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लखनऊ मेट्रो का पहला चरण पूरी तरह चालू है और अब फेज-1B को भी केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस फेज में 11.16 किमी का नया मार्ग बनेगा जो चारबाग से वसंत कुंज तक फैलेगा। इसमें 12 स्टेशन होंगे जिनमें से 7 भूमिगत होंगे।

उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ और वाराणसी जैसे शहर अब मेट्रो और आधुनिक रैपिड रेल परियोजनाओं की वजह से स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ रहे हैं। ये परियोजनाएं सिर्फ यात्रा को आसान नहीं बना रहीं बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी नई दिशा दे रही हैं।
लखनऊ मेट्रो का पहला चरण पूरी तरह चालू है और अब फेज-1B को भी केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस फेज में 11.16 किमी का नया मार्ग बनेगा जो चारबाग से वसंत कुंज तक फैलेगा। इसमें 12 स्टेशन होंगे जिनमें से 7 भूमिगत होंगे। यह मार्ग शहर के ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे- चौक, अमीनाबाद और यहियागंज को सीधे मेट्रो से जोड़ेगा। इससे ट्रैफिक और प्रदूषण कम होगा साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
कानपुर मेट्रो ने तेजी से काम कर एक मिसाल कायम की है। इसका पहला सेक्शन IIT से मोतीझील तक दिसंबर 2021 में शुरू हुआ और अब तक नेटवर्क 15 किमी से ज़्यादा फैल चुका है। नया भूमिगत हिस्सा अप्रैल 2025 में चालू हुआ है और दूसरे कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है। पूरा प्रोजेक्ट 2026 तक पूरी तरह चालू हो सकता है। यह मेट्रो छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक यात्रियों के लिए वरदान साबित हो रही है।
ताजमहल और आगरा किले जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों वाला शहर अब आधुनिक मेट्रो नेटवर्क से जुड़ रहा है। आगरा मेट्रो का पहला सेक्शन 6 किमी लंबा है जिसमें 6 स्टेशन हैं, और इसका उद्घाटन मार्च 2024 में हुआ। बाकी दो कॉरिडोरों पर काम तेजी से चल रहा है। पूरा नेटवर्क 2026 तक तैयार होने का लक्ष्य है। इससे पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को सफर में बड़ी राहत मिलेगी।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) देश का पहला हाई-स्पीड कॉरिडोर है जो दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को जोड़ता है। इसका बड़ा हिस्सा मई 2025 तक चालू हो चुका है और जून तक पूरा नेटवर्क शुरू हो जाएगा। इससे दिल्ली–मेरठ का सफर सिर्फ 45 मिनट में तय होगा। मेरठ शहर के अंदर यह नेटवर्क मेट्रो की तरह काम करेगा जिससे रोजमर्रा की यात्रा बेहद आसान हो जाएगी।
वाराणसी में पारंपरिक मेट्रो परियोजना अभी योजना के स्तर पर है लेकिन एक अनोखी पहल शहरी रोपवे जोर पकड़ चुकी है। 3.8 किमी लंबी यह रोपवे लाइन कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक चलेगी और यह देश की पहली पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे सेवा होगी। ट्रायल रन जनवरी 2025 में शुरू हुआ था और अब अगले कुछ महीनों में इसे शुरू करने की तैयारी है। इससे पुराने शहर की भीड़ और जाम से राहत मिलेगी।
गोरखपुर, प्रयागराज, झांसी और बरेली जैसे शहरों में भी मेट्रो लाइट (Metro Neo) या मेट्रो प्रोजेक्ट्स पर योजनाएं बन रही हैं। गोरखपुर में निर्माण कार्य को मंजूरी मिल चुकी है और बाकी शहरों के लिए DPR तैयार की जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि हर बड़े और मध्यम शहर में किफायती और तेज सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिले। इन सभी परियोजनाओं से साफ है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ विकास की बातें नहीं कर रहा बल्कि जमीन पर बड़े बदलाव ला रहा है। मेट्रो और रैपिड रेल नेटवर्क से लोगों को बेहतर सफर मिलेगा, समय बचेगा, रोजगार के मौके बढ़ेंगे और शहरों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। Uttar Pradesh News
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