फाइलों में अटककर महीनों तक लटकने वाली परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी दिलाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में विभागीय मंत्रियों की वित्तीय मंजूरी सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये करने के निर्देश दिए गए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय स्वीकृति व्यवस्था में बड़ा और निर्णायक बदलाव सुझाया है। फाइलों में अटककर महीनों तक लटकने वाली परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी दिलाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में विभागीय मंत्रियों की वित्तीय मंजूरी सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सड़क, सरकारी भवन, जलापूर्ति, सीवर, पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं समय पर हरी झंडी पा सकेंगी और निर्माण कार्यों की गति सीधे जमीन पर दिखेगी। नए ढांचे के तहत 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को विभागीय मंत्री, 50 से 150 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को वित्त मंत्री, जबकि 150 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मुख्यमंत्री स्तर पर मंजूरी दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश में योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरशाही को साफ संदेश दिया है कि अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें जो विभाग समयसीमा तोड़ेगा, उसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजी जाएगी। वहीं वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए यह भी तय किया गया है कि यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होती है, तो संबंधित विभाग को ठोस कारणों के साथ दोबारा अनुमोदन लेना होगा। लखनऊ में शुक्रवार को हुई वित्त विभाग की हाई-लेवल समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के वित्तीय सिस्टम को “टॉप गियर” में लाने का रोडमैप साफ कर दिया। बैठक में UP की राजकोषीय स्थिति, बजट मैनेजमेंट, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की फंडिंग व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन प्रणाली और डिजिटल फाइनेंस सुधारों की प्रगति को बारीकी से परखा गया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि लक्ष्य केवल खर्च करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को पारदर्शी, मजबूत और रिजल्ट-ओरिएंटेड वित्तीय प्रबंधन का मॉडल राज्य बनाना है।
उत्तर प्रदेश में वित्तीय अनुशासन और कल्याणकारी भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो अहम दिशानिर्देश जारी किए हैं। पहला, केंद्र की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में राज्य गारंटी पॉलिसी लागू करने की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि परियोजनाओं की वित्तीय जिम्मेदारियों और संभावित जोखिमों का समय रहते सटीक आकलन हो सके और सिस्टम अधिक व्यवस्थित बने। दूसरा, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की आशा बहनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं समेत अन्य अल्प-वेतनभोगी कर्मियों का मानदेय हर महीने तय तारीख पर सीधे बैंक खातों में पहुंचे इसमें किसी भी स्तर पर देरी स्वीकार नहीं होगी। जिन योजनाओं में केंद्रांश मिलता है, वहां राज्य अपने हिस्से का भुगतान समय पर जारी करे, ताकि कर्मियों को आर्थिक असुविधा न झेलनी पड़े। मुख्यमंत्री ने यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कराने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में रखे गए आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर एक मजबूत तस्वीर पेश की। बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का पूंजीगत व्यय 1,10,555 करोड़ रुपये रहा, जिसे देश में सबसे अधिक बताया गया। खास बात यह रही कि राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे भी अधिक रकम पूंजीगत कार्यों पर खर्च करने का दावा किया गया इसे वित्तीय अनुशासन का बड़ा संकेत माना गया। कुल व्यय का 9.39% हिस्सा निवेश पर खर्च कर उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और ऋण/जीएसडीपी अनुपात को FRBM मानकों के अनुरूप बताया गया। आगे यह भी बताया गया कि वर्ष 2024-25 में UP की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27% तक आ गईं। नीति आयोग के मुताबिक कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में उत्तर प्रदेश का स्कोर 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हुआ और राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में शीर्ष पर रहा। वहीं RBI रिपोर्ट के हवाले से उत्तर प्रदेश के अपने कर राजस्व की राष्ट्रीय हिस्सेदारी 11.6% बताई गई, जिससे राज्य को देश में दूसरे स्थान पर बताया गया।
वित्त विभाग ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बजट और कोषागार व्यवस्था को डिजिटल रीढ़ देने की दिशा में तेज कदम बढ़ाए हैं। उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन बजट मॉड्यूल, वेंडर मैनेजमेंट सिस्टम, साइबर ट्रेजरी, पूरी तरह ऑनलाइन बिल प्रेषण, जीपीएफ अनियमितताओं पर नियंत्रण, वेतन बिलों का एजी को ऑनलाइन भेजना और डिजिलॉकर पर जीपीएफ स्लिप उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती दी गई है। विभाग के मुताबिक, इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रियाओं को तेज़ करने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना भी है। साथ ही यह भी बताया गया कि साइबर ट्रेजरी के जरिए खातों का पूर्ण पेपरलेस प्रेषण करने का काम तेज़ी से चल रहा है और अप्रैल 2026 तक इसे पूरी तरह पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने शासकीय भवनों के अनुरक्षण को लेकर कहा कि अनुबंधों में एकरूपता नहीं है। इसलिए सड़क निर्माण की तरह नए भवनों में 5 साल का भुगतान-आधारित अनुरक्षण अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। पुराने भवनों के लिए कॉर्पस फंड बनाने की जरूरत भी बताई गई। निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए गए कि भवन, सड़क, सेतु, सीवर लाइन और जलापूर्ति पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट आईआईटी, एनआईटी और राज्य/सरकारी तकनीकी संस्थानों से कराया जाए। UP News