आचार संहिता केस में अब्बास की बढ़ी टेंशन, कोर्ट ने तय किए आरोप

अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी।

अब्बास अंसारी
अब्बास अंसारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने अब्बास अंसारी समेत पांच आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है। अब यह केस औपचारिक बहस से आगे निकलकर साक्ष्य और गवाही के चरण में प्रवेश कर रहा है। कोर्ट ने अगली कार्यवाही के लिए 4 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।

कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

अब्बास अंसारी की पेशी को लेकर न्यायालय परिसर को छावनी जैसी सुरक्षा में तब्दील कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में चुनावी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी, मुख्य द्वार पर गहन तलाशी और जांच के बाद ही लोगों को भीतर जाने की अनुमति मिली। परिसर के भीतर और बाहर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी तरह की हलचल या अप्रिय स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।

क्या है मामला?

यह केस 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वक्त का है। आरोप है कि प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी निर्धारित सीमा से अधिक वाहनों के काफिले के साथ निकले थे, जो आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस संबंध में 12 फरवरी 2022 को दक्षिणटोला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने अब्बास अंसारी, शाहिद लारी, साकिब लारी, इसराइल अंसारी और रमेश राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बुधवार को इसी केस में सभी आरोपी अदालत में पेश हुए। अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी। पेशी के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इंकार किया। उन्होंने संक्षेप में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

सुप्रीम कोर्ट से गैंगस्टर एक्ट केस में मिली थी राहत

इस बीच, कानूनी मोर्चे पर एक राहत की भी चर्चा रही। इससे पहले 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एवं समाज-विरोधी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले में अब्बास अंसारी की पूर्ण जमानत याचिका मंजूर की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई में यह भी माना था कि वे लंबे समय से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और अब तक जमानत की शर्तों के दुरुपयोग का कोई आरोप सामने नहीं आया है। UP News

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"मुस्लिम अलग हुआ तो अखिलेश...” ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा प्रहार

इसके उलट उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाया और तंज कसते हुए कहा कि ये दल अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 10:38 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। बागपत दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो लोकतांत्रिक परंपरा और संगठनात्मक अनुशासन के साथ आगे बढ़ती है, जबकि कई दल परिवारवाद के दायरे से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि अगर मुस्लिम समाज का साथ सपा से छूट जाए, तो पार्टी की राजनीतिक जमीन इतनी खिसक जाएगी कि वह ग्राम प्रधानी तक जीतने की स्थिति में नहीं रहेगी। पाठक ने संकेतों में कहा कि सपा का जनाधार व्यापक जनसमर्थन से ज्यादा एक तय सियासी समीकरण पर टिका है, और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है।

“भाजपा में कार्यकर्ता भी अध्यक्ष बन सकता है”- पाठक

ब्रजेश पाठक ने मंच से कहा कि भाजपा में संगठनात्मक ढांचा ऐसा है कि सबसे पीछे बैठा कार्यकर्ता भी मेहनत के दम पर अध्यक्ष तक बन सकता है। इसके उलट उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाया और तंज कसते हुए कहा कि ये दल अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रहे हैं।

कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व एक परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमता है और आगे भी वही सिलसिला चलता रहेगा। 

सपा शासनकाल पर कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप

सपा पर तीखे हमले को आगे बढ़ाते हुए डिप्टी सीएम ने दावा किया कि सपा के शासनकाल में बागपत-बड़ौत क्षेत्र में अपराध, कब्जे और दबंगई की घटनाएं बढ़ीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में हथियारों का प्रदर्शन आम बात थी, माहौल तनावपूर्ण रहता था और बेटियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर गंभीर लापरवाही होती थी। डिप्टी सीएम ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है। UP News

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पत्नी-1, पत्नी-2… और संडे ऑफ: पंचायत का फार्मूला गांव में हिट!

जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।

पंचायत का संडे ऑफ फार्मूला चर्चा में
पंचायत का संडे ऑफ फार्मूला चर्चा में
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 10:14 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक गांव से सामने आई यह घटना रिश्तों की खींचतान और परंपराओं की पेचीदगी का ऐसा किस्सा बन गई है, जिसकी चर्चा अब उत्तर प्रदेश के चौपाल से लेकर थाने तक हो रही है। दो पत्नियों के बीच पति को अपने-अपने हिस्से में रखने की तकरार इतनी बढ़ी कि घर की बात सार्वजनिक हो गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख गांव की पंचायत ने मोर्चा संभाला और बातचीत के बाद एक लिखित समझौता तैयार कराया जिसमें पति के दोनों पत्नियों के साथ रहने के दिन बाकायदा तय कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि पंचायत ने रविवार को पति के लिए संडे हॉलिडे भी निर्धारित कर दिया, ताकि उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिता सके।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत नगलिया आकिल गांव का बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवक ने पहली शादी परिवार की रज़ामंदी से की थी, जबकि दूसरी शादी प्रेम-संबंध के बाद हुई। शुरुआत में दोनों रिश्ते अपनी-अपनी जगह चलते रहे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, पति के साथ रहने को लेकर दोनों पत्नियों के बीच टकराव तेज होता गया। घर का माहौल रोजाना की नोकझोंक और तनाव से भरने लगा, और विवाद इस हद तक बढ़ा कि घरेलू कलह उत्तर प्रदेश की पुलिस चौकी तक पहुंच गई, जहां से मामला फिर सामाजिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश शुरू हुई।

पंचायत का संडे हॉलिडे फॉर्मूला

शिकायत दर्ज होने के बाद मामला अदालत या लंबी कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ने से पहले ही उसे सामाजिक स्तर पर थामने के लिए उत्तर प्रदेश के इस गांव में पंचायत बुलाई गई। पंचायत में पंचों ने दोनों पत्नियों और पति की दलीलें सुनीं, फिर विवाद को शांत करने के लिए दिनों के बंटवारे वाला फार्मूला तय किया। समझौते के मुताबिक सोमवार से बुधवार तक पति पहली पत्नी के साथ रहेगा, जबकि गुरुवार से शनिवार तक दूसरी पत्नी के साथ। सबसे दिलचस्प शर्त यह रखी गई कि रविवार पति का वीकली ऑफ होगा उस दिन वह दोनों से अलग रहकर अपनी मर्जी से समय बिताएगा। विशेष परिस्थितियों में सीमित तौर पर एक-दो दिन आगे-पीछे करने की गुंजाइश भी रखी गई है। ताकि आगे फिर विवाद न उभरे, पंचायत ने इस फैसले को लिखित दस्तावेज में दर्ज कराकर तीनों पक्षों के हस्ताक्षर भी कराए।

उत्तर प्रदेश में पंचायतें क्यों बनती हैं मध्यस्थ

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई बार घरेलू विवाद जब थाने तक पहुंच जाते हैं, तो सामाजिक दबाव और घर की बात घर में निपटे वाली सोच के चलते पंचायतें मध्यस्थ की भूमिका निभाती हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कानूनी और सामाजिक दोनों पहलू जुड़े होते हैं, इसलिए समाधान अक्सर समझौते की शक्ल में सामने आता है जैसा इस मामले में भी बताया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब पति के समय को लेकर ऐसा बंटवारा चर्चा में आया हो। इससे पहले बिहार के पूर्णिया में भी एक प्रकरण सामने आया था, जहां परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा विवाद सप्ताह के दिनों के बंटवारे के आधार पर सुलझाया गया था। UP News

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