यूपी सरकार के पास उर्दू में एक पत्र है, उसमें लिखा हुआ है कि यह ग्वालियर स्टेट की जमीन है। यह जमीन दतिया के खाते में है लेकिन उस दस्तावेज पर कोई हस्ताक्षर नहीं है। वहीं खसरे के अनुसार जिलाधीश झांसी इस जमीन के प्रबंधक है। यहा जमीन मध्य भारत के लिए दी गई थी।

उत्तर प्रदेश की बड़ी सीमा मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ती है। उत्तर प्रदेश की मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ने वाली सीमा पर इन दिनों एक बड़ा विवाद चल रहा है। उत्तर प्रदेश में उन्नाव रोड तथा ग्वालियर झांसी हाईवे के बीच में अरबों रूपए मूल्य की जमीन पर दोनों ही प्रदेश अपने-अपने दावे कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अधिकारी बोल रहे हैं कि जमीन उत्तर प्रदेश की है। जबकि मध्य प्रदेश के अधिकारी जमीन को अपनी बता रहे हैं। कुल मिलाकर ‘‘तेरी है या मेरी है’’ वाला विवाद छिड़ा हुआ है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के उनाव रोड और ग्वालियर-झांसी हाईवे के बीच में स्थित अरबों की जमीन पर झांसी प्रशासन ने दावा किया है। न तो जमीन बिक पा रही है, न ही उसका सही इस्तेमाल हो रहा है। राज्य बंटवारे के समय ग्वालियर स्टेट के हिस्से में दी गई जमीन झांसी नगर निगम सीमा क्षेत्र में है जिसे स्थानीय प्रशासन नजूल की संपत्ति होने का दावा करता है। उधर, दतिया लोक निर्माण विभाग का दावा है कि यह जमीन उनके दस्तावेज में परान कोठी के नाम से दर्ज है। इस बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण भी हो रहा है। हाल में इसकी चर्चा मुख्य सचिव स्तर पर हुई है, पर कोई नतीजा सामने नहीं आया है। ग्वालियर झांसी हाईवे किनारे रेलवे ओवरब्रिज के पास 34 बीघा जमीन पर फिलहाल मध्य प्रदेश के दतिया जिले के लोक निर्माण विभाग का कब्जा है, लेकिन झांसी जिला प्रशासन भी इस पर अपना दावा ठोंक रहा है।
उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश की सीमा पर मौजूद करीब 350 करोड़ रुपये कीमत की इस जमीन के कब्जे को लेकर दोनों प्रदेश के शीर्ष अधिकारी मंथन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते इस पर चर्चा करने के लिए मप्र के लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त प्रमुख सचिव व दतिया के ईई आदित्य सोनी लखनऊ पहुंचे थे, लेकिन कोई निर्णय सामने नहीं आया। इसके चलते इस बेशकीमती जमीन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि राज्य चंटवारे के समय यह जमीन ग्वालियर स्टेट के हिस्से में आई थी। मकसद बताया था कि यहां आने वाले अतिथि बने रेस्ट हाउस में ठहरे। तब से मध्य प्रदेश सरकार इस पर अपना कब्जा मान रही है। यूपी सरकार के पास उर्दू में एक पत्र है, उसमें लिखा हुआ है कि यह ग्वालियर स्टेट की जमीन है। यह जमीन दतिया के खाते में है लेकिन उस दस्तावेज पर कोई हस्ताक्षर नहीं है। वहीं खसरे के अनुसार जिलाधीश झांसी इस जमीन के प्रबंधक है। यहा जमीन मध्य भारत के लिए दी गई थी।
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की झाँसी तहसील की तरफ से बड़ा दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की तरफ से सन् 1985 में झांसी परगना के तहसीलदार ने एक पत्र जारी किया था। है। लिहाजा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। केवल रेस्ट हाउस की जगह उनके लिए थी। बाकी जमीन पर उन्होंने अवैध रूप से निर्माण कर लिया। जबकि यह उत्तर प्रदेश की नजूल की संपत्ति हैं। तहसीलदार की आख्या बताती है कि यह जमीन उत्तर प्रदेश की है। झासी सदर के एसडीएम गोपेश तिवारी का कहना है कि मामला दो राज्यों के बीच का है। लिहाजा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।