उत्तर प्रदेश के महोबा में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला उस वक्त रुक गया, जब उन्हीं की पार्टी के चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत अपने समर्थकों और ग्राम प्रधानों के साथ सड़क पर उतर आए। मंत्री एक कार्यक्रम से लौट रहे थे और तभी रास्ते में अचानक भीड़, नारेबाजी और तनाव ने माहौल गरमा दिया।

UP News : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की राजनीति में शुक्रवार का दिन सिर्फ एक विरोध-प्रदर्शन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा सत्ता के भीतर बढ़ती बेचैनी का साफ संकेत बनकर सामने आया। उत्तर प्रदेश के महोबा में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला उस वक्त रुक गया, जब उन्हीं की पार्टी के चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत अपने समर्थकों और ग्राम प्रधानों के साथ सड़क पर उतर आए। मंत्री एक कार्यक्रम से लौट रहे थे और तभी रास्ते में अचानक भीड़, नारेबाजी और तनाव ने माहौल गरमा दिया। मौके पर मौजूद पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो धक्का-मुक्की तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
विधायक पक्ष का आरोप है कि जल जीवन मिशन के काम ने उनके क्षेत्र में विकास के बजाय परेशानी बढ़ा दी। सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया, मगर महीनों बाद भी न तो घरों में पानी पहुंचा और न ही उखड़ी सड़कें दोबारा दुरुस्त हुईं। उनका कहना है कि जब स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायतें दर्ज कराईं, तो मौके पर समाधान कराने के बजाय फाइलों में ही निस्तारण दिखाकर रिपोर्टें लगा दी गईं। यही वजह रही कि गुस्सा अंदर ही अंदर सुलगता रहा और फिर महोबा में वही नाराज़गी मंत्री के काफिले को रोकने तक जा पहुंची, जिससे हालात असाधारण बन गए।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्री जैसे ही कार्यक्रम स्थल से बाहर निकले, चरखारी विधायक ने ग्राम प्रधानों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका काफिला बीच रास्ते में रोक दिया। मौके पर करीब 50 ग्राम प्रधानों के साथ सैकड़ों समर्थक जुटे बताए गए, जिससे माहौल तेजी से तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख मंत्री को खुद आगे आकर मोर्चा संभालना पड़ा उन्होंने विधायक को अपनी गाड़ी में बैठाकर बातचीत शुरू की और फिर दोनों सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चर्चा चली।
चरखारी सीट से विधायक बृजभूषण राजपूत की पहचान उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में एक एक्टिव और तेज-तर्रार जनप्रतिनिधि के रूप में रही है। इलाके में उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता है, जो मुद्दों पर सीधे टकराव की भाषा में उतरने से भी नहीं हिचकते। उनकी राजनीति के पीछे परिवार की सियासी विरासत का असर भी अक्सर चर्चा में रहता है। उनके पिता गंगा चरण राजपूत ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्षों तक अलग-अलग दलों के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और उनके आक्रामक अंदाज से जुड़े कई किस्से आज भी बुंदेलखंड की चौपालों में दोहराए जाते हैं। यही कारण है कि स्थानीय राजनीति में बृजभूषण राजपूत को लोग केवल एक नेता नहीं, बल्कि विरासत की उसी धार के विस्तार के तौर पर भी देखते हैं।
विधायक बृजभूषण राजपूत के पिता गंगा चरण राजपूत से जुड़ा 2004 का एक चर्चित वाकया एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत में उछाला जा रहा है। तब देश की राजनीति सोनिया गांधी के नाम पर उबाल पर थी और दिल्ली में कांग्रेस दफ्तर के बाहर उनका वह दृश्य कैमरों में कैद होकर खूब चर्चा में रहा था। अब उसी पुराने प्रसंग का हवाला देकर विपक्ष महोबा की ताजा घटना को बीजेपी के भीतर अनुशासन बनाम नाराजगी की कहानी के तौर पर पेश कर रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी विधायक ने अपने ही मंत्री को बंधक बना लिया। UP News