जेल जाने से बच गया उत्तर प्रदेश का यह चर्चित IAS अफसर

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इस चर्चित IAS अधिकारी के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह चर्चित IAS अधिकारी जेल जाने से बच गया है।

आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश
आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 02:32 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का एक चर्चित IAS अफसर जेल जाने से बाल-बाल बच गया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए एक आदेश के बाद उत्तर प्रदेश का यह चर्चित IAS अधिकारी जेल नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इस चर्चित IAS अधिकारी के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह चर्चित IAS अधिकारी जेल जाने से बच गया है।

उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को था जेल जाने का खतरा

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में तैनात IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश के ऊपर घूसखोरी का आरोप है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने अभिषेक प्रकाश के विरूद्ध दायर की गई चार्जशीट को रद्द करने का यह आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह पूरा मामला पूरी तरह से बंद हो सकता है। 

क्या है उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का मामला?

उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश का यह पूरा मामला रिश्वतखोरी तथा कमीशन के लेन-देन से जुड़ा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय का है जब उत्तर प्रदेश के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश में इंवेस्ट यूपी के (CEO) के पद पर तैनात थे। IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक प्रोजेक्ट के बदले पांच फीसदी कमीशन मांगा था। इस मामले में निकांत जैन का नाम सामने आया था, जिसे अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित गोमतीनगर थाने में सोलर कंपनी के अधिकारी विश्वजीत दास ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज करवाई थी। FIR दर्ज होने के बाद यूपी एसटीएफ ने निकांत जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए SIT का गठन किया गया था।

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में वादी ने पलट दिया अपना बयान

उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले में FIR दर्ज कराने वाले वादी विश्वजीत दास ने कोर्ट में कहा कि उसने गलतफहमी में FIR दर्ज करवा दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निकांत जैन के खिलाफ न तो रंगदारी का मामला बनता है और न ही भ्रष्टाचार का। कोर्ट ने यह भी पाया कि पूरे प्रकरण में पुलिस को किसी भी तरह की रकम की वसूली या किसी लेनदेन से जुड़े ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इस फैसले के बाद चर्चित IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत मिली है। UP News

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पत्नी के भूत ने भेजा ओटीपी, पति पहुंचा थाने तब खुला राज

कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली प्रियंका की शादी 14 मई 2017 को संदीप से हुई थी। शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य रहा। दोनों का एक बेटा भी हुआ। समय के साथ रिश्ते में खटास आने लगी और आए दिन विवाद होने लगे। 1 जुलाई 2024 को झगड़ा इतना बढ़ गया कि प्रियंका घर छोड़कर मायके चली गई।

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लापता महिला
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Feb 2026 02:31 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से जुड़ा यह मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जिस महिला को दो साल तक लापता मानकर उसकी हत्या की आशंका जताई जाती रही, वही अचानक एक ओटीपी के जरिए जिंदा मिल गई। पति ने जिसे मृत समझकर मुकदमा दर्ज कराया था, वह दूसरे राज्य में नई जिंदगी बसा चुकी थी।

अचानक लापता हुई पत्नी और बेटा

कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली प्रियंका की शादी 14 मई 2017 को संदीप से हुई थी। शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य रहा। दोनों का एक बेटा भी हुआ। समय के साथ रिश्ते में खटास आने लगी और आए दिन विवाद होने लगे। 1 जुलाई 2024 को झगड़ा इतना बढ़ गया कि प्रियंका घर छोड़कर मायके चली गई। वहां से वह अपने बेटे को साथ लेकर अयोध्या पहुंची। बताया जाता है कि वह मानसिक तनाव में थी और सरयू नदी के किनारे आत्महत्या का विचार कर रही थी। उसी दौरान राजस्थान से आए एक व्यक्ति ने उसे रोक लिया और समझाकर उसकी जान बचाई। इसके बाद प्रियंका ने नया जीवन शुरू करने का फैसला किया और उस व्यक्ति के साथ राजस्थान चली गई। वहां दोनों साथ रहने लगे।

पति ने जताई हत्या की आशंका

इधर, पत्नी और बेटे के अचानक गायब होने से संदीप परेशान था। उसने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे उसे शक हुआ कि कहीं ससुराल पक्ष ने गहनों के लालच में दोनों की हत्या तो नहीं कर दी। पुलिस से अपेक्षित कार्रवाई न मिलने पर उसने अदालत की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर 4 नवंबर 2024 को प्रियंका के माता-पिता समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। करीब दो साल तक पुलिस जांच करती रही, मगर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।

