मायावती ने घोषित कर दिए अनेक प्रत्याशी, शुरू किया मिशन-2027
‘‘मिशन-2027’’ की शुरूआत करते हुए मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने शुरू कर दिए हैं। मायावती ने उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।

UP News : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 पर तेजी के साथ काम शुरू कर दिया है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 को ‘‘मिशन-2027’’ का नाम दिया है। ‘‘मिशन-2027’’ की शुरूआत करते हुए मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने शुरू कर दिए हैं। मायावती ने उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
मायावती ने घोषित किए विधानसभा चुनाव के प्रभारी
बसपा मुखिया मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा के आधा दर्जन प्रभारी घोषित कर दिए हैं। बसपा में जिन नेताओं को विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया जाता है। उन्हीं नेताओं को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया जाता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 के लिए प्रत्याशियों की धड़ाधड़ घोषणा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने प्रदेश के आजमगढ़ जिले की दीदारगंज विधानसभा सीट पर अबुल कैश आजमी, जालौन जिले की माधोगढ़ विधानसभा सीट पर आशीष पांडे, जौनपुर जिले की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट पर विनोद मिश्रा और सहारनपुर देहात विधानसभा सीट पर फिरोज आफताब को प्रभारी बनाया है। मायावती ने जिस तरह साल 2007 के चुनाव में जिस सोशल इंजीनियरिंग के दम पर यूपी की सत्ता में वापसी की थी, अब उसी फॉर्मूले को 2027 में दोहराने की कोशिश है। यही वजह है कि मायावती ने फिलहाल जिन नेताओं को प्रभारी बनाया है, उसमें दो मुस्लिम और दो ब्राह्मण हैं। ऐसे में साफ है कि बसपा की नजर किस वोटबैंक पर है।
वर्ष—2007 वाला फार्मूला अपना रही है बसपा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे।प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था। 2027 के लिए बसपा ने जिस तरह से पहली फेहरिश्त में ब्राह्मण और मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया है, उससे साफ है कि मायावती की रणनीति क्या है? आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है। ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी। मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया। अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं। मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी। उत्तर प्रदेश की सियासत में फर्श से अर्श पर पहुंची बसपा का सियासी आधार 2012 के बाद से लगातार घिरता जा रहा है। बसपा 30 फीसदी वोट शेयर से घिरकर यूपी में 10 फीसदी से नीचे आ गया। यूपी में बसपा एक के बाद एक चुनाव हार रही है और उसका सियासी आधार दिन ब दिन सिमटता जा रहा है। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को सिर्फ एक सीट मिली थी और 2024 में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। 2027 का चुनाव बसपा के लिए अपने सियासी वाजूद को बचाए रखने की है। ऐसे में मायावती कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है, जिसके लिए लखनऊ में डेरा जमाकर लगातार बैठक कर संगठन को सियासी धार देने में जुटी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 बसपा के लिए करो या मरो वाला चुनाव होगा। UP News
UP News : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 पर तेजी के साथ काम शुरू कर दिया है। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 को ‘‘मिशन-2027’’ का नाम दिया है। ‘‘मिशन-2027’’ की शुरूआत करते हुए मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने शुरू कर दिए हैं। मायावती ने उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
मायावती ने घोषित किए विधानसभा चुनाव के प्रभारी
बसपा मुखिया मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा के आधा दर्जन प्रभारी घोषित कर दिए हैं। बसपा में जिन नेताओं को विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया जाता है। उन्हीं नेताओं को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया जाता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 के लिए प्रत्याशियों की धड़ाधड़ घोषणा शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने प्रदेश के आजमगढ़ जिले की दीदारगंज विधानसभा सीट पर अबुल कैश आजमी, जालौन जिले की माधोगढ़ विधानसभा सीट पर आशीष पांडे, जौनपुर जिले की मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा सीट पर विनोद मिश्रा और सहारनपुर देहात विधानसभा सीट पर फिरोज आफताब को प्रभारी बनाया है। मायावती ने जिस तरह साल 2007 के चुनाव में जिस सोशल इंजीनियरिंग के दम पर यूपी की सत्ता में वापसी की थी, अब उसी फॉर्मूले को 2027 में दोहराने की कोशिश है। यही वजह है कि मायावती ने फिलहाल जिन नेताओं को प्रभारी बनाया है, उसमें दो मुस्लिम और दो ब्राह्मण हैं। ऐसे में साफ है कि बसपा की नजर किस वोटबैंक पर है।
वर्ष—2007 वाला फार्मूला अपना रही है बसपा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे।प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था। 2027 के लिए बसपा ने जिस तरह से पहली फेहरिश्त में ब्राह्मण और मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया है, उससे साफ है कि मायावती की रणनीति क्या है? आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है। ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी। मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया। अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं। मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी। उत्तर प्रदेश की सियासत में फर्श से अर्श पर पहुंची बसपा का सियासी आधार 2012 के बाद से लगातार घिरता जा रहा है। बसपा 30 फीसदी वोट शेयर से घिरकर यूपी में 10 फीसदी से नीचे आ गया। यूपी में बसपा एक के बाद एक चुनाव हार रही है और उसका सियासी आधार दिन ब दिन सिमटता जा रहा है। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को सिर्फ एक सीट मिली थी और 2024 में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। 2027 का चुनाव बसपा के लिए अपने सियासी वाजूद को बचाए रखने की है। ऐसे में मायावती कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है, जिसके लिए लखनऊ में डेरा जमाकर लगातार बैठक कर संगठन को सियासी धार देने में जुटी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 बसपा के लिए करो या मरो वाला चुनाव होगा। UP News












