जेल जाने से बच गया उत्तर प्रदेश का यह चर्चित IAS अफसर
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इस चर्चित IAS अधिकारी के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह चर्चित IAS अधिकारी जेल जाने से बच गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश का एक चर्चित IAS अफसर जेल जाने से बाल-बाल बच गया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद उत्तर प्रदेश का यह चर्चित IAS अधिकारी जेल नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इस चर्चित IAS अधिकारी के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह चर्चित IAS अधिकारी जेल जाने से बच गया है।
उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को था जेल जाने का खतरा
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में तैनात IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश के ऊपर घूसखोरी का आरोप है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का यह आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह पूरा मामला पूरी तरह से बंद हो सकता है।
क्या है उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का मामला?
उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का यह पूरा मामला रिश्वतखोरी तथा कमीशन के लेन-देन से जुड़ा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय का है जब उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश में इंवेस्ट यूपी के (CEO) के पद पर तैनात थे। IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के बदले पांच फीसदी कमीशन मांगा था। इस मामले में निकांत जैन का नाम सामने आया था, जिसे अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित गोमतीनगर थाने में सोलर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दास ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज करवाई थी। FIR दर्ज होने के बाद यूपी एसटीएफ ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए SIT का गठन किया गया था।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में वादी ने पलट दिया अपना बयान
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में FIR दर्ज कराने वाले वादी विश्वजीत दास ने कोर्ट में कहा कि उसने गलतफहमी में FIR दर्ज करवा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निकांत जैन के खिलाफ न तो रंगदारी का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार का। कोर्ट ने यह भी पाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस को किसी भी तरह की रकम की वसूली या किसी लेनदेन से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इस फैसले के बाद चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश का एक चर्चित IAS अफसर जेल जाने से बाल-बाल बच गया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद उत्तर प्रदेश का यह चर्चित IAS अधिकारी जेल नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इस चर्चित IAS अधिकारी के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह चर्चित IAS अधिकारी जेल जाने से बच गया है।
उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को था जेल जाने का खतरा
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में तैनात IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश के ऊपर घूसखोरी का आरोप है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का यह आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह पूरा मामला पूरी तरह से बंद हो सकता है।
क्या है उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का मामला?
उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का यह पूरा मामला रिश्वतखोरी तथा कमीशन के लेन-देन से जुड़ा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय का है जब उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश में इंवेस्ट यूपी के (CEO) के पद पर तैनात थे। IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के बदले पांच फीसदी कमीशन मांगा था। इस मामले में निकांत जैन का नाम सामने आया था, जिसे अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित गोमतीनगर थाने में सोलर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दास ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज करवाई थी। FIR दर्ज होने के बाद यूपी एसटीएफ ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए SIT का गठन किया गया था।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में वादी ने पलट दिया अपना बयान
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में FIR दर्ज कराने वाले वादी विश्वजीत दास ने कोर्ट में कहा कि उसने गलतफहमी में FIR दर्ज करवा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निकांत जैन के खिलाफ न तो रंगदारी का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार का। कोर्ट ने यह भी पाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस को किसी भी तरह की रकम की वसूली या किसी लेनदेन से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इस फैसले के बाद चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है। UP News












