दावा किया जा रहा है कि यह कोई सामान्य कार्यकर्ता विंग नहीं, बल्कि अनुशासन, कौशल विकास और सामाजिक सेवा को आधार मानकर तैयार की गई खास टीम है। शुरुआत में ही इस सुहेलदेव सेना की तैनाती उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में कर दी गई है और आगे पूरे प्रदेश में इसे तेजी से विस्तार देने की बात कही जा रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा अलग चाल चलने के लिए पहचान बनाने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अब नया राजनीतिक प्रयोग शुरू कर दिया है। पूर्वांचल से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे राजभर ने इस बार एक अनोखी संगठनात्मक फोर्स खड़ी की है, जिसका नाम रखा गया है राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना (RSS)। दावा किया जा रहा है कि यह कोई सामान्य कार्यकर्ता विंग नहीं, बल्कि अनुशासन, कौशल विकास और सामाजिक सेवा को आधार मानकर तैयार की गई खास टीम है। शुरुआत में ही इस सुहेलदेव सेना की तैनाती उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में कर दी गई है और आगे पूरे प्रदेश में इसे तेजी से विस्तार देने की बात कही जा रही है।
राजभर की इस नई ‘सेना’ की सबसे ज्यादा चर्चा उसकी वर्दी को लेकर हो रही है। पहले जहां साधारण पीली टी–शर्ट और गमछे से काम चल जाता था, अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। नीली यूनिफॉर्म, पीली बेल्ट, कंधों पर रैंक बताने वाले सितारे, छाती पर बैच, सिर पर कैप और हाथ में पीला डंडा यूपी के गांव–कस्बों में दिखने वाला यह लुक किसी मिनी अर्धसैनिक बल की झलक देता है। संरचना भी बिल्कुल औपचारिक रखी गई है संगठन में सीओ, कमांडर और इंस्पेक्टर जैसे पद बनाए गए हैं, ताकि राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना उत्तर प्रदेश में एक व्यवस्थित और अनुशासित ढांचे के तहत काम करती दिखे।
ओपी राजभर का दावा है कि यह सेना किसी राजनीतिक ताकत–प्रदर्शन या विरोधियों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के गांवों के युवाओं को अनुशासन, कौशल, सामुदायिक सेवा और नेतृत्व की राह पर ले जाने के लिए तैयार की गई है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के सदस्य गांव–गांव जाकर लोगों की छोटी–बड़ी समस्याओं में मदद करेंगे, युवाओं को सही दिशा दिखाएंगे और समाज में जागरूकता फैलाने की भूमिका निभाएंगे। फिलहाल इस सेना की लॉन्चिंग उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में की गई है, लेकिन राजभर की निगाहें इससे कहीं आगे हैं। उनका टारगेट है कि आने वाले समय में कम से कम 1 लाख युवा इस संगठन से जुड़ें। प्रशिक्षण के लिए भी खास प्लान बनाया गया है। सेना के इन जवानों को सेवानिवृत्त IAS–PCS अधिकारी, लेखपाल और प्रशासनिक अनुभव वाले विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। ये अनुभवी लोग युवाओं को अनुशासन, फील्ड मैनेजमेंट और संगठन निर्माण की बारीकियां सिखाएंगे, ताकि यह पूरी टीम उत्तर प्रदेश में एक संगठित और असरदार नेटवर्क बनकर उभरे।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह कदम कई तरह के राजनीतिक संकेत भी छोड़ रहा है। राजभर लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में हैं, और यह सेना उनके लिए जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क बनाने का काम कर सकती है। विशेष रूप से पूर्वांचल और उस बेल्ट में जहां राजभर समाज का प्रभाव अधिक है, यह पहल आने वाले चुनावों में बड़ा फैक्टर बन सकती है। इस पूरी पहल की सबसे खास बात यह है कि राजभर युवाओं को सिर्फ राजनीति में खड़ा करने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें यूनिफॉर्म, रैंक, ट्रेनिंग, भूमिका और जिम्मेदारी भी दे रहे हैं जो किसी भी युवा को संगठन से मजबूत भावनात्मक जुड़ाव देता है। सेना के विस्तार और उसकी कार्यप्रणाली को देखते हुए साफ है कि यह कदम आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई कहानी लिख सकता है। UP News