मुलायम परिवार में बड़ी हलचल, अपर्णा यादव से तलाक लेंगे प्रतीक यादव

वहीं, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेता अपर्णा यादव की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे मामले को लेकर असमंजस और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं।

अपर्णा यादव-प्रतीक यादव
अपर्णा यादव-प्रतीक यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 01:36 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली माने जाने वाले यादव परिवार से जुड़ी एक निजी खबर ने सोमवार को नई हलचल पैदा कर दीभाजपा नेता अपर्णा यादव और उनके पति प्रतीक यादव के वैवाहिक रिश्ते को लेकर तलाक की अटकलें तेज हो गई हैं। इसकी वजह प्रतीक यादव का सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने अलगाव की ओर बढ़ने का संकेत देते हुए अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर फिलहाल अपर्णा यादव की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी चर्चा

सोमवार सुबह प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डालकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव से जल्द अलग होने यानी तलाक की प्रक्रिया शुरू करनेका संकेत दिया और अपनी बात बेहद तीखे शब्दों में रखी। प्रतीक यादव का कहना है कि वह इस समय मानसिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे हैं और उनके पारिवारिक रिश्तों पर गहरा असर पड़ा है। हालांकि, यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया पर किए गए दावों तक सीमित है,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक दस्तावेजी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

आरोपों में क्या कहा गया?

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के बीच मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव पर पारिवारिक मर्यादाओं को नजरअंदाज करने और परिवार की एकजुटता को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन्हीं आरोपों को आधार बनाते हुए उन्होंने रिश्ते को कानूनी मोड़ देने यानी तलाक की प्रक्रिया की ओर बढ़ने का संकेत दिया है। वहीं, इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेता अपर्णा यादव की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे मामले को लेकर असमंजस और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं।

राजनीति और वैचारिक दूरी भी बनी वजह?

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मामला सिर्फ घरेलू मतभेद तक सीमित नहीं हो सकता। यादव परिवार की पहचान लंबे समय से समाजवादी राजनीति से जुड़ी रही है, जबकि अपर्णा यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर भाजपा का दामन थाम लिया था। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक और वैचारिक मतभेद भी रिश्तों में तनाव की एक वजह बन सकते हैं हालांकि इसे लेकर कोई ठोस पुष्टि अभी नहीं है। अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की शादी 2011 में हुई थी। कहा जाता है कि दोनों करीब 10 साल तक रिलेशनशिप में रहे, फिर विवाहबंधन में बंधे। प्रतीक यादव को राजनीति से दूर रहने वाला व्यवसायी बताया जाता है। इतने लंबे रिश्ते के बाद तलाक की खबरों ने समर्थकों और यूपी की सियासत पर नजर रखने वालों को चौंका दिया है।

कानूनी पुष्टि का इंतजार

फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम माने जाने वाले यादव परिवार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई भी बड़ा चेहरा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। न कैमरे पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है, न ही तलाक की अर्जी कोर्ट में दाखिल होने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट, मीडिया रिपोर्टों और चर्चाओं के दायरे में ही है कानूनी या दस्तावेजी तस्वीर साफ होने का इंतजार अभी बाकी है। UP News

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पूर्वांचल में पीली वर्दी का संदेश: राजभर ने युवाओं को जोड़ा, सोंटा भी सौंपा

कार्यक्रम में ढाई हजार से ज्यादा युवाओं को संगठन से जोड़ा गया और उन्हें पीली वर्दी के साथ प्रशिक्षण के लिए पीला डंडा/सोंटा भी वितरित किया गया। आयोजन के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

ओम प्रकाश राजभर
ओम प्रकाश राजभर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पीला रंग चर्चा के केंद्र में है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने आजमगढ़ के अतरौलिया क्षेत्र के खजुरी गांव में आयोजित कार्यक्रम के जरिए अपनी राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के विस्तार का बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में ढाई हजार से ज्यादा युवाओं को संगठन से जोड़ा गया और उन्हें पीली वर्दी के साथ प्रशिक्षण के लिए पीला डंडा/सोंटा भी वितरित किया गया। आयोजन के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है।

पीला कवच के नाम पर अनुशासन का संदेश

खजुरी में हुए आयोजन का माहौल किसी कैंप की तरह नजर आया चारों ओर पीला रंग, एक जैसा ड्रेस कोड और कतारबद्ध युवा। मंच से राजभर ने इस पहल को अनुशासन, जागरूकता और संगठन शक्ति का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश के गांव-देहात में युवाओं को संगठित करना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और समाज में जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना ही इस अभियान की दिशा है। पीली वर्दी के साथ डंडा बांटने पर सवाल उठे तो मंत्री राजभर ने साफ शब्दों में कहा कि इसे हथियार की तरह देखना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि यह पारंपरिक प्रशिक्षण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को शारीरिक रूप से सक्षम और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। राजभर ने यह भी कहा कि लाठी-डंडा हमारी परंपरा में आत्मरक्षा और अनुशासन का प्रतीक रहा है, इसलिए इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

