा युद्ध उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए मुसीबत बन गया है। घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस (LPG) की कमी के कारण अनेक परिवारों को बिजली के हीटर, अंगीठी अथवा मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी तथा गोबर के उपलों से रोटी बनानी पड़ रही है। रसोई गैस लेने के लिए नागरिकों को गैस एजेंसियों के लगातार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रसोई गैस की यह किल्लत पूरे उत्तर प्रदेश में हर रोज बढ़ती ही जा रही है।
उत्तर प्रदेश के हर छोटे-बड़े शहर में रसोई गैस का संकट पैदा हो गया है। इस संकट को एक उदाहरण से समझना हो तो उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के उदाहरण से समझ सकते हैं। बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्टेशन रोड पर स्थित रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर ग्राहकों ने गैस किल्लत के कारण डेरा डाल दिया है। लोग सिलेंडर प्राप्त करने हेतु रात 10 बजे से ही कतारों में लगकर अपना नंबर सुरक्षित कर रहे हैं। भीषण किल्लत की वजह से एक युवक ने एजेंसी के सामने ही मच्छरदानी लगा ली ताकि वह रात भर सो सके और सुबह सबसे पहले गैस पा सके। नियमित आपूर्ति न होने के कारण स्थानीय निवासियों, बुजुर्गों और महिलाओं को पूरी रात फुटपाथ पर पहरा देना पड़ रहा है। प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग के बीच लोग रात भर जागने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में गैस की किल्लत को दर्शाता हुआ वीडियो भी वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने गैस वितरण व्यवस्था की पोल खोल दी है। रत्नाकर गैस एजेंसी के सामने लोग बिछावन और मच्छरदानी लेकर पहुंच रहे हैं। गैस सिलेंडर न मिलने के डर से उपभोक्ता घर जाने के बजाय फुटपाथ को ही अपना बसेरा बना चुके हैं। भीषण मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए लोग मच्छरदानी लगाकर वहीं सोने को मजबूर हैं ताकि सुबह एजेंसी खुलते ही उन्हें खाली हाथ न लौटना पड़े। UP News