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UP News: उत्तर प्रदेश के इस मामले ने पुलिस व्यवस्था, मालखानों की सुरक्षा और सरकारी संपत्तियों के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में अदालत द्वारा सोने के आभूषण लौटाने का आदेश दिए जाने के बाद पुलिस ने जो सफाई पेश की, उसने सभी को चौंका दिया।

UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस ने अजब तथा गजब प्रकार का दावा किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस का यह दावा है कि थाने के मालखाने में रखे हुए कीमती जेवर (गहने) बंदरों ने लूट लिए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस का यह अजब दावा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया के यूजर्स उत्तर प्रदेश पुलिस के दावे की खूब मजाक उड़ा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा ‘बंदर कथा’ बनकर वायरल हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का है यह अजीब मामला
यह अजीब मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केवल प्रेस के सामने ही नहीं बल्कि अदालत के सामने भी यह दावा किया है कि कुछ बंदर थाने के मालखाने में रखे हुए गहने लेकर फरार हो गए। उत्तर प्रदेश के इस मामले ने पुलिस व्यवस्था, मालखानों की सुरक्षा और सरकारी संपत्तियों के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में अदालत द्वारा सोने के आभूषण लौटाने का आदेश दिए जाने के बाद पुलिस ने जो सफाई पेश की, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस का कहना है कि मालखाने में रखे गए सोने के गहने "बंदर उठा ले गए"। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में वर्षों पहले दर्ज एक दहेज उत्पीड़न प्रकरण में अदालत ने संबंधित पक्ष को जब्त किए गए आभूषण वापस करने का आदेश दिया था। जब पुलिस से मालखाने में जमा जेवरों का हिसाब मांगा गया तो जवाब मिला कि कुछ वर्ष पहले गहनों को धूप में सुखाने के लिए छत पर रखा गया था और उसी दौरान बंदर उन्हें उठाकर ले गए। पुलिस की इस दलील ने अदालत को भी हैरान कर दिया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकारी मालखाने में जमा कीमती सोने के आभूषणों को छत पर क्यों रखा गया और उनकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
यूपी पुलिस के मालखानों की सुरक्षा पर बहस
लखीमपुर खीरी की यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतों में प्रस्तुत किए जाने वाले जब्त सामान की सुरक्षा पुलिस की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में "बंदर गहने ले गए" जैसी दलील न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे उत्तर प्रदेश की सबसे अनोखी सरकारी सफाई बताया, जबकि कुछ ने इसे मालखानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलना करार दिया। मामले को लेकर आम जनता के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
लखीमपुर खीरी फिर सुर्खियों में
नेपाल सीमा से सटा और उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला माने जाने वाले लखीमपुर खीरी का नाम इस बार किसी विकास कार्य या प्रशासनिक उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि एक विचित्र और विवादास्पद मामले के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मालखाने से सरकारी अभिरक्षा में रखे गए सोने के आभूषण वास्तव में गायब हुए हैं, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या मामले में विभागीय कार्रवाई होगी या फिर ‘बंदरों’ के सिर ही पूरा दोष मढ़ दिया जाएगा? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। जिस व्यक्ति के गहने गायब हुए हैं उस व्यक्ति ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर गहने लौटाने की मांग की है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस ने बंदरों पर ठीकरा फोड़ते हुए इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में दावा किया है कि जिस समय की यह घटना है उस समय थाने के मालखाने के प्रभारी (इंचार्ज) की मौत हो चुकी है इस कारण इस मामले की जांच करना संभव नहीं है। UP News
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