आधार अपडेट बना खुलासे की वजह

राजस्थान में रहते हुए प्रियंका ने अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव कराने का निर्णय लिया। वह आधार केंद्र पहुंची और फोटो व पते में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की। जैसे ही सिस्टम में पुराना आधार नंबर डाला गया, उससे जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा गया। वह नंबर अब भी संदीप के पास सक्रिय था। मोबाइल पर आया यह ओटीपी देखकर संदीप हैरान रह गया। उसे समझ में आ गया कि प्रियंका जीवित है। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। तकनीकी निगरानी की मदद से लोकेशन ट्रेस की गई और पुलिस टीम राजस्थान पहुंची। वहां से प्रियंका और उसके बेटे को बरामद कर लिया गया।

आमने-सामने आए पति-पत्नी

जब प्रियंका को बस्ती लाया गया, तो माहौल भावुक था। संदीप ने पत्नी और बेटे को देखा तो उसकी आंखें भर आईं, लेकिन उसने साफ कहा कि वह पत्नी के साथ दोबारा नहीं रहना चाहता। उसने केवल बेटे की कस्टडी की मांग की। हालांकि बच्चे ने पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया और उनके साथ रहने की इच्छा नहीं जताई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हत्या की एफआईआर अदालत के आदेश पर दर्ज की गई थी। महिला के जिंदा मिलने के बाद उसके बयान दर्ज कराए गए हैं। अब बच्चे की अभिरक्षा को लेकर कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच पूरी कर जल्द ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। यह घटना दिखाती है कि पारिवारिक तनाव कभी-कभी गंभीर कानूनी मोड़ ले सकता है। साथ ही, डिजिटल पहचान प्रणाली जैसे आधार सत्यापन अनजाने में भी बड़े खुलासे का कारण बन सकती है। दो साल तक जिस घटना को हत्या माना गया, वह अंतत: एक नई शुरूआत की कहानी साबित हुई। UP News


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उत्तर प्रदेश बजट में किसानों की बल्ले-बल्ले, खुला सौगातों का पिटारा

UP Budget: उत्तर प्रदेश बजट 2026-27 में किसानों के लिए बड़ी राहत और कई अहम घोषणाएं की गई हैं। गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी, गेहूं और धान की रिकॉर्ड खरीद, मुफ्त बिजली सुविधा, फसली ऋण वितरण और बीमा भुगतान जैसी योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

Uttar Pradesh Budget
यूपी बजट में किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Feb 2026 02:20 PM
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उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है और इस बार का बजट किसानों के लिए बड़ी सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। जहां वर्ष 2025-26 का बजट 8,08,736 करोड़ रुपये था वहीं 2026-27 का बजट बढ़कर 9,12,696.35 करोड़ रुपये हो गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़े हुए बजट में किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं लेकिन सबसे ज्यादा राहत और फायदा किसानों को मिला है।

कृषि में उत्तर प्रदेश की मजबूती

वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में कृषि उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्य है। गेहूं, धान, गन्ना, आलू, केला, आम, अमरूद, आंवला और मेंथा जैसे उत्पादों में प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ा योगदान है। सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत

योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक 3,04,321 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराया है। यह भुगतान पिछले 22 वर्षों के कुल 2,13,519 करोड़ रुपये से भी 90,802 करोड़ रुपये अधिक है। इसके अलावा पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले से गन्ना किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

गेहूं, धान और बाजरा खरीद में रिकॉर्ड भुगतान

रबी विपणन वर्ष 2025-26 में 10.27 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद कर 2,512 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 42.96 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद के बदले किसानों को 9,710 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ। इसके साथ ही 54,253 किसानों से 2.14 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीद कर 595 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे साफ है कि सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने पर जोर दे रही है।

लखनऊ में बन रहा किसान एग्री हब

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर में किसान एग्री हब का निर्माण कार्य चल रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का बेहतर बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध कराना है। इससे कृषि उत्पादों की मार्केटिंग और व्यापार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

मुफ्त बिजली से सिंचाई में राहत

किसानों को 1 अप्रैल 2023 से नलकूपों के जरिए सिंचाई के लिए मुफ्त विद्युत आपूर्ति दी जा रही है। इस फैसले से खेती की लागत में कमी आई है और छोटे तथा मध्यम किसानों को सीधा लाभ मिला है। वर्ष 2025-26 में 19 दिसंबर 2025 तक अल्पकालिक फसली ऋण के तहत 10,257 करोड़ रुपये वितरित किए गए, जिससे 15 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए। वहीं दीर्घकालिक ऋण में 600 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 205 करोड़ रुपये का वितरण कर 6,870 किसानों को फायदा पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक लगभग 62 लाख किसानों को 5,110 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई। वर्ष 2025-26 में खरीफ सीजन के दौरान 2.69 लाख बीमित किसानों को 215 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

पीएम किसान सम्मान निधि का बड़ा लाभ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 3.12 करोड़ किसानों के खातों में लगभग 94,668 करोड़ रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की गई। इससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिली है और खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिली है।

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