उत्तर प्रदेश सरकार और मेलाधिकारी प्रशासन की देखरेख में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि महाकुंभ के अमृत स्नान की छवि को भी आगे बढ़ाएगा। आस्था से लबरेज यह यात्रा महाकुंभ में होने वाले अमृत स्नान की झलक पेश करेगी। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश–विदेश

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले को इस बार एक नई धार्मिक पहचान मिलने जा रही है। महाकुंभ की तरह ही 2026 के माघ मेले में पहली बार ‘पर्व स्नान’ का आयोजन होगा, जिसकी तैयारियाँ संगम तट पर तेज हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार और मेलाधिकारी प्रशासन की देखरेख में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि महाकुंभ के अमृत स्नान की छवि को भी आगे बढ़ाएगा।
उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर प्रयागराज में माघ मेले के दौरान अब तक पारंपरिक स्नान पर्व ही मुख्य आकर्षण रहे हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बदली-बदली नजर आएगी। अमृत स्नान की तर्ज पर ‘पर्व स्नान’ का अलग से आयोजन किया जाएगा, जिसमें जगद्गुरु, रामानंदाचार्य, महामंडलेश्वर, द्वाराचार्य, संत, महंत और श्रीमहंत शाही स्नान जैसी भव्य शोभायात्रा के साथ संगम की ओर प्रस्थान करेंगे। आस्था से लबरेज यह यात्रा महाकुंभ में होने वाले अमृत स्नान की झलक पेश करेगी। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश–विदेश से लाखों श्रद्धालु इस नए स्वरूप के साक्षी बनेंगे।
उत्तर प्रदेश के धार्मिक नक्शे पर प्रयागराज और काशी (वाराणसी) दोनों की अपनी–अपनी अलग चमक है। माघ मेला 2026 में इन दोनों की आध्यात्मिक ऊर्जा एक मंच पर दिखाई देगी। बनारस के मठ, मंदिर, आश्रम और अखाड़ों के प्रतिनिधि संगम तट पर अपने–अपने शिविर लगाएंगे। शंकराचार्य परंपरा से जुड़े शिविर भी मेले की शोभा बढ़ाएंगे। संत समाज की तैयारियां जोरों पर हैं। खाक चौक के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा ने बताया कि महाकुंभ के बाद लगने वाला यह माघ मेला उत्तर प्रदेश के धार्मिक कैलेंडर का अगला बड़ा पड़ाव है। इस बार मेले के विस्तार के लिए 300 बीघा जमीन आवंटित करने की मांग प्रशासन के सामने रखी गई है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अनुसार माघ मेला क्षेत्र में भूमि आवंटन की प्रक्रिया 4 और 5 दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। अलग–अलग राज्यों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से आ रहे संत–महात्माओं, आश्रमों और संगठनों के शिविरों के लिए ज़मीन चिह्नित की जा रही है। सतुआ बाबा का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से भी मेले को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियों की गति बढ़ा दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं को महाकुंभ जैसा दिव्य और सुरक्षित वातावरण मिल सके। महाकुंभ के अमृत स्नान में शामिल न हो पाए श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व स्नान विशेष अवसर माना जा रहा है। मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी पर होने वाले पर्व स्नान को उसी तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जैसा महाकुंभ के अमृत स्नान में देखा गया था। सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि, साधु–संत और धर्माचार्य संयुक्त रूप से शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे। उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों से भी बड़ी संख्या में साधु–संतों के जत्थे प्रयागराज पहुंचेंगे।
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मौसमी धार्मिक आयोजनों में शुमार प्रयागराज माघ मेला 2026 इस बार और भी व्यवस्थित धार्मिक कैलेंडर के साथ सामने आ रहा है। मेला नगरी का शुभारंभ 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा स्नान से होगा, जब संगम तट पर कल्पवासियों, साधु–संतों और श्रद्धालुओं की अस्थायी लेकिन भव्य बसाहट शुरू हो जाएगी। करीब डेढ़ महीने तक संगम क्षेत्र एक ऐसी आध्यात्मिक नगरी में बदल जाएगा, जहाँ हर कुछ दिन पर पड़ने वाला स्नान पर्व उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश से आए श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनेगा।
माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व (प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
3 जनवरी 2026 – पौष पूर्णिमा स्नान - माघ मेले की आधिकारिक शुरुआत, संगम तट पर कल्पवासियों के डेरा डालने और धार्मिक अनुष्ठानों के सिलसिले की औपचारिक शुरुआत इसी दिन से होगी।
14 जनवरी 2026 – मकर संक्रांति स्नान - सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश के अवसर पर पुण्य स्नान, जिसका उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के धार्मिक परंपरा में खास स्थान है।
18 जनवरी 2026 – मौनी अमावस्या (पर्व स्नान) - माघ मेला 2026 का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान दिवस, अमृत स्नान की तर्ज पर भव्य ‘पर्व स्नान’ और शोभायात्रा का मुख्य केंद्र, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के जुड़ने की उम्मीद है।
23 जनवरी 2026 – वसंत पंचमी (पर्व स्नान) - विद्या और सरस्वती आराधना के साथ जुड़ा यह स्नान पर्व, नए ‘पर्व स्नान’ स्वरूप का दूसरा बड़ा मौका होगा। इस दिन संगम तट पीले वस्त्रों और भक्ति–भाव से सराबोर रहेगा।
1 फरवरी 2026 – माघी पूर्णिमा स्नान - कल्पवास की अवधि अपने अंतिम चरण में प्रवेश करती है। दूर–दराज़ से आए श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के लिए यह दिन साधना, दान और स्नान का विशेष संयोग लेकर आएगा।
15 फरवरी 2026 – महाशिवरात्रि स्नान - माघ मेला 2026 का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व। शिवभक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण यह तिथि, जब उत्तर प्रदेश के तमाम शिवालयों और आश्रमों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचने की संभावना है।