यूपी के रामपुर स्थित अदालत ने दो पासपोर्ट और दो जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में विवादित पहचान बना चुके इस पिता–पुत्र की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में चल रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को रामपुर की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट ने बड़ी सजा सुनाई है। यूपी के रामपुर स्थित अदालत ने दो पासपोर्ट और दो जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में अब्दुल्ला आजम को 7 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में विवादित पहचान बना चुके इस पिता–पुत्र की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के रामपुर जेल में बंद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इससे पहले भी जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड वाले प्रकरण में 7–7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। ताजा केस में आई सजा के साथ अब्दुल्ला आजम के खिलाफ यह तीसरी बड़ी सजा है। यूपी की कानून व्यवस्था और सियासी गलियारों में इसे सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है कि संवैधानिक पदों पर बैठे या बैठ चुके लोगों को भी कानून से बाहर नहीं माना जाएगा।
यह मुकदमा लंबे समय से उत्तर प्रदेश के रामपुर और लखनऊ तक की राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग–अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पासपोर्ट बनवाए और उनका उपयोग भी किया। जांच के दौरान सामने आया कि एक पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी दूसरे पासपोर्ट में 30 सितंबर 1990 जन्मतिथि लिखी गई थी इसी विरोधाभास को आधार बनाकर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और गलत जानकारी देने की धाराओं में केस दर्ज हुआ, जिसकी सुनवाई यूपी की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही थी।
उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले में पहल करते हुए रामपुर के सिविल लाइंस कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने ‘कूटरचित और असत्य दस्तावेज’ तैयार कराए, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया और फिर उसका इस्तेमाल भी किया पुलिस जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट में केवल अब्दुल्ला आजम को ही नामजद किया गया।
दूसरा पासपोर्ट संख्या Z 4307442 अब्दुल्ला आजम को 10 जनवरी 2018 को जारी किया गया था। जांच में जानकारी गलत पाए जाने के बाद यह पासपोर्ट जब्त कर लिया गया।
यह पूरा मामला यूपी की एमपी–एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में विचाराधीन था। गवाहों के बयान और बहस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
फैसले वाले दिन अब्दुल्ला आजम को उत्तर प्रदेश की रामपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया और वहीं से उन्हें 7 साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
फैसला आने के बाद रामपुर जेल पहुंचे उनके वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि वे आजम खां से मुलाकात करने पहुंचे थे, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण मुलाकात नहीं हो पाई।
फैसले पर सवाल किए जाने पर वकील ने कहा कि “कोर्ट जो भी निर्णय देगा, हम उसका सम्मान करते हैं”। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि बचाव पक्ष ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है। UP News