स्थानीय लोगों का कहना है कि जो भी सच्चे मन से पहलवान वीर बाबा के चरणों में झुकता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शादी-ब्याह की रुकावट से लेकर रोज़गार, बीमारी या पारिवारिक संकट – हर तरह की परेशानी से निजात पाने की उम्मीद में लोग यहां मत्था टेकने आते हैं।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एक ऐसा अनूठा धर्मस्थल है, जहाँ आस्था का रास्ता धर्म की सीमाओं से होकर नहीं, सीधे दिलों से होकर गुजरता है। पयागीपुर में स्थित पहलवान वीर बाबा का यह दरबार हिंदू हो या मुस्लिम – हर मजहब के लोगों के लिए समान रूप से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की गंगा–जमुनी तहजीब की मिसाल बन चुका यह धार्मिक स्थल हर गुरुवार को विशेष रूप से लोगों की भीड़ से भर जाता है।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पहलवान वीर बाबा का यह स्थान मंदिर भी है और मज़ार जैसा सूफियाना रंग भी समेटे हुए है। यहां हिंदू श्रद्धालु पूजा, पाठ और मनौती के साथ भगवा या अन्य रंग की चादर चढ़ाते हैं, तो मुस्लिम समुदाय के लोग बाबा के दरबार में हरी चादर अर्पित कर दुआ मांगते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो भी सच्चे मन से पहलवान वीर बाबा के चरणों में झुकता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शादी-ब्याह की रुकावट से लेकर रोज़गार, बीमारी या पारिवारिक संकट – हर तरह की परेशानी से निजात पाने की उम्मीद में लोग यहां मत्था टेकने आते हैं।
कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में पहलवान वीर बाबा का स्थान लगभग सौ वर्ष पुराना है। लंबे समय तक यह जगह स्थानीय स्तर तक ही जानी जाती रही, लेकिन अंग्रेजों के दौर में यहां घटा एक घटनाक्रम इस स्थान को पूरे इलाके में चर्चित बना गया। मान्यता के अनुसार, जब अंग्रेज शासनकाल में सुल्तानपुर के पास रेल ट्रैक बिछाने का काम शुरू हुआ, तो पयागीपुर के इस हिस्से में रोज एक अजीब घटना होती थी। दिन में मजदूर पटरी बिछा देते, लेकिन रात होते-होते वही पटरी उखड़ जाती। लगातार कई दिनों तक ऐसा होने पर अंग्रेज अफसर परेशान हो गए। कथाओं के मुताबिक, दिल्ली में बैठे एक वरिष्ठ रेल अधिकारी को सपने में पहलवान वीर बाबा ने दर्शन देकर संदेश दिया कि जिस जगह रेल की पटरी बिछाई जा रही है, वह उनका आसन है। पहले उनके स्थान को व्यवस्थित कर थोड़ा हटकर रेल लाइन डाली जाए, तभी काम निर्विघ्न पूरा होगा। इसके बाद कथित रूप से ट्रैक की दिशा में परिवर्तन किया गया और काम बिना रुकावट पूरा हो गया। इसी घटना के बाद उत्तर प्रदेश के इस पूरे इलाके में पहलवान वीर बाबा के चमत्कार और आस्था की चर्चा फैल गई।
आज स्थिति यह है कि सिर्फ सुल्तानपुर ही नहीं, उत्तर प्रदेश के आसपास के कई जिलों से लोग यहां पहुंचते हैं। अमेठी, रायबरेली, जौनपुर, प्रतापगढ़, अयोध्या और अंबेडकर नगर समेत कई ज़िलों से श्रद्धालु हर हफ्ते बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर परिसर में प्रसाद के रूप में लड्डू, पेड़ा, खुरमा आदि चढ़ाया जाता है। गुरुवार के दिन उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्तों की भीड़ सबसे ज्यादा रहती है। कई लोग अपनी पहली मनोकामना पूरी होने के बाद दूसरी मनौती लेकर दोबारा यहां पहुंचते हैं।
पहलवान वीर बाबा का यह मंदिर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर से लगभग 2 किलोमीटर दूर पयागीपुर इलाके में स्थित है। आईटीआई कॉलेज प्रांगण के ठीक बगल में बना यह देवस्थल मुख्य सड़क से भी आसानी से दिखाई दे जाता है। पयागीपुर चौराहे से करीब 200 मीटर और आईटीआई गेट से लगभग 100 मीटर की दूरी पर यह मंदिर श्रद्धालुओं का इंतज़ार करता है।