उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसकी कड़ियां जापान तक पहुंच रही थीं। चंदौली के मुगलसराय में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर से 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से साइबर अपराध का बड़ा मामला सामने आया है। मुगलसराय क्षेत्र में संचालित एक कथित अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस की संयुक्त टीम ने खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह Microsoft और Apple के तकनीकी सपोर्ट के नाम पर जापान के नागरिकों, खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करता था। पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक आरोपी VoIP सॉफ्टवेयर के जरिए जापानी डायल कोड (+81) प्रदर्शित कर लोगों से संपर्क करते थे। तकनीकी सहायता देने के नाम पर पीड़ितों को भरोसे में लेने के बाद उनके कंप्यूटर या अन्य डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल किया जाता था। इसके बाद ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाकर कथित तौर पर आर्थिक धोखाधड़ी की जाती थी। UP News
पुलिस के अनुसार, मुगलसराय क्षेत्र में एक स्थान पर कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर से विदेशों में फोन कर तकनीकी सहायता के नाम पर लोगों से संपर्क किया जाता था। आरोपियों द्वारा जापानी नंबर जैसा प्रदर्शित करने के लिए +81 डायल कोड का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इससे विदेशी नागरिकों को कॉल स्थानीय या विश्वसनीय तकनीकी सहायता सेवा से आने का भ्रम होने की आशंका जताई गई है। UP News
पुलिस के मुताबिक, गिरोह Microsoft और Apple जैसी कंपनियों के तकनीकी सपोर्ट से जुड़े होने का दावा कर लोगों से संपर्क करता था। पीड़ितों को उनके कंप्यूटर में तकनीकी समस्या होने की बात बताकर सहायता के नाम पर रिमोट एक्सेस लेने की कोशिश की जाती थी। जांच में Zopier5 और LogMeIn Rescue जैसे Remote Access Tools के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब बरामद डिजिटल उपकरणों और सॉफ्टवेयर से जुड़े डेटा की जांच कर रही है, ताकि कथित साइबर ठगी के पूरे तरीके और नेटवर्क का पता लगाया जा सके। UP News
पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान मौके से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 19 डेस्कटॉप सिस्टम, 3 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन और नेटवर्क राउटर शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस को कूटरचित आधार कार्ड भी मिले हैं। कार्रवाई के दौरान सक्रिय कंप्यूटर सिस्टम की पहचान कर उनके RAM Dumps सुरक्षित किए गए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों को आगे फोरेंसिक जांच के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पुलिस को कथित कॉलिंग गतिविधियों, डिजिटल संपर्कों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। प्रारंभिक तकनीकी जांच में करीब 100 जापानी मोबाइल नंबर और बैंकिंग संबंधी विवरण मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इन नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसके अलावा आरोपियों में से एक से जुड़े दो बैंक खातों में जमा करीब 9 लाख रुपये की रकम को फ्रीज कराया गया है। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन और कथित साइबर ठगी से इनके संबंध की जांच कर रही है। UP News
इस पूरे ऑपरेशन में कई पुलिस इकाइयों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार Cyber Commando मनीष सिंह, साइबर सेल वाराणसी जोन के तकनीकी सहयोग तथा SI आशीष मिश्रा और SI अर्जुन सिंह के नेतृत्व में SOG, सर्विलांस और साइबर टीम चंदौली ने समन्वित कार्रवाई की। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि कथित कॉल सेंटर कब से संचालित था, इसके पीछे कौन लोग जुड़े हैं और विदेशों में कितने लोगों को निशाना बनाया गया। UP News
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