उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने लिया अहम फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है।

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योगी आदित्यनाथ नक्शे को समझते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 07:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने वाली है। निवेश प्रस्तावों को तेजी से अमल में लाने के उद्देश्य से सरकार ने लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की योजना बनाई है। इस कदम से न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि चार प्रमुख जिलों की आर्थिक तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में पहले से मौजूद निवेश प्रस्तावों के अनुसार, अलग-अलग नोड्स पर भूमि आवंटन के माध्यम से करीब 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इससे प्रदेश में औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे

सरकार की स्पष्ट और निवेशकों के अनुकूल डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज प्रशासनिक प्रक्रियाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि अब देशी कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे हैं। यह पहल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को और सशक्त करेगी। 

डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में झांसी सबसे तेजी से उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आया है। यहां बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बना रही हैं। झांसी में प्रस्तावित निवेश से बुंदेलखंड क्षेत्र को एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे लंबे समय से पिछड़े इस क्षेत्र को औद्योगिक पहचान मिलेगी।

स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा

अलीगढ़ और चित्रकूट नोड्स भी तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। अलीगढ़ में केमिकल, आॅफशोर और डिफेंस सपोर्ट से जुड़े उद्योगों के लिए निवेश प्रस्तावित हैं, जबकि चित्रकूट में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी से संबंधित इकाइयों के स्थापित होने की संभावना है। इससे इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का प्रसार होगा और स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। राजधानी लखनऊ के डिफेंस नोड में सीमित भूमि पर उच्च तकनीक आधारित यूनिट्स लगाए जाने की योजना है। ये यूनिट्स डिफेंस सप्लाई चेन, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी, जिससे प्रदेश की रणनीतिक क्षमता और बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिफेंस कॉरिडोर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और सभी निवेश प्रस्तावों पर तय मानकों के अनुसार तेजी से कार्य किया जा रहा है।

परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा

इस पूरी योजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय स्तर पर देखने को मिलेगा। भूमि आवंटन से किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, जबकि प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स को भी डिफेंस सेक्टर की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का यह विस्तार राज्य को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे : अब सिर्फ रफ्तार नहीं, सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे बनेगा

इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा।

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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 06:17 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे छोटा लेकिन सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। यह सड़क न केवल यात्रा का समय घटाएगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के जरिए यात्रियों की सुरक्षा को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इस एक्सप्रेसवे पर किसी भी दुर्घटना की जानकारी अब इंसानों के कॉल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट सिस्टम खुद ही खतरे को पहचान कर मदद पहुंचाएगा।

एआई तकनीक से होगी दुर्घटनाओं की पहचान

इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा। मशीन लर्निंग के माध्यम से यह तकनीक समय के साथ और अधिक सटीक होती चली जाएगी।

बिना कॉल के पहुंचेगी मदद

जैसे ही किसी असामान्य घटना का पता चलेगा, सिस्टम अपने आप उस स्थान की जानकारी के साथ एनएचएआई के कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके लिए किसी व्यक्ति को फोन करने की जरूरत नहीं होगी। इस तेज प्रक्रिया से आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय किया जा सकेगा। कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलते ही एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोलिंग वाहन मौके के लिए रवाना हो जाएंगे। इससे घायलों को दुर्घटना के बाद के सबसे महत्वपूर्ण समय, यानी गोल्डन आवर, में इलाज मिल सकेगा। यह व्यवस्था जान बचाने में बेहद अहम साबित होगी।

24 घंटे स्मार्ट निगरानी

नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने इस एक्सप्रेसवे पर एंट्री ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को आॅटोमैटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ा है। इसके तहत दिन-रात एआई और कैमरों की मदद से पूरी सड़क की निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।

अत्याधुनिक कंट्रोल रूम

उन्नाव और लखनऊ की सीमा के पास एक हाईटेक एटीएमएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की निगरानी होगी। यह सिक्स लेन एक्सप्रेसवे पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड है, जिसमें न तो कोई चौराहा है और न ही कोई कट। इसमें तीन इंटरचेंज और सीमित एंट्री-एग्जिट गेट बनाए गए हैं।

