प्रस्तावित स्ट्रक्चर में कुल 15 हजार लोगों को एक साथ रखने की क्षमता दर्शाई गई है। मंडलायुक्त की ओर से यह मॉडल उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया है और गृह विभाग को इसके विस्तृत परीक्षण व समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध घुसपैठ और बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे विदेशी नागरिकों की निगरानी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित डिटेंशन सेंटर का पहला विस्तृत मॉडल तैयार कर लिया गया है। इस मॉडल के मुताबिक, डिटेंशन सेंटर को 15 हजार लोगों की क्षमता वाला हाई–सिक्योरिटी कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें आधुनिक तकनीक और त्रिस्तरीय सुरक्षा तंत्र उत्तर प्रदेश की कानून–व्यवस्था को और मजबूत करने पर फोकस करेगा।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मंडल स्तर पर तैयार किए गए इस डिटेंशन सेंटर मॉडल में रहने, निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी तमाम ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार किया गया है। प्रस्तावित स्ट्रक्चर में कुल 15 हजार लोगों को एक साथ रखने की क्षमता दर्शाई गई है। मंडलायुक्त की ओर से यह मॉडल उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया है और गृह विभाग को इसके विस्तृत परीक्षण व समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
मॉडल के मुताबिक, डिटेंशन सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था को उत्तर प्रदेश के संवेदनशील संस्थानों की तर्ज पर त्रिस्तरीय बनाया जाएगा।
डिटेंशन सेंटर में एंट्री और मूवमेंट के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम को अनिवार्य रखने का प्रस्ताव है। फेस रिकॉग्निशन और थंब इम्प्रेशन के जरिए ही किसी व्यक्ति को अधिकृत प्रवेश दिया जाएगा। कंट्रोल रूम से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही गेट खुल सके, ऐसी व्यवस्था भी मॉडल में जोड़ी गई है। यह पूरी प्रणाली उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग की दिशा में एक अहम प्रयोग मानी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मंडलायुक्त ने डिटेंशन सेंटर में केंद्रीय सुरक्षा बलों की स्थायी तैनाती का सुझाव दिया है। प्रारंभिक मॉडल के अनुसार, कम से कम 50 केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव है, जो स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय में चौबीसों घंटे निगरानी रखेंगे। मॉडल में पुरुष और महिला निरुद्ध व्यक्तियों को एक ही परिसर में, लेकिन अलग–अलग सुरक्षित ब्लॉकों में रखने की व्यवस्था दिखाई गई है। आवास, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मामले में जेंडर–सेंसिटिव प्लानिंग पर जोर दिया गया है, ताकि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के अनुरूप मानवाधिकार संबंधी मानकों का भी पालन किया जा सके।
गृह विभाग द्वारा इस डेमो मॉडल की जांच और मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश के 17 नगर निकाय क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से डिटेंशन सेंटर विकसित करने की रूपरेखा पर काम किया जाएगा। जहां–जहां अवैध प्रवासियों की संख्या ज्यादा पाई जाएगी, वहां एक से अधिक डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाने की संभावना भी मॉडल में दर्ज की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरुआत होने वाला यह मॉडल आगे पूरे प्रदेश के लिए मानक (स्टैंडर्ड प्रोटोटाइप) बन सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि ऐसी व्यवस्था से उत्तर प्रदेश में अवैध प्रवास से जुड़े मामलों की पहचान, रिकॉर्डिंग और निगरानी आसान होगी, साथ ही समग्र सुरक्षा प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी। UP News