इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी विकास को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति को नई धार दी है। संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश में इस साल हर महीने किसी न किसी मेगा प्रोजेक्ट के शिलान्यास या लोकार्पण, बड़े निवेश आयोजनों और विकास कार्यक्रमों की श्रृंखला को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब 2027 की चुनावी धड़कन तेज होती दिख रही है। एक तरफ चुनाव आयोग प्रदेशभर में मतदाता सूची को अपडेट और मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल बूथ स्तर तक अपनी ग्राउंड स्ट्रेंथ कसने में लगे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी विकास को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति को नई धार दी है। संकेत हैं कि उत्तर प्रदेश में इस साल हर महीने किसी न किसी मेगा प्रोजेक्ट के शिलान्यास या लोकार्पण, बड़े निवेश आयोजनों और विकास कार्यक्रमों की श्रृंखला को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार-संगठन के भीतर यह संदेश भी साफ है कि इन मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के जरिए डबल इंजन की रफ्तार को उत्तर प्रदेश की जनता के सामने बार-बार रखा जाएगा। बीते तीन महीनों में उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से बड़े कार्यक्रमों का सिलसिला बढ़ा है, उससे यह माना जा रहा है कि केंद्र और प्रदेश नेतृत्व अब इस अभियान को पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध से बुंदेलखंड तक फैलाकर विकास को चुनावी नैरेटिव की सबसे मजबूत धुरी बनाने की तैयारी में है।
पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश के बड़े कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री की सक्रियता बढ़ी है। लखनऊ, वाराणसी, नोएडा और मेरठ जैसे शहरों से जुड़े आयोजनों में परियोजनाओं के उद्घाटन/घोषणाओं के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी समानांतर रूप से नजर आया। योगी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख और विपक्ष पर तीखे हमले—दोनों चीजें एक ही मंच पर देखने को मिलीं। सरकारी रणनीति का संकेत यही है कि विकास कार्यों को “इवेंट-ड्रिवन” मॉडल में बदला जाए जहां हर बड़े लोकार्पण के साथ सरकार अपने कामकाज का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखे और चुनाव से पहले पूरे उत्तर प्रदेश में यह संदेश बार-बार दोहराया जाए कि “वादे नहीं, काम दिख रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जो परियोजनाएं जिले, प्रदेश या राष्ट्रीय महत्व की हैं और अंतिम चरण में चल रही हैं, उन्हें तेजी से पूरा करने पर फोकस बढ़ गया है। यानी उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन बड़े प्रोजेक्ट्स को फिनिशिंग टच देकर समयबद्ध तरीके से जनता के लिए खोलने की तैयारी है ताकि आने वाले महीनों में लोकार्पणों का सिलसिला बना रहे।
सरकार के इस साल के एजेंडे में कुछ परियोजनाएं ऐसी हैं जिन्हें विकास का पोस्टर-प्रोजेक्ट माना जा रहा है यानी वही काम, जिन्हें दिखाकर सरकार अपने कामकाज की रफ्तार और दिशा दोनों का संदेश देना चाहती है। सूची में सबसे अहम नाम गंगा एक्सप्रेसवे का है, जिसे उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी का नया मेरुदंड बताकर आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं नोएडा के जेवर में आकार ले रहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और निवेश के नए द्वार से जोड़ने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है और इसके संचालन को लेकर तैयारियां निर्णायक मोड़ पर हैं। इसके साथ लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे को भी तेजी से जनता के लिए खोलने की तैयारी चल रही है, ताकि राजधानी और औद्योगिक केंद्र के बीच आवाजाही का समय घटे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिले। दूसरी तरफ निवेश के मोर्चे पर इन्वेस्ट यूपी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी को सरकार बड़े “एक्शन-शोकेस” की तरह पेश करने की तैयारी में है
सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रमों का खाका इस तरह तैयार किया जा रहा है कि केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही विकास आयोजनों के जरिए पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक मौजूदगी दर्ज करा दे। इसके साथ ही प्रभारी मंत्रियों के जरिए जिला स्तर के विकास कार्यों की सूची भी तैयार कराई जा रही है ताकि चुनावी मंच पर नए वादों की जगह, पूरे हुए कामों और चल रही परियोजनाओं को जनता के सामने रखा जा सके। सरकार के भीतर यह भी चर्चा है कि 2022 में “सरकार-संगठन” की ऐसी रणनीति का फायदा मिला था, और अब 2027 में उसी मॉडल को बड़े पैमाने पर दोहराने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस महीने वाराणसी दौरा प्रस्तावित माना जा रहा है, जहां रोप-वे समेत अन्य बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी मिल सकती है। उधर, गंगा एक्सप्रेसवे का काम भी अंतिम चरण में बताया जा रहा है और अगले महीने तक लोकार्पण की तैयारी को गति देने के संकेत हैं। वहीं, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर परिचालन शुरू कराने की प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने पर काम जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी इस ओर संकेत दे चुके हैं कि एयरपोर्ट के लोकार्पण में प्रधानमंत्री की भूमिका तय की जा सकती है। सरकारी तैयारी के मुताबिक लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे को भी अगले महीने तक शुरू करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में घोषित 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए इन्वेस्ट यूपी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का प्लान भी एजेंडे में है। संभावना जताई जा रही है कि इस कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी शामिल हो सकते हैं। UP News