कम समय में लंबा सफर

सड़क को बेहद समतल बनाने के लिए जीपीएस आधारित मशीन गाइडेंस और लेजर ग्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके कारण ड्राइविंग के दौरान तेज रफ्तार का अहसास कम होगा। औसतन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यह सफर, जो पहले दो से तीन घंटे में पूरा होता था, अब लगभग 30 मिनट में संभव हो सकेगा।

आधुनिक सुविधाएं और मजबूत ढांचा

एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए दो रेस्ट एरिया, दो फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज, चार बड़े पुल और 25 छोटे पुल बनाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 1.47 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में आरएस वॉल का निर्माण किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती और सुरक्षा और बढ़ गई है। स्मार्ट कैमरे और सेंसर आधारित सिस्टम पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाए रखते हैं। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक और बेहतर योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक्सप्रेसवे साबित करता है कि नई सड़कों का मकसद सिर्फ दूरी कम करना नहीं, बल्कि हर सफर को सुरक्षित बनाना भी है। तेज, सुरक्षित और स्मार्ट यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में सड़क परिवहन की नई पहचान बनेगा।

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पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा प्लान, शुरू होगा विशेष अभियान

प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 04:32 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश सरकार गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर एक ठोस और व्यावहारिक पहल की तैयारी में है। सरकार प्रदेश को ‘जीरो पावर्टी’ के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए ऐसा अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सीधे गांवों की जमीनी जरूरतों से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत होगी युवा भागीदारी एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र वालंटियर बनकर गांवों में पहुंचेंगे और परिवारों को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सशक्तिकरण से जोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे। अभियान की शुरुआत लखनऊ से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी और सफल मॉडल सामने आने पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा।

निगरानी सिस्टम भी होगा मजबूत

प्रमुख सचिव (नियोजन) और जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में चिन्हित गरीब परिवारों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। यह सर्वे सिर्फ सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार की जरूरत, क्षमता और उपलब्ध अवसरों का आकलन कर उनके लिए आजीविका बढ़ाने, स्किल ट्रेनिंग दिलाने, रोजगार के रास्ते खोलने और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली ठोस, परिणाम-आधारित कार्ययोजना बनाई जाएगी। अभियान को जमीन पर असरदार बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नोडल शिक्षक तैनात किए जाएंगे, जो कार्यक्रमों की निरंतर मॉनिटरिंग करेंगे और गांवों में चल रही गतिविधियों को दिशा व मार्गदर्शन देकर यह सुनिश्चित करेंगे कि योजनाओं का लाभ सही परिवारों तक पहुंचे और बदलाव साफ नजर आए।

युवाओं को मिलेगी आवेदन में सीधी मदद

उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति है कि जीरो पावर्टी परिवारों के लिए माइक्रो-प्लानिंग के जरिए मदद को टारगेटेड और परिणाम-आधारित बनाया जाए। यानी हर परिवार की आर्थिक स्थिति और जरूरतों के मुताबिक स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट लिंकेंज और रोजगार के ठोस अवसर तय किए जाएंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश के पात्र युवाओं को आवेदन प्रक्रिया में हर स्तर पर सहयोग मिलेगा, ताकि वे किसी भी सरकारी योजना के लाभ से कागजी उलझनों के कारण वंचित न रहें। सरकार नियमित मेंटोरिंग, प्रगति की ट्रैकिंग और फॉलो-अप पर भी खास जोर देगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी योग्य लाभार्थियों तक योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज पहुंचे और परिवार सचमुच गरीबी के दायरे से बाहर निकल सकें।

डीएम स्तर पर होगा एमओयू

उत्तर प्रदेश सरकार इस अभियान को कागजी औपचारिकता में सिमटने नहीं देना चाहती, इसलिए जिला प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत और जवाबदेह समन्वय तंत्र खड़ा किया जाएगा। योजना के तहत जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू किए जाएंगे, ताकि जिम्मेदारियां तय हों और काम तय समयसीमा में जमीन पर उतर सके। इसके साथ ही हर तीन महीने त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित कर प्रगति की वास्तविक रिपोर्ट ली जाएगी। इन बैठकों में लक्ष्य बनाम उपलब्धि का आकलन होगा और जहां कमी दिखेगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम तय कर रणनीति को और प्रभावी बनाया जाएगा। UP News

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