यूपी की सियासी बिसात पर युवा लामबंदी का दांव

राजनीतिक हलकों में इस कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश खासतौर पर पूर्वांचल में पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। ढाई हजार से ज्यादा युवाओं को एक ही ड्रेस कोड और प्रशिक्षण उपकरण देना, संगठन की एकजुटता और मैदान में सक्रियता का संकेत माना जा रहा है। मंच से राजभर ने दावा किया कि यह “सेना” किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि यूपी के गरीब, वंचित और शोषित वर्ग की आवाज बनने के लिए तैयार की जा रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों और महाराजा सुहेलदेव के विचारों का प्रचार करें।

बढ़ सकती है सियासी गर्मी

डंडा/सोंटा वितरण के बाद इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद भी खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे लेकर हमलावर है और सवाल उठा रहा है कि एक संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाला मंत्री खुले मंच से इस तरह सोंटा बांटकर कहीं ऐसा संदेश तो नहीं दे रहा, जिसे गलत अर्थों में लिया जाए। दूसरी तरफ, राजभर के समर्थक इसे पूरी तरह संगठन और प्रशिक्षण से जुड़ी पहल बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह पीली वर्दी और पीला डंडा वाला अभियान सिर्फ संगठन विस्तार बनकर रहता है या आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के सियासी तापमान को और बढ़ा देता है। UP News

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बरेली में पैसे मांगने पर दलित युवक से कथित बर्बरता, FIR दर्ज

सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और एससी/एसटी एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य तथ्यों की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है।

दलित युवक के साथ कथित अत्याचार का मामला
दलित युवक के साथ कथित अत्याचार का मामला
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 10:10 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक दलित युवक के साथ कथित तौर पर सिर्फ इसलिए बर्बरता की गई, क्योंकि उसने उधार दिए गए पैसे वापस मांग लिए थे। पीड़ित के मुताबिक दबंगों ने उसे बेरहमी से पीटा, फिर जबरन सिर मुंडवाया, मूंछ और भौंह के बाल काटे, और चेहरे पर कीचड़ पोतकर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और एससी/एसटी एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य तथ्यों की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है।

उधार के पैसे मांगने पर बढ़ा विवाद

सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित युवक की पहचान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के गरसौली गांव (बहेड़ी तहसील) निवासी पप्पू दिवाकर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह इन दिनों नवाबगंज क्षेत्र के गेलटांडा गांव में रह रहा था। पप्पू का आरोप है कि कुछ समय पहले गांव के चंद्रसेन ने ट्रैक्टर खरीदने के नाम पर उससे करीब 4.5 लाख रुपये उधार लिए थे। लेकिन तय वक्त गुजरने के बावजूद रकम नहीं लौटाई गई। जब पप्पू ने बार-बार अपने पैसे वापस मांगे, तो इसी मांग ने विवाद को हवा दे दी और मामला तनावपूर्ण टकराव में बदलता चला गया।

पैसे मांगने पर कथित तौर पर अमानवीय सलूक

पीड़ित का कहना है कि उधार की रकम वापस मांगना उसके लिए सजा बन गया। आरोप है कि उत्तर प्रदेश के बरेली में रुपये मांगने से खफा होकर चंद्रसेन, उसका बेटा पप्पू और गोधनलाल चार–पांच साथियों के साथ उस पर टूट पड़े और बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित के मुताबिक, हमले के दौरान उसके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और गांव वालों के सामने उसे जानबूझकर अपमानित किया गया। युवक का दावा है कि दबंगों ने जबरन सिर मुंडवाया, फिर कैंची से मूंछ और भौंह के बाल काटे, और अंत में चेहरे पर कीचड़ पोतकर सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत किया। पीड़ित का यह भी आरोप है कि घटना के दौरान उसे जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे वह दहशत में है।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

घटना के बाद घबराए और सहमे पप्पू दिवाकर ने शनिवार को नवाबगंज थाने पहुंचकर लिखित तहरीर देकर पूरी आपबीती दर्ज कराई। तहरीर मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए तीन नामजद आरोपियों के साथ चार–पांच अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बरेली के एसपी मुकेशचंद मिश्रा के मुताबिक, शिकायत के आधार पर एससी/एसटी एक्ट समेत संबंधित धाराओं में केस पंजीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है, और अगर घटना से जुड़ा कोई वीडियो/फुटेज सामने आता है तो उसे ठोस साक्ष्य के तौर पर विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे कड़ी कार्रवाई होगी। UP News

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